Illegal Immigration: पढ़ाई खत्म… पर 7,000 छात्र अमेरिका से नहीं लौटे; पंजाब के कई परिवारों के भविष्य पर संकट

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अप्रवासी भारतीयों की अमेरिका से वापसी ने कई परिवारों को गहरा दर्द दिया है। बेहतर भविष्य के लालच में कोई कर्ज लेकर तो किसी ने जमीन बेचकर पैसा जुटाया और अमेरिका जाने की कोशिश में जुट गए। सही रास्ता नहीं मिला तो गलत ढंग से ही रवाना हो गया। एजेंटों के जाल में फंसे कई तो ऐसे भी हैं जो चंद दिनों पहले ही अमेरिका पहुंचे थे अब उनके घर मातम जैसे हालात हैं।

पिछले वर्ष अमेरिका में सबसे अधिक संख्या में भारतीय छात्रों ने वीजा नियमों का उल्लंघन किया और 7,000 भारतीय छात्र वीजा समाप्त होने के बावजूद अमेरिका में रुके रहे। उन्होंने न तो वर्क वीजा लिया और न ही स्टे लिया। इसमें भारी संख्या पंजाबियों की है, जो डॉलरों की चमक दमक के दीवाने हैं।

आव्रजन विशेषज्ञ जेसिका एम वॉन ने यह जानकारी दी है और कहा है कि भारत के बाद ब्राजील और चीन दूसरे स्थान पर आते हैं। इसके बाद प्रत्येक देश के करीब 2,000 छात्रों ने अपने वीजा की समाप्ति की परवाह नहीं की और निर्धारित समय सीमा के बाद भी अमेरिका में रह रहे हैं।

अमेरिकी न्यायपालिका सदन समिति के समक्ष बोलते हुए वॉन ने चेतावनी दी कि सभी अस्थायी वीजा श्रेणियों में, एफ-1 (शैक्षणिक छात्र) और एम-1 (व्यावसायिक छात्र) वीजा श्रेणियों में निर्धारित अवधि से अधिक समय तक रुकने की दर सबसे अधिक है।

41 लाख का कर्ज लेकर भेजा  निर्वासन से सदमे में परिवार
अमेरिका से निर्वासित भारतीयों में पंजाब के मोहाली का प्रदीप (23) भी है। परिवार ने उसे अमेरिका भेजने के लिए 41 लाख का कर्ज लिया। वह डंकी रूट से अमेरिका में घुसा था और बॉर्डर पर ही पकड़ लिया गया। प्रदीप के अमेरिका से लौटने पर परिवार सदमे में है। एक तरह उन्हें बेटे के घर पहुंचने का इंतजार है, तो दूसरी तरफ सिर पर चढ़े कर्ज की चिंता भी सता रही है।

प्रदीप की दादी गुरमीत कौर, मां नरिंदर कौर, पिता कुलबीर ने बताया, छह माह पहले जमीन बेचकर और 41 लाख का कर्ज लेकर प्रदीप को अमेरिका भेजा था। परिवार वालों ने भारत और पंजाब सरकार से गुहार लगाई है कि जो कर्ज उन्होंने बेटे के लिए लिया था, उसे लौटाने और बेटे को रोजगार दिलवाने में मदद की जाए।

चार दिन में ही वापस हो गया सतबीर
मूनक के जानी गांव निवासी सतबीर डंकी रास्ते से चार दिन पहले ही अमेरिका में दाखिल हुआ था। वह भी बुधवार को डिपोर्ट होकर अमृतसर पहुंच गया। ग्रामीणों के अनुसार, सतबीर पांच वर्ष पहले अपने हिस्से की जमीन बेचकर एजेंट के माध्यम से विदेश चला गया। वहां छोटे-छोटे अनेक देशों का सफर करते हुए चार दिन पहले ही मैक्सिको की सीमा पार कर अमेरिका में दाखिल हुआ था।

किसी ने 40 तो कोई 50 लाख रुपये खर्च कर गया था अमेरिका
स्थानीय कैंटोनमेंट इलाके के रहने वाले अजयदीप सिंह के दादा उसे लेने अमृतसर एयरपोर्ट पर पहुंचे। बेहद मायूस और दुखी दिख रहे दादा से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन वह इतने ज्यादा हताश थे कि उन्होंने बात करने से इन्कार कर दिया और बताया कि फिलहाल उनके पोते को पुलिस वालों ने हिरासत में रखा हुआ है क्योंकि कुछ औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।

स्वदेश लौटे अधिकतर भारतीयों ने बताया कि अमेरिका से जितने भी लोगों को यहां भेजा गया था, वह सभी एजेंटों के जरिये 40 से 50 लाख रुपये की रकम लगाकर वहां गए थे। एजेंटों की ओर से उन्हें डॉन्की मार्ग से भेजा जाता है, जिसमें सब पनामा, मैक्सिको के जंगलों के रास्ते अमेरिका के बॉर्डर पर पहुंचने के बाद दीवार फांदकर अमेरिका में प्रवेश करते हैं।

चिंताजनक यह भी कि जंगलों में मिलने वाले माफिया की ओर से उनका सारा सामान लूट लिया जाता है। जो लोग उन्हें जंगलों के रास्ते अमेरिका लेकर जाते हैं, वह उनके पासपोर्ट तक छीन लेते हैं।

भारी कर्ज और टूटे सपने
अमेरिका से वापस भेजे गए पंजाब के लोगों के परिजनों ने कहा कि उन्होंने परिवार के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद में अपने सदस्य की अमेरिका यात्रा के लिए भारी कर्ज लिया था। लेकिन अब उनके सभी सपने चूर चूर हो गए। साथ ही सिर पर इस कर्ज का पहाड़ टूटा है जिससे मुक्त हो पाना असंभव है।

पीड़ित परिवारों ने की गलत तरीका अपनाने वाले एजेंटों पर कार्रवाई की मांग
पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया कि ट्रैवल एजेंटों ने उनकी जानकारी के बिना युवाओं की अमेरिका यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए अनुचित तरीके अपनाए। उन्होंने ऐसे एजेंटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

वापस लौटे भारतीयों में 30 पंजाब के रहने वाल हैं। इनमें कपूरथला से छह, अमृतसर से पांच, पटियाला और जालंधर से चार-चार, होशियारपुर, लुधियाना, एसबीएस नगर से दो-दो तथा गुरदासपुर, तरनतारन, संगरूर, एसएएस नगर और फतेहगढ़ साहिब से एक-एक व्यक्ति शामिल हैं।
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Author: planetnewsindia

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