
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा, सदस्य (न्यायिक) कुलदीप जैन और सदस्य दीप भाटिया की पूर्ण पीठ ने विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त 2026 को होगी।
आयोग ने टिप्पणी की कि संवैधानिक और वैधानिक संरक्षणों के बावजूद बच्चों के खिलाफ हिंसा, शोषण और दुर्व्यवहार की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इससे स्पष्ट होता है कि निवारक तंत्र, निगरानी प्रणाली और संस्थागत जवाबदेही अपेक्षित परिणाम देने में विफल रही है। आयोग ने कहा कि स्कूल, छात्रावास, बाल देखभाल संस्थान और अन्य संस्थाएं बच्चों को सुरक्षित वातावरण देने की संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने में कमजोर साबित हो रही हैं।
इन विभागों से मांगी गई रिपोर्ट
आयोग ने गृह विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, विद्यालय शिक्षा विभाग, पुलिस महानिदेशक, हरियाणा राज्य बाल संरक्षण सोसायटी तथा विशेष किशोर पुलिस इकाइयों के नोडल अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट में बच्चों के खिलाफ अपराधों की रोकथाम, जांच, दोषसिद्धि, पुनर्वास, परामर्श सेवाओं, स्कूलों में सुरक्षा उपायों और बाल संरक्षण तंत्र की स्थिति का पूरा ब्यौरा मांगा गया है।
आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि सभी अधिकारियों को अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले अपनी रिपोर्ट आयोग के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।