मध्य प्रदेश में सड़क हादसों को कम करने और ट्रैफिक सिस्टम को आधुनिक बनाने के लिए सरकार ने बड़ी पहल की है। अब प्रदेश की यातायात व्यवस्था को सुधारने में IIT मद्रास की विशेषज्ञ टीम सहयोग करेगी। योजना के तहत राज्य के 49 जिलों में मॉडल चौराहे विकसित किए जाएंगे, जहां वैज्ञानिक तरीके से ट्रैफिक संचालन, सिग्नल सिस्टम और रोड इंजीनियरिंग को बेहतर बनाया जाएगा।
परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश में हर साल हजारों लोग सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाते हैं। इसकी बड़ी वजह अव्यवस्थित चौराहे, गलत डिजाइन और ट्रैफिक नियमों का पालन न होना है। IIT मद्रास के विशेषज्ञ प्रत्येक जिले के प्रमुख चौराहों का सर्वे करेंगे और वहां की जरूरत के अनुसार डिजाइन तैयार करेंगे। इसमें जेब्रा क्रॉसिंग, स्पीड ब्रेकर, साइन बोर्ड, स्मार्ट सिग्नल और पैदल यात्रियों की सुरक्षा पर खास फोकस रहेगा।
सरकार का मानना है कि यह प्रोजेक्ट सिर्फ ट्रैफिक सुधार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शहरों की सूरत भी बदलेगा। पहले चरण में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन जैसे बड़े शहरों के व्यस्त चौराहों को मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके बाद छोटे जिलों में काम आगे बढ़ेगा। परिवहन मंत्री ने कहा कि “हमारा लक्ष्य है कि मध्य प्रदेश की सड़कें सुरक्षित हों और हादसों की संख्या में कम से कम 50 फीसदी की कमी आए।”
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल चालान और सख्ती से ट्रैफिक नहीं सुधरता, सही इंजीनियरिंग सबसे जरूरी है। कई जगह चौराहों की बनावट ही ऐसी है कि दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। IIT मद्रास की टीम डेटा आधारित समाधान देगी, जिससे लंबी अवधि तक सकारात्मक नतीजे मिलेंगे।
इस पहल का स्वागत आम लोगों ने भी किया है। रोज सफर करने वाले नागरिकों का कहना है कि अगर चौराहे व्यवस्थित हो गए तो जाम और हादसे दोनों कम होंगे। अब देखना होगा कि यह योजना कितनी तेजी से जमीन पर उतरती है और प्रदेश की ट्रैफिक व्यवस्था को कितना सुरक्षित बना पाती है।