पंजाब में बढ़ रहा साइबर फ्राॅड: नाै जिलों में वित्तीय साक्षरता केंद्र नहीं, चार साल में 740 करोड़ की ठगी

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पंजाब में 3,278 ग्रामीण बैंक शाखाओं ने कुल 8,135 वित्तीय साक्षरता शिविर लगाए हैं। इस हिसाब से प्रति शाखा औसतन 2.48 शिविर ही लगाए गए जबकि निर्धारित मानक के अनुसार प्रत्येक ग्रामीण शाखा को प्रति तिमाही कम से कम तीन वित्तीय साक्षरता शिविर आयोजित करने चाहिए।

Nine districts in Punjab lack financial literacy centers; cyber fraud worth 740 crore reported in four years.

पंजाब में साइबर धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं लेकिन हैरानी की बात यह है कि प्रदेश के 9 जिलों में अब तक वित्तीय साक्षरता केंद्र ही स्थापित नहीं किए गए हैं।

वर्ष 2021 से 2025 के बीच राज्य में साइबर ठगी के 75 हजार से अधिक मामले सामने आए हैं, जिनमें करीब 740 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) ने सभी जिलों में अनिवार्य रूप से वित्तीय साक्षरता केंद्र खोलने के निर्देश दिए हैं और इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की है।

इन जिलों में नहीं खुले केंद्र

समिति की रिपोर्ट के अनुसार फरीदकोट, फतेहगढ़ साहिब, फाजिल्का, गुरदासपुर, कपूरथला, मुक्तसर साहिब, रूपनगर, संगरूर और मालेरकोटला में अभी तक वित्तीय साक्षरता केंद्र नहीं खोले गए हैं। दिशा-निर्देशों के मुताबिक हर जिले में कम से कम एक वित्तीय साक्षरता केंद्र होना अनिवार्य है। यदि किसी जिले में केंद्र नहीं है तो उसे शुरू करने की जिम्मेदारी संबंधित जिले के लीड बैंक की होती है।

शिविरों की संख्या भी मानक से कम

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि पंजाब में 3,278 ग्रामीण बैंक शाखाओं ने कुल 8,135 वित्तीय साक्षरता शिविर लगाए हैं। इस हिसाब से प्रति शाखा औसतन 2.48 शिविर ही लगाए गए जबकि निर्धारित मानक के अनुसार प्रत्येक ग्रामीण शाखा को प्रति तिमाही कम से कम तीन वित्तीय साक्षरता शिविर आयोजित करने चाहिए। समिति ने बैंकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे इस मानक का पालन सुनिश्चित करें और शिविरों की नियमित जानकारी समय पर समिति को भेजें।

साइबर जागरूकता पर रहेगा फोकस

राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में आयोजित होने वाले हर वित्तीय साक्षरता शिविर में साइबर धोखाधड़ी से बचाव, डिजिटल बैंकिंग, डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) का सही उपयोग और सुरक्षित ऑनलाइन लेनदेन जैसे विषय अनिवार्य रूप से शामिल किए जाएं। समिति का मानना है कि वित्तीय साक्षरता का दायरा बढ़ाकर ही आम लोगों को साइबर ठगों के जाल से बचाया जा सकता है।

75,087 साइबर ठगी के केस, 101 करोड़ रुपये फ्रीज

गृह मंत्रालय के सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 से 2025 के बीच पंजाब में साइबर धोखाधड़ी के 75,087 मामले दर्ज हुए हैं। इन मामलों में करीब 740 करोड़ रुपये की ठगी हुई, जबकि त्वरित कार्रवाई करते हुए 101 करोड़ रुपये की राशि को फ्रीज किया गया है। साइबर अपराध की तुरंत रिपोर्टिंग के लिए वर्ष 2021 में टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1930 भी शुरू किया गया था।

ऐसे जाल में फंसाते हैं ठग

साइबर ठग अक्सर खुद को बैंक या ग्राहक सेवा प्रतिनिधि बताकर लोगों को कॉल करते हैं और उनसे ओटीपी, पिन या अन्य निजी जानकारी हासिल कर लेते हैं। जानकारी मिलते ही वे बैंक खातों से रकम उड़ा लेते हैं।

डिजिटल अरेस्ट के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं, जिनमें अपराधी पुलिस, सीबीआई या ईडी के अधिकारी बनकर लोगों को डराते हैं और ठगी का शिकार बनाते हैं।

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Author: NIMRA SALEEM

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