धराली हादसे में कुछ मिनटों में निचली बस्तियां तहस-नहस हो गईं थीं। उसी हादसे को याद कर ओंकारेश्वर की निचली बस्ती के रहवासी भी अब सिहर उठते हैं कि कहीं उसी तरह किसी दिन ओंकार पर्वत से बहकर आ रहा पानी उनकी बस्ती को न उजाड़ दे।

जिले की धार्मिक तीर्थनगरी ओंकारेश्वर के मांधाता पर्वत का एक हिस्सा इस समय गंभीर खतरे में है। यहां आदि गुरु शंकराचार्य की निर्माणाधीन भव्य प्रतिमा के सामने विशालकाय गड्ढे खोद दिए गए हैं, जो इन दिनों बारिश का पानी भर जाने से एक बड़े तालाब का रूप ले चुके हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि तेज बारिश के दौरान इन गड्ढों में जमा पानी एक दिशा में तेजी से बहने लगता है, जो रास्ते में पड़े मलबे, कंकड़-पत्थर और मिट्टी को साथ लेकर निचली बस्तियों तक पहुंचता है। इसका बहाव इतना तेज होता है कि आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा से निकलकर यह पानी नर्मदा और कावेरी नदी की ओर होते हुए गौरी सोमनाथ मंदिर क्षेत्र और उसके बाद कैलाश खो बस्ती से होकर गुजरता है, जिससे रास्ते में आने वाले सैकड़ों घर और दुकान खतरे में पड़ जाते हैं।
इसे लेकर कुछ वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें भारी मात्रा में पानी निचली बस्तियों से गुजरता दिखाई दे रहा है। गौरी सोमनाथ क्षेत्र के वार्ड पार्षद एवं भाजपा युवा नेता सुनील सोने का कहना है कि ॐकार पर्वत पर प्रतिमा स्थल के आसपास पहाड़ी को खोदकर बनाए गए गड्ढों में बारिश का पानी भर जाता है, जो बाद में तेज बहाव के साथ निचली बस्तियों में घुस जाता है। इस दौरान पानी के साथ आने वाले पत्थर कभी घरों की खिड़कियां तोड़ देते हैं, तो कभी आंगन में इतना मलबा भर जाता है कि बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है।
हाल ही में उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में पहाड़ों की दरारों में जमा बारिश का पानी अचानक नीचे उतरा था। कुछ ही मिनटों में पत्थर और मलबा लेकर आए इस सैलाब ने निचली बस्ती को तहस-नहस कर दिया था। उसी हादसे को याद कर ओंकारेश्वर की निचली बस्ती के लोग भी सिहर उठते हैं कि कहीं वैसा ही मंजर यहां भी न दोहराया जाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासन को अवगत करा चुके हैं लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकला है। बरसात का मौसम जारी रहने से फिलहाल खतरा बना हुआ है।




