200 लोगों से भरी स्लीपर बस खाई में घुसी, 20 से अधिक लोग घायल,एक की मौत

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बरेली । सीबीगंज क्षेत्र में ओवरलोडिंग के कारण अनियंत्रित होकर एक स्लीपर बस खाई में गिर गई। जिसमे एक किशोर की मौत हो गई, जबकि 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए। दो थानों की पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे एसपी उत्तरी ने बस को निकलवाकर मजदूरों को इलाज के लिए भिजवाया। करीब दो घंटे दिल्ली-लखनऊ हाईवे की एक लेन से आवागमन प्रभावित रहा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार हरदोई से एक ठेकेदार मजदूरों को लेकर हरियाणा के बहादुरगंज जा रहा था। स्लीपर बस में शाहजहांपुर व आसपास के जिलों के मजदूर व उनके परिजन भी थे। बताया जा रहा है कि बस में करीब दो सौ से ज्यादा लोग सवार थे, जिनमें से करीब पचास छत पर बैठे थे।
इन सभी से प्रति व्यक्ति पांच सौ रुपये किराया तय किया गया था। बस झुमका चौराहे से एक किमी आगे नहर की पुलिया पर अनियंत्रित होकर खाई में चली गई। इससे छत पर बैठे कई लोग नीचे गिर पड़े तो बस में बैठे लोग एक-दूसरे के नीचे दब गए।
हादसे में लखीमपुर खीरी के मझगवां निवासी संजय के 14 वर्षीय बेटे प्रवीण की दबकर मौत हो गई। संजय, उनकी पत्नी किरन, बेटा रिंकू, रिंकू की पत्नी प्रियंका घायल हो गए। प्रियंका का पैर टूट गया। इनके साथ ही शाहजहांपुर के जलालाबाद निवासी प्रीति पत्नी राजेश, सुमन देवी, सुनीता, सोहन कुशवाहा, तुलसीराम व दयावती घायल हुए। पुवायां की शिवानी को भी चोटें आईं।
हादसे की सूचना पर सबसे पहले फतेहगंज पश्चिमी थाना प्रभारी धनंजय पांडेय अपनी टीम के साथ पहुंच गए। एसपी उत्तरी मुकेश मिश्रा, सीओ हाईवे नितिन कुमार के बाद सीबीगंज थाना प्रभारी पहुंच सके।
एक लेन प्रभावित होने से दिल्ली व लखनऊ दिशा के वाहन फंसे तो अफसरों ने झुमका चौराहा और दूसरे मार्गों से वाहनों को डायवर्ट कराया। बस हटाने के बाद संचालन व्यवस्थित हुआ। एसपी उत्तरी ने बताया कि करीब 20 लोगों को हल्की चोटें आई थीं।

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सबसे ज्यादा पड़ गई

संजय भाटिया ने लोकसभा चुनाव में रचा था इतिहास संजय भाटिया कुरुक्षेत्र विश्वविद्याल ग्रेजुएट हैं। इनका जन्म हरियाणा के पानीपत जिले में हुआ है। वह भाजपा के महामंत्री भी रह चुके हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी संजय भाटिया ने अपने पहले ही लोकसभा चुनाव में इतिहास रच दिया था। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को 6.54 लाख मतों के अंतर से मात दी थी। संजय भाटिया ने प्रदेश के 53 साल के इतिहास में सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्हें कुल 909432 वोट मिले थे। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप शर्मा को 654269 वोटों के अंतर से हराया था। राहुल गांधी ने दिया था कर्मवीर के नाम का सुझाव वहीं कर्मवीर सिंह बौद्ध किसी भी गुट या खेमे से जुड़े हुए नेता नहीं माने जाते। यही कारण है कि उन्हें संगठन के भीतर एक संतुलित और सर्व स्वीकार्य चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। वे ‘संविधान बचाओ अभियान’ में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं और जमीनी स्तर पर पार्टी के कार्यक्रमों में भागीदारी निभाते रहे हैं। एससी समुदाय से आने वाले कर्मवीर सिंह बौद्ध सामाजिक संतुलन के नजरिये से भी एक अहम दावेदार है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्वयं उनके नाम का सुझाव दिया है। अंबाला के मुलाना विधानसभा में रहने वाले कर्मवीर सिंह प्रशासकीय अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और लंबे समय से कांग्रेस से जुड़कर कार्य कर रहे थे। कांग्रेस ने उन्हें हिमाचल प्रदेश में एससी सेल का प्रभारी भी बनाया था। राष्ट्रीय स्तर पर वह कन्वीनर भी हैं।