
क्षेत्रीय विकास संघ न्यास के पदाधिकारियों ने सासनी दौरे पर आईं कमिश्नर ममता सिंह से राजा उदयसिंह के महल कचहरी (संरक्षित स्मारक) के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण कार्य को राजस्व अभिलेखों में दर्ज वर्तमान मानचित्र 1960 के नाप के अनुरूप न होने व संरक्षित भूमि को कब्जामुक्त न कराते हुए संकुचित भूमि पर ही राजस्व अधिकारियों द्वारा भ्रमित मानचित्र बना कर मानक विरुद्ध निर्माण कार्य कराए जाने के की शिकायत की।
संघ के पदाधिकारियों ने शिकातय की कि तहसील व ब्लाक सासनी में एक संरक्षित भूमि पर राजा उदय सिंह का स्मारक कचहरी के रूप में स्थित है। यह स्मारक काफी लंबे समय से जीर्ण अवस्था में था। इसी के चलते स्मारक की देख रेख कर रहे विभाग के कर्मचारीगण एवं कब्जाधारियों की मिलीभगत के चलते संरक्षित भूमि (महल, रौस, हौज, चबूतरा, टाल, मुख्य द्वार) पर कब्जा कर लिया गया और स्मारक एवं संरक्षित भूमि संकुचित रह गई। संरक्षित स्मारक के पास ही तीन विशाल कुएं हैं। जिनमें से एक कुएं को पूर्व में कब्जाधारियों के द्वारा निजी कॉलोनी बेचने के लिए तोडकर ध्वस्त कर खेत में विलयकर नष्ट करने का प्रयास किया। मगर जनसाधारण की शिकायत पर पुनः निर्माण कर दिया गया। अब निजी सम्पत्ति में हैं जबकि कुओं का अस्तित्व संरक्षित स्मारक से जुड़ा हुआ है। जिसकी जांच होना अत्यंत आवश्यक है। इसी प्रकार कब्जाधारियों ने संरक्षित स्मारक के बराबर में निजी कॉलोनी बेचने के लिए रौस को श्रब्ठ चला कर पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। स्मारक का मुख्य द्वार रौस, महल, चबूतरा, टाल सेंट्रल बैंक, निकट बस स्टैंड के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर खुलता है जोकि वर्तमान में कब्जाग्रस्त है। आला अधिकारियों की लापरवाही के कारण राजस्व अभिलेखों में दर्ज मानचित्र के विरुद्ध एक नया मानचित्र बना कर शासन को भेज दिया गया जो वास्तविक मानचित्र से बिल्कुल भिन्न है। शिकायत में कहा है कि स्मारक पर पहुंचने के लिए कोई सुगम रास्ते का प्रावधान नहीं है। क्योंकि मुख्य रास्ते पर अवैध कब्जा है। कचहरी स्मारक के जीर्णोद्धार एवं पर्यटन स्थल बनाने के लिए शासन के द्वारा लगभग 1.5 करोड़ रुपए की धनराशि दी गई है, जिसका व्यर्थ ही प्रयोग कर खानापूर्ति की जा रही है।
Author: Sunil Kumar
SASNI, HATHRAS




