ग्राउंड रिपोर्ट: चार राज्यों और 20 जिलों की किस्मत सोने की तरह चमकाएगा जेवर, बड़े पैमाने पर पैदा होंगे रोजगार

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अकेले एक जेवर एयरपोर्ट ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान तक असर डालना शुरु कर दिया है। यहां से आप एक गांव को ग्लोबल हब के रूप में विकसित होते देख साफ साफ महसूस कर सकते हैं…

Jewar to Make Fortunes of Four States and 20 Districts Shine Like Gold Massive Job Creation on Horizon

एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनने की तरफ एक कदम बढ़ा चुके नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने केवल जेवर के नाम को ही चरितार्थ नहीं किया है बल्कि चार राज्यों और 20 जिलों की किस्मत को भी दमकने के लिए तैयार कर दिया है। जेवर एयरपोर्ट का प्रभाव एक जिले तक सीमित नहीं बल्कि पूरे पश्चिमी यूपी और एनसीआर के विकास मॉडल पर आधारित है।’

रातभर बारिश के बाद सुबह की हल्की धूप… चारों तरफ गेहूं की तैयार फसल, जिसका बड़ा हिस्सा पानी-आंधी के कारण गिर गया है। काफी फसल कटी पड़ी थी लेकिन खेत वीरान थे। बुंदेलखंड, पूर्वांचल और अवध के जिलों के किसानों की तरह अफरा-तफरा नहीं… इसे मुआवजे में मिली मोटी रकम की बेफिक्री करें या कुछ और… ये तो नहीं पता लेकिन यमुना सिटी से जेवर एयरपोर्ट के इस रास्ते पर महसूस होता है कि पूरे उत्तर भारत के विकास का नया दरवाजा खुल चुका है।

बड़े औद्योगिक नक्शे पर हैं कई गांव

यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे तेजी से आकार ले रहा यह ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट सिर्फ नक्शे का प्रोजेक्ट नहीं रहा बल्कि जमीन पर उतर चुका है। आसपास के रबूपुरा, दनकौर, जहांगीरपुर व बिलासपुर जैसे इलाके, जो कभी सामान्य कस्बे थे, आज बड़े औद्योगिक नक्शे पर हैं। विधायक धीरेन्द्र सिंह रबूपुरा के ही हैं। सबसे ज्यादा बड़ी इकाइयां जैसे मेडिकल डिवाइस पार्क, फिल्म सिटी, सेमीकंडक्टर और अपैरल पार्क जैसी परियोजनाएं इसी जगह पर है। स्थानीय लोगों की बातचीत में खेती के साथ प्लॉट, फैक्ट्री और जॉब जैसे शब्द आम हो गए हैं।

एक्सप्रेसवे पर दौड़ती गाड़ियां और ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी आने वाले समय में दिल्ली-मुंबई, गंगा और जेवर लिंक एक्सप्रेसवे इसे सबसे बड़े कनेक्टिविटी हब में बदल देंगे। इसी तरह ईस्टर्न पेरीफेरल 135 किमी लंबा भारत का पहला स्मार्ट और ग्रीन हाईवे है जो कुंडली (सोनीपत) से शुरू होकर बागपत, गाजियाबाद, नोएडा और फरीदाबाद होते हुए पलवल (हरियाणा) तक जा रहा है।

चार राज्यों की जमीन पर असर

यह एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड तक अपना असर छोड़ रहा है। ईस्ट-वेस्ट ट्रांसपोर्ट सर्विस चलाने वाले जे एस अरोड़ा ने कहा कि इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा की तुलना में जेवर उनके लिए ‘नजदीकी एयरपोर्ट’ है। उन्होंने बताया कि हरियाणा की तरफ से आने वाले रास्तों पर काम दिख रहा है। फरीदाबाद-जेवर एक्सप्रेसवे और पलवल लिंक रोड पर काम तेज है। ये रास्ते बनते ही दो घंटे की दूरी 20 मिनट में सिमट जाएगी।

  • पलवल-नोएडा एयरपोर्ट एक्सप्रेसवे (लगभग 31 किमी) भी हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों को सीधा लाभ पहुंचाएगा। राजस्थान के भरतपुर और अलवर के व्यापारी पहले से ही यहां निवेश की संभावनाएं तलाश रहे हैं।
  • एयरपोर्ट के कैचमेंट एरिया में उत्तराखंड महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। एयरपोर्ट प्रबंधन ने उत्तराखंड परिवहन निगम के साथ समझौता किया है, जिसके तहत एयरपोर्ट के संचालन के साथ देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश और हल्द्वानी जैसे शहरों के लिए सीधी बस सेवाएं शुरू की जाएंगी।
  • भविष्य में प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल लिंक से भी जोड़ा जा रहा है। एक्सप्रेसवे नेटवर्क के जरिए जेवर की पहुंच बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों तक भी लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी देगी।

बड़े पैमाने पर पैदा होंगे रोजगार

ग्रेटर नोएडा में रेडीमेड कारोबारी सुबोध अग्रवाल ने बताया कि जेवर से 30 किलोमीटर दूर खुर्जा, 60 किलोमीटर दूर बुलंदशहर और करीब 65 किलोमीटर दूर अलीगढ़ है। आगरा, मथुरा-वृंदावन सहित पूरी बेल्ट के जिलों में जमीन के दाम, वेयरहाउसिंग और इंडस्ट्रियल गतिविधियां आसमान पर हैं।

  • लॉजिस्टिक्स पार्क और वेयरहाउस इस बात का संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में यह इलाका उत्तर भारत का सप्लाई चेन हब बन सकता है। इससे होटल, ट्रांसपोर्ट और सर्विस सेक्टर में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
  • नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने हरियाणा रोडवेज के साथ एमओयू साइन किया है। इसके तहत पलवल, फरीदाबाद समेत हरियाणा के कई शहरों से एयरपोर्ट तक सीधी बस सेवाएं शुरू होंगी। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का वल्लभगढ़ लिंक भी हरियाणा से जेवर एयरपोर्ट तक एक्सेस को और मजबूत बनाएगा।
  • जेवर से नजदीक हरियाणा नया इंडस्ट्रियल एरिया बना रहा है। यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के सीईओ आर के सिंह के मुताबिक आरआरटीएस यानी रैपिड रेल ट्रांसपोर्ट सिस्टम और दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन भी इस इलाके को ग्लोबल नक्शे में मजबूती से दर्ज कराएगा।

किसान नेता श्योराज सिंह ने कहा कि विकास के नाम पर पहले यमुना एक्सप्रेस वे के लिए किसानों से सस्ती जमीनें ली गई, फिर जेवर एयरपोर्ट के लिए जमीनें चली गई। पहले हमारे खेत लिए गए, फिर रोजगार संबंधी वादे भी पूरे नहीं किए। इसीलिए धरने पर बैठे हैं। हमारी जमीनों के भाव सोने से भी कीमती हो गए हैं।

स्थानीय युवा सुनील भाटी ने कहा कि एयरपोर्ट की वजह से पूरे क्षेत्र का विकास बहुत हुआ है। एक्सप्रेस वे बन गए हैं। जमीनों के भाव बढ़ गए हैं। उद्योग धंधे यहां आ रहे हैं। हम चाहते हैं कि स्थानीय लोगों को ज्यादा से ज्यादा रोजगार मिले। जमीन चली गई। सभी को अच्छी नौकरी मिल जाए तो लोगों का जीवन बेहतर हो जाएगा।

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Author: ILMA NEWSINDIA

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