
इसका सीधा मतलब यह है कि हर दो में से एक मरीज को खुद भी यह अंदाजा नहीं था कि वह टीबी से संक्रमित है और उसके शरीर में इसका बैक्टीरिया सक्रिय है। चिकित्सा विज्ञान की भाषा में ऐसे मामलों को एसिंप्टोमैटिक टीबी कहा जाता है। यह आंकड़ा साफ करता है कि केवल खांसी, बुखार या वजन घटने जैसे पारंपरिक लक्षणों के भरोसे रहना अब काफी नहीं है। समय पर एडवांस जांच ही इस साइलेंट बीमारी को रोकने का सबसे प्रभावी जरिया है।
इस तरह की गई साइलेंट मरीजों की पहचान
स्टेट टीबी अधिकारी डॉ. राजेश राजू ने बताया कि सक्रिय स्क्रीनिंग अभियान के दौरान बड़ी संख्या में बिना लक्षण वाले मरीजों की पहचान अत्याधुनिक तरीकों से की गई। शिविरों में हैंडहेल्ड डिजिटल एक्स-रे, कफ अगेंस्ट टीबी एप और टीबी से जुड़े 10 प्रमुख लक्षणों की बारीकी से स्क्रीनिंग की जाती है। यदि एक्स-रे में कोई गड़बड़ी दिखे या एप किसी को संदिग्ध बताए, तो तुरंत उसके थूक (बलगम) का नमूना लिया जाता है। इसकी जांच नाट मशीन से की जाती है जो बैक्टीरिया की सटीक पुष्टि करती है। संक्रमण मिलते ही तुरंत इलाज शुरू कर दिया जाता है।
जिलावार आंकड़े : कहां कितने मिले एसिंप्टोमैटिक मरीज?
स्क्रीनिंग के दौरान प्रदेश के अलग-अलग जिलों में मिले कुल नए मरीज और उनमें से बिना लक्षण वाले (एसिंप्टोमैटिक) मरीजों का पूरा ब्योरा इस प्रकार है
जिला कुल नए मरीज बिना लक्षण वाले (एसिंप्टोमैटिक)
गुरुग्राम 4,242 2,496
फरीदाबाद 2,729 1,581
हिसार 1,711 940
करनाल 1,606 764
रोहतक 1,609 712
मेवात 1,266 552
पानीपत 1,555 542
सोनीपत 1,386 543
रेवाड़ी 808 499
पलवल 721 460
अंबाला 913 415
जींद 595 402
सिरसा 825 337
भिवानी 879 289
यमुनानगर 944 276
कैथल 615 278
झज्जर 584 244
महेंद्रगढ़ 595 202
फतेहाबाद 581 178
कुरुक्षेत्र 701 166
पंचकूला 758 141
चरखी दादरी 251 53
Author: priya singh
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