कठुआ में बारिश के बाद अचानक आई बाढ़ से खरोट गांव में भारी नुकसान हुआ है। रविवार सुबह करीब चार बजे के बीच अचानक बाढ़ का पानी का पानी लोगों के घरों में घुस गया। जिससे आफर तफरी मंच गई। गनीमत रही कि इलाके में कोई जान का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन घरों में रखा लाखों का सामान, खाद्य सामग्री, बिस्तर आदि पानी की चपेट में आने से खराब हो गए। वहीं कई जगह पर सड़कों को भारी नुकसान पहुंचा है। इससे यातायात, पानी और बिजली के इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी नुकसान हुआ है।
बाढ़ के बाद हुई तबाही का जिला प्रशासन के अधिकारियों द्वारा जायजा लिया जा रहा है। मौके पर पहुंचे कठुआ के विधायक डॉ. भारत भूषण ने बाढ़ प्रभावित गांव का दौरा कर नुकसान को जायजा लिया है।
परिवार वालों को जगाकर बाहर निकाला
बाढ़ से पीड़ित खरोट निवासी सरदार सिंह ने बताया कि रात के तीन और चार बजे के बीच का समय रहा होगा जब पानी उनके घर में घुस गया। क्योंकि मैं बाहर ही सो रहा था। जैसे ही पानी उनके घर में घुसा तो उसने घर के अंदर सो रहे परिवार वालों को जगाकर बाहर निकाला।
लगभग चार से पांच फीट पानी भारी मलबे के साथ घर में जमा
उन्होंने बताया कि देखते ही देखते बाढ़ के पानी के बीच घरों के अंदर रखे बेड उतराने लगे। लगभग चार से पांच फीट पानी भारी मलबे के साथ घर के अंदर इकट्ठा हो गया। इससे दरवाजे खुलना भी बंद हो गए। सुबह स्थानीय लोगों ने दरवाजों को तोड़कर बाढ़ के पानी को बाहर निकाला।
स्थानीय नछत्तर सिंह ने बताया कि पानी की रफ्तार इतनी तेज थी कि रात को पता ही नहीं चल रहा था कि क्या किया जाए। देखते ही देखते दो फीट मलबा उनके घरों के दरवाजों के आगे इकट्ठा हो गया। हरि सिंह ने ने बताया कि घर के बाहर खड़ी एक मोटरसाइकिल और इलेक्ट्रिक स्कूटर बह गई।
काफी समय बाद एक किलोमीटर दूर झाड़ियों में मिली। बाढ़ से न केवल सड़कों और गलियों को नुकसान पहुंचा है, बल्कि बिजली के पोल भी बढ़ में बह गए है। इससे बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हो गई है।
दो पोल्ट्री फॉर्म में घुसा पानी, पांच हजार से ज्यादा मुर्गे मरे
खरोट गांव में रविवार की सुबह आई अचानक बाढ़ का पानी दो पोल्ट्री फॉर्म के शेड में घुस गया। जिसके कारण फार्म के अंदर लगभग पांच हजार से अधिक मुर्गे मर गए।
पोल्ट्री फार्म के मालिक राजेश सिंह ने बताया कि बाढ़ की चपेट में आने से लगभग 3500 मुर्गे मर चुके है। वहीं, गांव में एक अन्य पोल्ट्री फार्म भी बाढ़ ने तबाही मचाई है। फार्म के मालिक अशोक सिंह ने अनुसार, उसके दो हजार के करीब मुर्गों की मौत हुई है।
दो मोटरसाइकिल सहित नौ वाहनों को नुकसान
जब बाढ़ का पानी खरोट गांव में घुसा तो एक निजी स्कूल के बाहर खड़े नौ वाहन मलबे में धंस गए। जिसमें दो लोड कैरियर ऑटों, एक टेंपो ट्रैवलर, एक ट्रेक्टर, एक स्कूल बस और चार कारें भी शामिल है। बाढ़ की चपेट में मोटरसाइकिल और इलेक्ट्रिक स्कूटी लगभग एक किलोमीटर दूर खस्ताहाल में झाड़ियों में फंसी मिली।
कठुआ में दो जगह बादल फटे, सात की मौत
किश्तवाड़ का दर्द अभी कम भी नहीं हुआ था कि कठुआ में दो जगह बादल फटने से भारी तबाही हुई है। जुथाना के जोड़ में जनजातीय समुदाय के पांच सदस्यों की मौत हो गई जबकि पांच बुरी तरह से घायल हैं। घायलों को चॉपर की मदद से पठानकोट के सैन्य अस्पताल ले जाया गया।
वहीं जंगलोट के बागड़ा में बादल फटने से मां और बेटी की मौत हो गई जबकि चार अन्य घायल हैं। मृतकों में पांच बच्चे शामिल हैं। इससे कई इलाकों में सड़क संपर्क कट गया। रेल यातायात रविवार तड़के 4 बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक बाधित रहा।
कठुआ के जोड़ जुथाना और जंगलोट के बागड़ा गांव में शनिवार देर रात बादल फटा। इन दोनों इलाकों के बीच की दूरी लगभग 15 से 20 रविवार तड़के तीन से चार बजे के बीच जिले में बारिश अचानक तेज हो गई। जुथाना के जोड़ इलाके में अनुसूचित जनजाति के परिवारों को भनक भी नहीं लगी कि कब बादल फटा और कब वे मलबे में जा दबे।
सूचना मिलते ही पुलिस, एनडीआरएफ और सेना मौके पर रवाना हो गई। घायलों को सेना की ओर से मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। यहां पांच शव मिले। घायल पांच अन्य लोगों को चॉपर से सैन्य अस्पताल पठानकोट ले जाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। इसी दौरान जुथाना के जोड़ से लगभग दस से पंद्रह किलोमीटर की दूरी पर बागड़ा इलाके में भी तबाही मच गई।
यहां कम आबादी वाले इलाके में बादल फटने के बाद तीन मकान पूरी तरह से मलबे में दब गए। जंगलोट में बाढ़ के चलते रेस्क्यू पहुंचने में समय लग गया। दोपहर एक बजे के लगभग एनडीआरएफ मौके पर पहुंची।
इससे पहले स्थानीय लोगों और पुलिस ने अपने स्तर पर अभियान चलाया। यहां दो शव बरामद किए गए जबकि एक बच्चे को भी सुरक्षित बचाकर अस्पताल ले जाया गया है। वहीं कनियाड़ी में बाढ़ की चपेट में आकर दो लोग घायल हुए हैं।