साध्वी वैष्णवी भारती ने अपने प्रवचनों में कहा कि गुरु पूर्णिमा आत्ममंथन का पर्व है, जो प्रत्येक शिष्य को यह परखने का अवसर देता है कि वह बीते वर्ष में गुरु की आज्ञा और शिक्षाओं पर कितना खरा उतरा है।

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के नूरमहल आश्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। युगद्रष्टा, ब्रह्मज्ञान प्रदाता एवं मानवता के आध्यात्मिक पथ-प्रदर्शक सर्वश्री आशुतोष महाराज जी की पावन प्रेरणा एवं दिव्य मार्गदर्शन में आयोजित इस महोत्सव में देश-विदेश से पहुंचे पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
स्वामी मोहनपुरी ने कहा कि गुरु के वचनों को जीवन में अपनाकर सत्य के मार्ग पर अडिग रहना ही वास्तविक गुरु-पूजा है। वहीं साध्वी मानस्विनी भारती जी ने वर्तमान समय की वैश्विक चुनौतियों, युद्ध, सामाजिक मूल्यों में गिरावट और प्राकृतिक असंतुलन का उल्लेख करते हुए कहा कि आत्मिक रूप से जागृत व्यक्ति गुरु के मार्गदर्शन और साधना के बल पर हर परिस्थिति का सामना कर सकता है।
स्वामी सज्जनानंद ने नूरमहल आश्रम की आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं से सत्संग, आश्रम और गुरु-कार्य से निरंतर जुड़े रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत पंजाबी भजन “सब ने भंगड़ा पाउणा” ने श्रद्धालुओं को भक्ति और आनंद के रंग में सराबोर कर दिया।