साइलेंट अटैक: न खांसी, न बुखार फिर भी शरीर में टीबी का वार, हरियाणा में हर दूसरा नया मरीज एसिंप्टोमैटिक

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एसिंप्टोमैटिक टीबी के मरीज टीबी उन्मूलन अभियान के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। स्पष्ट लक्षण न होने के कारण ये मरीज लंबे समय तक बिना इलाज के समाज के बीच रहते हैं और अनजाने में दूसरों तक संक्रमण फैलाने का जरिया बन जाते हैं।
Haryana 47 percent TB cases found to be asymptomatic
हरियाणा में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत चलाए गए विशेष स्क्रीनिंग अभियान ने बेहद चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं। राज्य में 24 मार्च से 21 जून के बीच मिले कुल 25,741 नए टीबी मरीजों में से करीब 47 फीसदी (12,070) मरीज ऐसे पाए गए हैं जिनमें बीमारी का कोई बाहरी लक्षण नहीं था।

इसका सीधा मतलब यह है कि हर दो में से एक मरीज को खुद भी यह अंदाजा नहीं था कि वह टीबी से संक्रमित है और उसके शरीर में इसका बैक्टीरिया सक्रिय है। चिकित्सा विज्ञान की भाषा में ऐसे मामलों को एसिंप्टोमैटिक टीबी कहा जाता है। यह आंकड़ा साफ करता है कि केवल खांसी, बुखार या वजन घटने जैसे पारंपरिक लक्षणों के भरोसे रहना अब काफी नहीं है। समय पर एडवांस जांच ही इस साइलेंट बीमारी को रोकने का सबसे प्रभावी जरिया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक एसिंप्टोमैटिक टीबी के मरीज टीबी उन्मूलन अभियान के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। स्पष्ट लक्षण न होने के कारण ये मरीज लंबे समय तक बिना इलाज के समाज के बीच रहते हैं और अनजाने में दूसरों तक संक्रमण फैलाने का जरिया बन जाते हैं। बाद में खुद उनके लिए भी यह बीमारी गंभीर रूप ले लेती है।
यही वजह है कि हरियाणा स्वास्थ्य विभाग अब केवल अस्पतालों के ओपीडी में आने वाले मरीजों पर निर्भर नहीं है। विभाग ने जोखिम वाले इलाकों, गांवों और नगर निगम के वार्डों में विशेष शिविर लगाकर घर-घर जाकर सक्रिय स्क्रीनिंग की जिससे ये छिपे हुए मामले उजागर हो सके। अब सरकार एक्स-रे और आधुनिक एनएएटी (न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट) जैसी तकनीकों से बिना लक्षण वाले मरीजों को खोजने पर विशेष जोर दे रही है।

इस तरह की गई साइलेंट मरीजों की पहचान

स्टेट टीबी अधिकारी डॉ. राजेश राजू ने बताया कि सक्रिय स्क्रीनिंग अभियान के दौरान बड़ी संख्या में बिना लक्षण वाले मरीजों की पहचान अत्याधुनिक तरीकों से की गई। शिविरों में हैंडहेल्ड डिजिटल एक्स-रे, कफ अगेंस्ट टीबी एप और टीबी से जुड़े 10 प्रमुख लक्षणों की बारीकी से स्क्रीनिंग की जाती है। यदि एक्स-रे में कोई गड़बड़ी दिखे या एप किसी को संदिग्ध बताए, तो तुरंत उसके थूक (बलगम) का नमूना लिया जाता है। इसकी जांच नाट मशीन से की जाती है जो बैक्टीरिया की सटीक पुष्टि करती है। संक्रमण मिलते ही तुरंत इलाज शुरू कर दिया जाता है।

जिलावार आंकड़े : कहां कितने मिले एसिंप्टोमैटिक मरीज?

स्क्रीनिंग के दौरान प्रदेश के अलग-अलग जिलों में मिले कुल नए मरीज और उनमें से बिना लक्षण वाले (एसिंप्टोमैटिक) मरीजों का पूरा ब्योरा इस प्रकार है

जिला                   कुल नए मरीज           बिना लक्षण वाले (एसिंप्टोमैटिक)
गुरुग्राम                   4,242                      2,496
फरीदाबाद                2,729                      1,581
हिसार                     1,711                       940
करनाल                   1,606              764
रोहतक                   1,609              712
मेवात                    1,266              552
पानीपत                  1,555              542
सोनीपत                 1,386              543
रेवाड़ी                    808              499
पलवल                   721              460
अंबाला                  913              415
जींद                      595              402
सिरसा                    825              337
भिवानी                   879              289
यमुनानगर                944              276
कैथल                    615              278
झज्जर                   584              244
महेंद्रगढ़                  595               202
फतेहाबाद                581              178
कुरुक्षेत्र                   701             166
पंचकूला                  758              141
चरखी दादरी              251              53

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Author: priya singh

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