फतेहपुर में परिवार के तीन लोगों की खुदकुशी के मामले में नया मोड़ आ गया है। बहन का कहना है कि भाई कभी भी सीधा नहीं लिखता था वह हमेशा तिरछा लिखता था। ऐसी हैंडराइटिंग भाई की नहीं हो सकती है।

फतेहपुर में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत के बाद पुलिस ने बृहस्पतिवार को शवों का पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम से भी तीनों की मौत का राज नहीं खुल पाया। रिपोर्ट में संभावना जताई गई है कि तीनों ने पहले जहर खाया फिर तड़पने पर ब्लेड से गले और हाथ पर चोट पहुंचाई। अधिक खून बहने से मौत हो गई। हालांकि गले के घाव को देखकर डॉक्टर स्पष्ट नहीं कह पा रहे हैं कि तीनों ने खुद का गला रेता है। क्योंकि गले के घाव तिरछे हैं।
लखनऊ बाईपास रोड पर चौफेरवा गांव के रहने वाले अमर श्रीवास्तव, मां सुशीला और चाचा सुनील श्रीवास्तव के शव बुधवार शाम को बंद कमरे में लहुलूहान हालत में मिले थे। दरवाजा तोड़कर अमर का पिता सुशील और पड़ोसी अंदर पहुंचे तो अमर और सुशीला मृत पड़े थे। लहुलूहान सुनील ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया था। तीनों के गले और हाथ की नस कटी थी। एक सुसाइड नोट भी मिला था। शवों का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल ने किया इसकी वीडियोग्राफी भी करवाई गई है।
पोस्टमार्टम में सल्फास के अंश और अधपचा खाना मिला है। गले पर गहरे घाव थे। अधिक खून बहने की वजह से मौत की पुष्टि हुई है। जहर की जांच के लिए विसरा सुरक्षित किया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अक्सर आत्महत्या में गले का घाव सीधा होता है। टेढ़े घाव के निशान जहर खाने के कारण छटपटाहट होने पर भी हो सकते हैं या फिर एक-दूसरे को मारने के कारण भी ऐसा हो सकता है। अब पुलिस की विवेचना में ही स्थिति साफ होगी।
10 मार्च को था अमर का जन्मदिन, पिता ने दिए थे 100 रुपये
घटना से ठीक एक दिन पूर्व अमर श्रीवास्तव ने अपनी जिंदगी के 29 साल पूरे किए थे। इसके बाद सबकुछ खत्म हो गया। परिवार ने 10 मार्च को अमर का जन्मदिन मनाया था लेकिन परिवार के लोगों के मन में क्या चल रहा था यह कोई भांप नहीं सका।
सुशील श्रीवास्तव ने बताया कि बेटे अमर का 10 मार्च को जन्मदिन था। उन्होंने बेटे का टीका कर लंबी आयु की कामना की और उपहार के रूप में 100 रुपये दिए। घटना की दोपहर करीब 11 बजे अमर ने उन्हें बुलाया और 170 रुपये देते हुए कहा कि पापा, जाओ दीदी के घर घूमकर आओ। इसके बाद वह साइकिल लेकर पुत्री के घर जाने को निकला।
बहनोई अनमोल ने बताया कि अमर ने उन्हें करीब 11 बजे फोन किया था। वह बाइक में थे इसलिए अधिक बातचीत नहीं हो पाई। शाम करीब चार बजे परिवार ने 20 से 30 बार कॉल की लेकिन अमर का मोबाइल बंद आया।
पड़ोसी बोले- दोपहर तीन बजे आए थे बाइक सवार
घटनास्थल के पास रहने वाले बुजुर्ग ने बताया कि दोपहर तीन बजे के आसपास अमर के घर बाइक सवार दो लोग आए। वे सुनील श्रीवास्तव को गुड्डू कहकर तेज आवाज में बुला रहे थे। कोई जवाब नहीं मिलने पर चले गए। गेट पर ताला लगा था लेकिन जालीदार होने की वजह से कोई अंदर से बाहर ताला लगा सकता है। ये बाइक सवार कौन थे पुलिस के सामने सवाल है। बुजुर्ग ने बताया कि सुनील उर्फ गुड्डू को होली पर गुझिया खिलाने के लिए घर बुलाया गया था। इस दौरान सुनील ने कहा था कि अब जिंदगी का ठिकाना नहीं है। कयास लगाए जा रहे हैं कि अमर, सुनील और सुशीला के बीच होली के दौरान से ही तनाव था।
मौसेरी बहन के घर में खेली थी होली
होली पर अमर श्रीवास्तव अपने सभी नाते-रिश्तेदारों के घर में होली खेलने पहुंचे। वह मसवानी मोहल्ले में मौसेरी बहन प्रिंसी के घर गया। अपनी सगी बहन दीपिका और बहनोई अनमोल से भी होली मिलने गया। प्रिंसी ने मोबाइल पर होली की फोटो दिखाई और कहा कि भाई ने ऐसा क्यों किया कुछ समझ नहीं आ रहा है।
पिता और बहनोई बोले- होली से तनाव में था अमर
पिता सुशील कुमार श्रीवास्तव और बहनोई अनमोल ने बताया कि अमर होली से तनाव में था और गुमसुम रहने लगा था। पिता ने कहा कि बेटे की उनसे दूरी रहती थी। बेटा अपने चाचा और मां के साथ ही काम-धंधे और लेनदेन की बातचीत करता था। वे सिर्फ घरेलू कामकाज ही देखते थे और कुछ बड़ी बात होने पर ही उन्हें पता चलता था।
किसी पर अंगुली न उठाने वाले परिवार ने कैसे की होगी घटना
परिवार के तीन सदस्यों की आत्महत्या के मामले में हर किसी जुबान पर एक ही शब्द है आखिर कैसे इतनी बड़ी घटना की होगी। अमर के परिचित बताते हैं कि वह कई साल से कर्ज से डूबा था। कई बार कर्जदार उससे गलत तरीके से पेश आए। उसने पलटकर जवाब तक नहीं दिया। परिवार के लोग भी बेहद सरल स्वभाव के थे।
ऐसे में इन लोगों ने पहले सल्फास खाया फिर कसाई की तरह शरीर पर घाव किए होंगे। कई वर्षों से प्रताड़ना का दंश झेल रहे परिवार के सामने अब वास्तव में टूट चुका होगा। अमर के बारे में बताते हैं वह कर्जदार जरूर था लेकिन ईमानदार था। यहां तक कि कर्जदार काफी रकम वसूलने के बाद उसे सताते रहते थे। पिता ने बताया कि कोरोना के बाद पुत्र मानसिक रूप से परेशान हो गया था।
तो ऑनलाइन देखा होगा मौत का तरीका
आम तौर पर लोग जानते हैं कि सल्फास ही खुदकुशी के लिए पर्याप्त है जिसे खाने के बाद जल्द से लोग नहीं बचते हैं। इसके बाद भी परिवार ने दूसरा विकल्प ब्लेड का रखा। मौके पर कोबरा ब्रांड का सल्फास, सल्फास घोलने में गिलास के अंदर चीनी का इस्तेमाल की संभावना फॉरेंसिक ने जताई है। सवाल उठता है कि विकल्प के रूप में ब्लेड का इस्तेमाल किया गया।
चर्चा है कि अमर ने मोबाइल पर खुदकुशी का तरीका देखा होगा। पुलिस ने फिलहाल मोबाइल जब्त किया है। मोबाइल जांच के लिए भेजा गया है। मोबाइल की हिस्ट्री खंगालने खुलासा हो सकता है। विवेचक अवनीश मिश्रा ने बताया कि फिलहाल ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है। तीनों शवों का शाम को भिटौरा घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।
सीधा नहीं भाई तिरछा लिखता था, हैंडराइटिंग पर उठाए सवाल
भाई कभी भी सीधा नहीं लिखता था वह हमेशा तिरछा लिखता था। ऐसी हैंडराइटिंग भाई की नहीं हो सकती है। ये बातें बृहस्पतिवार दोपहर करीब एक बजे घटनास्थल का जायजा लेने पहुंचे एसपी से मौसी और बहन ने कहीं। एसपी ने हैंडराइटिंग की जांच का आश्वासन दिया है। पुलिस ने तिहरे सुसाइड कांड में पिता सुशील कुमार श्रीवास्तव की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज की है। इसमें बताया कि पुलिसकर्मी व फील्ड यूनिट की टीम ने फर्श पर काफी मात्रा में खून पाया लेकिन दीवार पर कोई खून का छीटे नहीं थे।
मौके पर खून से सना ब्लेड, सल्फास की डिब्बी व कुछ केमिकल के डिब्बे, दो सल्फास की दुर्गंध वाले गिलास मिले हैं। तीनों ने कलाई की नस और गले को ब्लेड से काटा गया था। सुसाइड नोट सुशील ने पुत्र द्वारा लिखने की पुष्टि की है। पिता और बेटे के बीच खास कोई वास्ता नहीं रहता था। बृहस्पतिवार को लखनऊ में रहने वाली सुशीला की बहन ममता उर्फ बिट्टी, पुत्री तानवी उर्फ खुशी और शहर के मसवानी मोहल्ले में रहने वाली बहन किरन पुत्री प्रिंसी के साथ घटनास्थल पर पहुंचीं।
यहां एसपी एसपी अनूप सिंह भी मौजूद थे। एसपी से तानवी बोली कि सुसाइड नोट में भाई अमर की हैंडराइटिंग नहीं है। यह बात प्रिंसी भी जानती है। हाथ जोड़कर ममता और तानवी ने एसपी से जांच की मांग की। एसपी ने कहा कि चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।