अनुसूचित जातियों (एससी) के बीच आंतरिक आरक्षण को लेकर न्यायमूर्ति एचएन नागमोहन दास आयोग की रिपोर्ट गुरुवार को कर्नाटक कैबिनेट के सामने पेश की गई। इस रिपोर्ट पर कैबिनेट 16 अगस्त को एक विशेष बैठक में चर्चा करेगी। कर्नाटक उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश नागमोहन दास की अध्यक्षता वाले आयोग ने चार अगस्त को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को 1766 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी। कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री एचके पाटिल ने कहा कि आयोग ने कम समय में सर्वेक्षण के बाद रिपोर्ट प्रस्तुत की है। सर्वेक्षण में समुदाय की 92 प्रतिशत आबादी को शामिल किया गया है। रिपोर्ट को मंत्रिमंडल के समक्ष रखा गया और सभी मंत्रियों को इसकी एक प्रति दी गई है। 16 अगस्त को इस पर चर्चा करने और निर्णय लेने के लिए एक विशेष कैबिनेट बैठक होगी। आंतरिक आरक्षण का उद्देश्य 101 अनुसूचित जातियों को दिए गए 17 प्रतिशत आरक्षण मैट्रिक्स को कम करना है।

असम के गांव में चरागाह आरक्षित भूमि से 114 परिवार बेदखल
असम सरकार ने गुरुवार को लखीमपुर जिले में गांव के चरागाह (वीजीआर) पर कथित रूप से अतिक्रमण करने वाले 114 परिवारों को बेदखल कर दिया। साथ ही 78.21 एकड़ (237 बीघा) जमीन खाली करा दी गई। फुकोंडोली गांव में बेदखली अभियान भारी सुरक्षा घेरे में चलाया गया। एक अधिकारी ने बताया कि परिवारों को 31 जुलाई को नोटिस दिया गया था। अधिकांश लोगों ने अपना सामान हटा लिया था। 25 प्रतिशत लोग पहले ही गांव छोड़ चुके हैं। उन्होंने बताया कि गांव निचले इलाके में है और वहां बसने वालों ने कथित तौर पर मछली पालन के लिए तालाब खोदे थे, जिससे प्रत्येक परिवार को सालाना 5 से 10 लाख रुपये की कमाई होती थी। बेदखल किये गये परिवार बंगाली भाषी मुस्लिम समुदाय से थे। परिवारों का दावा है कि उनके पूर्वज ब्रह्मपुत्र नदी के कटाव के कारण चार या नदी क्षेत्र में उनकी जमीन बह जाने के बाद उन क्षेत्रों में आकर बस गए थे, जहां अभियान चलाया गया था। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पहले दावा किया था कि मई 2021 में उनकी सरकार के सत्ता में आने के बाद से 160 वर्ग किलोमीटर से अधिक भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। इससे लगभग 50,000 लोग प्रभावित हुए हैं।