काजल मिलन को न्याय दिलाने के लिए पटना हाईकोर्ट के कर्मचारियों ने किया कैंडल मार्च

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8 अगस्त, 2025 को पटना हाईकोर्ट के कर्मचारी, परिवार के सदस्य और पटना के नागरिकों ने बोरिंग रोड स्थित ज्योतिपुंज हॉस्पिटल में डॉ. शिप्रा सिंह की लापरवाही से हुई काजल मिलन की मौत के खिलाफ पटना हाईकोर्ट से लेकर बोरिंग रोड चौराहा तक जुलूस निकालकर विरोध-प्रदर्शन किया। ये तस्वीरें उसी विरोध-प्रदर्शन की हैं। प्रदर्शनकारियों ने पूरे जोश के साथ सरकार से काजल मिलन को न्याय देने की मांग की

उन्होंने ज्योतिपुंज हॉस्पिटल तथा डॉ. शिप्रा सिंह पर कार्रवाई करने की भी मांग की। काजल मिलन के परिवारों पर झूठे मुकदमे लादे गए हैं। उसे भी वापस लेने की मांग की गई। लोगों ने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था का निजीकरण (privatisation) ठीक नहीं है। प्राइवेट हॉस्पिटल लूट का अड्डा बने हुए हैं। वे मरीजों को इंसान की दृष्टि से नहीं, मुनाफे के दृष्टिकोण से देखते हैं और जितना शोषण (आर्थिक) कर सकते हैं, करते हैं। आजकल ये प्राइवेट हॉस्पिटल बॉन्सर रखने लगे हैं। यदि कोई परिजन उनकी लूट में बाधक बनता है और विरोध करता है, तो वे अपने बॉन्सरों (गूंडों) से उन्हें पिटवाते हैं। ज्योतिपुंज हॉस्पिटल में भी काजल मिलन के भाई और अन्य परिजनों के साथ भी यही किया गया। डॉ. शिप्रा सिंह की लापरवाही से हुई काजल मिलन की मौत का जब परिजनों ने विरोध किया, तो उनके साथ हॉस्पिटल के खरीदें हुए बॉन्सरों ने मार-पीट की और रात में ही जबर्दस्ती मरीज के साथ उन्हें हॉस्पिटल से बाहर निकाल दिया गया। सभी लोगों ने इस घटना का विरोध किया और कहा कि यह किसी एक परिवार का मामला नहीं है। आये दिन ऐसी घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। इसीलिए निजी अस्पतालों की मनमानी पर रोक लगाना जरूरी है। उनके ऊपर कड़े कानून लगाए जाने चाहिए और शख्ती से उसका पालन होना चाहिए।

काजल मिलन के भाई डॉ. मनीष ने कहा, “मेरी बहन तो इस दुनिया से चली गई, लेकिन मैं चाहता हूं कि अन्य भाइयों की बहनें डॉ. शिप्रा सिंह जैसी आदमखोर डॉक्टरों की शिकार न बनें। इसीलिए मैं यह लड़ाई लड़ रहा हूं। जब तक काजल बहन को इंसाफ नहीं मिलेगा, तब तक मैं लड़ता रहूंगा।”

पटना हाईकोर्ट के कर्मचारी विकास ने कहा, “काजल मिलन हमारे साथ ही पटना हाईकोर्ट में काम करती थीं। वे बहुत अच्छी महिला थीं। उनके साथ ऐसी घटना घट जाएगी, इसकी कल्पना हमनें नहीं किया था। इस घटना की निष्पक्ष रूप से जांच होनी चाहिए और यदि ज्योतिपुंज हॉस्पिटल की लापरवाही से काजल की मौत हुई है, तो दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।”

पटना की संवेदनशील नागरिक मन्नू साक्षी ने कहा, “यह घटना Medical negligence (चिकित्सा लापरवाही) का एक बड़ा उदाहरण है, जिसके कारण काजल की मौत हुई है। इसीलिए ज्योतिपुंज हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन बंद कर देना चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई करनी चाहिए। प्राइवेट हॉस्पिटल में बॉन्सर सिस्टम को समाप्त करना चाहिए। साथ ही मेडिकल सिस्टम के प्राइवेटाइजेशन पर रोक लगानी चाहिए। बिहार सरकार को सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को ठीक करना चाहिए। यदि इस केस में दोषियों को सजा मिलती है, तो अन्य प्राइवेट हॉस्पिटल इससे सीख लेकर इस तरह की लापरवाही नहीं करेंगे, जिससे किसी की जान चली जाए। हम काजल मिलन की उन दो बच्चियों के लिए न्याय की गुहार लगाने के लिए सड़क पर उतरे हैं, जिन्होंने जन्म लेते ही अपनी मां को खो दिया।”

यह विरोध-प्रदर्शन बोरिंग रोड चौराहा पर एक छोटी-सी सभा के साथ समाप्त हुआ। सभी ने मोमबत्ती जलाकर काजल को श्रद्धांजलि दी और हस्ताक्षर कर काजल के लिए सरकार से न्याय की मांग की। इस विरोध-प्रदर्शन में लगभग 100 लोग शामिल
सोनू चौहान

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