सार
Humans in the Loop: फिल्म निर्माता किरण राव और बीजू टोप्पो ने निर्देशक अरण्य सहाय की पुरस्कार विजेता फिल्म ‘ह्यूमन्स इन द लूप’ के कार्यकारी निर्माता बनने का जिम्मा लिया है।

विस्तार
‘ह्यूमन्स इन द लूप’ अरण्य सहाय की पहली फीचर फिल्म है, जो एक आदिवासी महिला के जीवन पर आधारित है। यह महिला एआई डेटा लेबलर के रूप में काम करती है। यह फिल्म फेस्टिवल सर्किट में बहुत पसंद की गई है। अब यह कुछ और शहरों में दिखाई जाएगी। जिसकी कार्यकारी निर्माता किरण राव बनी हैं।
फिल्म को लेकर किरण राव की राय
एएनआई से बातचीत के दौरान किरण राव ने कहा, ‘मुझे यह फिल्म पहली बार देखते ही पसंद आ गई। यह बहुत भावुक और विचारों को जगाने वाली है। यह तकनीक, श्रम और उन ज्ञान प्रणालियों के बारे में महत्वपूर्ण संदेश देती है, जो खोने के खतरे में हैं। इस फिल्म का समर्थन करना मेरे लिए जरूरी था।’
फिल्म को लेकर बीजू टोप्पो की राय
बीजू टोप्पो, जो आदिवासी सिनेमा में जानी-मानी हस्ती हैं। उन्होंने अपनी फिल्म को लेकर कहा, ‘यह फिल्म उन लोगों की कहानी बयां करती है, जिन्हें मैंने देखा और जाना है। यह आदिवासी दृष्टिकोण को साहसपूर्वक दिखाती है। यह एक क्षेत्रीय और वैश्विक फिल्म है।’
‘ह्यूमन्स इन द लूप’ की कहानी
फिल्म ‘ह्यूमन्स इन द लूप’ झारखंड में सेट है और नेहमा नाम की एक उरांव आदिवासी महिला की कहानी पर आधारित है। यह दिखाती है कि कैसे तकनीक स्वदेशी ज्ञान को नजरअंदाज कर सकती है और समाज में बहिष्कार को बढ़ा सकती है। फिल्म ने हाल ही में FIPRESCI-India से ग्रैंड प्रिक्स पुरस्कार जीता है। अरण्य सहाय ने कहा कि किरण और बीजू के समर्थन से उन्हें बहुत हिम्मत मिली है। उन्होंने कहा, ‘यह फिल्म सिर्फ झारखंड की एक महिला की कहानी नहीं, बल्कि यह सवाल उठाती है कि हम तकनीक के साथ कैसा भविष्य बनाना चाहते हैं।’
कब और देख सकेंगे फिल्म
फिल्म ‘ह्यूमन्स इन द लूप’ को भारत भर में दिखाने के लिए निर्माताओं ने एक खास वितरण मॉडल अपनाया है, जिसे म्यूजियम ऑफ इमेजिन्ड फ्यूचर्स के इम्पैक्ट डिस्ट्रीब्यूशन फंड का समर्थन मिला है। यह फिल्म 5 सितंबर से मुंबई के सिनेपोलिस अंधेरी में और 12 सितंबर से दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, तिरुवनंतपुरम और बेंगलुरु में दिखाई जाएगी।