
महेंद्रगढ़ जिले के छितरौली गांव की रहने वाली शर्मिला ने महिलाओं की शॉट पुट एफ-57 स्पर्धा में 9.81 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके साथ ही वह कॉमनवेल्थ गेम्स की पैरा एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की पहली खिलाड़ी बन गईं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शर्मिला को बधाई दी। सीएम ने कहा कि शर्मिला के प्रदर्शन ने देश और हरियाणा का नाम रोशन किया है।
शर्मिला की यह जीत सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास की सबसे बड़ी मिसाल है। दो साल की उम्र में पोलियो ने उनका एक पैर कमजोर कर दिया। आर्थिक तंगी में बचपन बीता और पहली शादी में दहेज के लिए प्रताड़ना व घरेलू हिंसा का दर्द सहना पड़ा। 26 वर्ष की उम्र में दो बेटियों के साथ उन्हें घर से निकाल दिया गया। हार मानने के बजाय उन्होंने जिंदगी से लड़ने का फैसला किया।




