साइक्लोन मोंथा अपडेट: कमजोर हुआ सिस्टम, लेकिन बंगाल और गुजरात में भारी बारिश जारी

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  • 🔹सारांश

    • साइक्लोन मोंथा कमजोर होकर कम-दबाव वाले क्षेत्र (Low-Pressure Area) में तब्दील हो गया है, लेकिन इसका असर अब भी भारत के कई राज्यों में जारी है।

    • उत्तर बंगाल के चार जिलों में रेड अलर्ट जारी – 7 से 20 से.मी. तक भारी वर्षा की संभावना।

    • गुजरात के सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्रों में अरब सागर से आए दबाव के कारण तेज बारिश (30-65 किमी/घं. हवाएँ)।

    • दार्जिलिंग और कालिम्पोंग में भूस्खलन का खतरा – प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकाला।

    • 3 नवंबर से मौसम साफ होने का अनुमान ।


    🌧️ मोंथा बना लो-प्रेशर एरिया, लेकिन असर अब भी जारी

    साइक्लोन मोंथा, जिसने 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तट पर लैंडफॉल किया था, अब छत्तीसगढ़ के मध्य हिस्सों में पहुंचकर कमजोर पड़ चुका है।
    मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, यह सिस्टम वर्तमान में दक्षिण छत्तीसगढ़ के ऊपर सक्रिय है और धीरे-धीरे उत्तर-उत्तरपश्चिम दिशा में मध्य प्रदेश की ओर बढ़ रहा है।

    हालांकि यह तूफान अब “कमजोर” श्रेणी में आ चुका है, लेकिन बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के कारण यह अभी भी पूर्वी और पश्चिमी भारत में भारी वर्षा को प्रेरित कर रहा है।
    साथ ही, अरब सागर के ऊपर बना एक अलग दबाव क्षेत्र, जो वेरावल (गुजरात) से लगभग 370 किमी दक्षिण-पश्चिम में स्थित है, दोनों मिलकर भारत के मौसम को प्रभावित कर रहे हैं।


    🌀 पश्चिम बंगाल में रेड अलर्ट और भूस्खलन चेतावनी

    IMD ने उत्तर बंगाल के चार जिलों – दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार – में रेड अलर्ट जारी किया है।
    यहाँ 1 नवंबर तक 7 से 20 से.मी. तक वर्षा की संभावना है, जबकि कुछ स्थानों पर यह मात्रा 20 से.मी. से भी अधिक पहुँच सकती है।

    • दार्जिलिंग और कालिम्पोंग की पहाड़ियों में भूस्खलन का गंभीर खतरा बना हुआ है।

    • अक्टूबर की शुरुआत में हुई बाढ़ से मिट्टी पहले से गीली होने के कारण ढलान अस्थिर हैं।

    • प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों से लोगों को अस्थायी राहत शिविरों में स्थानांतरित किया है।

    इसके अलावा, कूचबिहार, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर और मालदा में ऑरेंज अलर्ट जारी है।


    🌧️ गुजरात में भी मोंथा का असर बरकरार

    गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्रों में अरब सागर से बने डिप्रेशन की वजह से भारी से बहुत भारी वर्षा हो रही है।
    IMD के अनुसार, 30 अक्टूबर से 2 नवंबर के बीच इन इलाकों में 30 से 65 किमी/घं. तक की हवाएँ चल सकती हैं और मूसलाधार बारिश जारी रहेगी।

    तटीय इलाकों में मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। स्थानीय प्रशासन ने निचले क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया है ताकि बाढ़ या जलभराव की स्थिति से बचा जा सके।


    🚨 क्या कहता है मौसम विभाग?

    • साइक्लोन मोंथा अब “Well-Marked Low Pressure Area” के रूप में दर्ज है।

    • यह सिस्टम अगले 24 घंटों में धीरे-धीरे कमजोर होकर डिप्रेशन से लो-प्रेशर जोन में बदल जाएगा।

    • 1 और 2 नवंबर तक देश के पूर्वी, मध्य और पश्चिमी हिस्सों में वर्षा का असर रहेगा।

    • 3 नवंबर से मौसम साफ होने की संभावना है।


    🌿 प्रशासन और जनता के लिए सलाह

    • भारी वर्षा और भूस्खलन की स्थिति में घर से अनावश्यक बाहर न निकलें

    • नदियों और ढलानों के पास रहने वाले परिवार सावधानी बरतें और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

    • किसानों को फसल और भंडारण सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है।

    • किसी भी आपात स्थिति में राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष (SDRF/NDRF) से संपर्क करें।


    📅 निष्कर्ष

    हालांकि साइक्लोन मोंथा अब अपना अधिकांश प्रभाव खो चुका है, लेकिन इसके अवशेष भारत के कई हिस्सों में बारिश का दौर बनाए रखेंगे।
    IMD ने संकेत दिया है कि नवंबर के पहले सप्ताह तक मौसम धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट आएगा।

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Author: NIMRA SALEEM

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