राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस के लिए विधायकों की एकजुटता व भाजपा के लिए सीट बचाना चुनौती; इस तरह से बन रहे समीकरण

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हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव का एलान हो गया है। कांग्रेस के लिए विधायक एकजुट रखना और भाजपा के लिए सीट बचाना चुनौती होगी। एक सीट भाजपा की पक्की तो दूसरी के लिए किसी दिग्गज को उतारने की तैयारी है। कांग्रेस में केंद्र से लेकर प्रदेश तक के नामों की लंबी लिस्ट है।
हरियाणा समेत दस राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए बुधवार को चुनाव 16 मार्च को होंगे। हरियाणा से किरण चौधरी व रामचंद्र जांगड़ा का कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो रहा है। फिलहाल दोनों सीटें भाजपा के पास हैं लेकिन विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों के अनुसार भाजपा व कांग्रेस के खाते में एक-एक सीट जाने की संभावना है।

भाजपा को दूसरी सीट भी अपने पास ही रखने के लिए नौ अतिरिक्त वोट चाहिए। इसके लिए पार्टी पूरा जोर लगाएगी। पिछले कुछ चुनावों में वोटों की संख्या पूरी नहीं होने के बावजूद भाजपा चुनाव जीतने में सफल रही है, ऐसे में कांग्रेस के लिए अपने विधायकों को एकजुट रखना व भाजपा से सीट छीनना चुनौती से कम नहीं होगा।

भाजपा के लिए भी दोनों सीटें जीतकर मजबूत दावेदारी पेश करने की बड़ी चुनौती है। चुनाव की घोषणा के साथ ही कांग्रेस व भाजपा में दावेदारों के नाम पर चर्चा शुरू हो गई है। भाजपा से कुलदीप बिश्नोई व पूर्व मंत्री कैप्टन अभिमन्यु का नाम दावेदारों में शामिल हैं। किरण चौधरी भी दोबारा से राज्यसभा जाने के लिए प्रयासरत हैं।

सूत्रों के अनुसार भाजपा एक सीट पर अपने कार्यकर्ता को खड़ा करेगी और दूसरी सीट से सुभाष चंद्रा व कार्तिकेय शर्मा जैसे किसी दिग्गज उम्मीदवार को उतार सकती है। कांग्रेस से प्रभारी बीके हरिप्रसाद, पवन खेड़ा व पूर्व प्रदेशाध्यक्ष उदयभान का नाम चर्चा में है।

जीत के लिए चाहिए 31 वोट, कांग्रेस के पास पर्याप्त आंकड़ा
राज्यसभा चुनाव के लिए विधायकों की संख्या और राज्यसभा की सीटों की संख्या के आधार पर राज्यसभा वोटों की संख्या तय की जाती है। इस चुनाव के लिए कुल विधायकों की संख्या x100/(राज्यसभा की सीटें+1)= +1 फार्मूला लागू होता है।

हरियाणा विधानसभा में कुल 90 सदस्य हैं। हर विधायक के वोट की वैल्यू 100 होती है। इसे उदाहरण से समझते हैं। हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने हैं। सबसे पहले कुल विधायकों को 100 से गुणा करते हैं, जो 9000 बनती है।

कुल सीटों में एक जोड़ते हैं तो संख्या तीन बनती है। अब 9000 में तीन से भाग देते हैं तो 3000 आता है। इसमें एक और जोड़ेंगे। यानी 3001 जोड़ बनता है। यानी किसी उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 31 विधायकों का समर्थन (31 × 100 = 3100) जरूरी है।

इनेलो व निर्दलीय साथ आए तो भी भाजपा को चाहिए 9 अतिरिक्त वोट
राज्यसभा का पूरा चुनाव रणनीति व समीकरण पर आधारित होगा। भाजपा चाहेगी वह दो उम्मीदवार उतारे। यानी पहली सीट पर भाजपा अपने एक उम्मीदवार को 31 वोट देकर जिता देगी। दूसरी सीट पर जब भाजपा उम्मीदवार उतारेगी तो चुनाव होगा।

यदि उम्मीदवार नहीं उतारा तो भाजपा व कांग्रेस के पास एक-एक सीट जाएगी। दूसरी सीट के लिए भाजपा के पास केवल 17 वोट बचेंगे। निर्दलीय के तीन व इनेलो के दो वोट उनके पक्ष में जाते हैं तो भी उन्हें जीत के लिए 9 क्रॉस वोट चाहिए होंगे यानी कांग्रेस के नौ विधायक अगर भाजपा के प्रत्याशी के हक में वोट करेंगे तभी जीत संभव है।

पहले भी हुआ है उलटफेर
2016 में भाजपा ने सुभाष चंद्रा को निर्दलीय चुनाव लड़वाया था। उस समय स्याही कांड के चलते पर्याप्त संख्याबल होते हुए कांग्रेस के आनंद चुनाव हार गए थे। वहीं, अगस्त-2022 के चुनावों में क्रॉस वोटिंग के चलते कांग्रेस के अजय माकन चुनाव हार गए जबकि भाजपा व जजपा समर्थन से निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले कार्तिकेय शर्मा जीत हासिल करने में कामयाब रहे थे।

राज्यसभा चुनाव कार्यक्रम
नोटिफिकेशन (Notification) 26 फरवरी
नामांकन की अंतिम तिथि (Last Date for Nomination) 5 मार्च
नामांकन जांच (Nomination Scrutiny) 6 मार्च
नाम वापसी (Withdrawal) 9 मार्च तक
मतदान (Polling) 16 मार्च
परिणाम (Results) 16 मार्च
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Author: PRIYA NEWSINDIA

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