सियासी डगर आसान नहीं, 15 साल में सात नए दल बने, पत्नी का समर्थन करेंगे या ‘हाथ’ के साथ रहेंगे सिद्धू?

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पंजाब में सियासी डगर आसान नहीं है। 15 साल में सात नए दल बने। इनमें से तीन का विलय हो गया। विधानसभा चुनाव से पहले सूबे में नेताओं द्वारा नई राजनीतिक पार्टी बनाने का ट्रेंड रहा है। अब कांग्रेसी नेता और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिद्धू की पूर्व विधायक पत्नी नई पार्टी के साथ सामने आईं।

Navjot Singh Sidhu's political comeback hits '500 crore' wall: Congress  suspends his wife, what next for 'guru'?| India News

पंजाब में सियासी डगर आसान नहीं है। 15 साल में सात नए दल बने। इनमें से तीन का विलय हो गया। विधानसभा चुनाव से पहले सूबे में नेताओं द्वारा नई राजनीतिक पार्टी बनाने का ट्रेंड रहा है। अब कांग्रेसी नेता और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिद्धू की पूर्व विधायक पत्नी नई पार्टी के साथ सामने आईं।

शेष पार्टियां अभी अस्तित्व में तो हैं मगर न तो चुनाव में कुछ जलवा दिखा पाईं और न ही पंजाब की सियासत और पंजाबियों पर कोई प्रभावशाली छाप छोड़ पाईं।

इसी कड़ी में 6 अप्रैल को कांग्रेसी नेता एवं पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर अब भारतीय राष्ट्रवादी पार्टी (भारपा) के साथ सामने आईं हैं। हालांकि यह पार्टी करीब नौ साल पुरानी बताई जा रही है मगर पंजाब के लिए यह नई पार्टी है। सिद्धू के समर्थक पिछले कुछ समय से इस पार्टी के संपर्क में थे।

सिद्धू ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर भारपा के नेता अमलान बिस्वास के साथ पार्टी एक फोटो शेयर कर लिखा- जिस घोषणा का बेसब्री से इंतजार था, वह अब सामने है। हमने राजनीतिक नेताओं के मौजूदा कामकाज के स्तर को ध्यान से देखने और समीक्षा करने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर एक नए विकल्प पर काम करना शुरू कर दिया है।
सिद्धू कहती हैं कि हम समान सोच वाले कुछ ऐसे लोगों के साथ आ गए हैं, जिनके पास हर राज्य में काम करने की क्षमता, आत्मविश्वास, साहस और दृढ़ संकल्प है।
अभी नवजोत कौर के पति नवजोत सिद्धू कांग्रेस में ही हैं
कांग्रेस से निष्कासन के बाद पूर्व विधायक नवजोत कौर ने यह स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि अगली विधानसभा चुनाव में वे इस नई पार्टी के साथ पंजाब में अगली पारी खेलने उतर सकती हैं। उधर अभी नवजोत कौर के पति नवजोत सिद्धू कांग्रेस में ही हैं।

वे अपनी पत्नी की नई पार्टी का समर्थन करेंगे या कांग्रेस में बने रहेंगे, यह सिद्धू को अभी स्पष्ट करना है। वैसे सिद्धू की भी कांग्रेस के साथ दूरियां बढ़ती जा रही हैं। न तो राहुल गांधी उन्हें मिलने के लिए समय दे रहे हैं और न ही अन्य वरिष्ठ नेता उनसे कोई संपर्क रख रहे हैं।

बुलेट प्वाइंटर बॉक्स
वजूद में आ चुके कुछ सियासी दल

  • साल 2012 विधानसभा चुनाव से पहले अकाली नेता मनप्रीत सिंह बादल ने 27 मार्च 2011 को पीपल्स पार्टी ऑफ पंजाब बनाई। 87 सीटों पर चुनाव लड़ा। जीत नहीं मिली। साल 2017 के चुनाव से पहले इस पार्टी का 14 जनवरी 2016 को कांग्रेस में विलय हो गया।
  • साल 2017 विस चुनाव से पहले 28 अक्तूबर 2016 को सिमरजीत सिंह बैंस ने लोक इंसाफ पार्टी बनाई। पांच सीटों पर चुनाव लड़े और दो पर जीते। अभी वजूद में है।
  • 1 अक्तूबर 2016 को सुच्चा सिंह छोटेपुर ने अपना इंसाफ पार्टी बनाई। 77 सीटों पर चुनाव लड़े। जीत हासिल नहीं हुई। साल 2022 के चुनाव से पहले 16 जनवरी को विलय हो गया।
  • साल 2022 के चुनाव से पहले कांग्रेस को अलविदा कहते हुए पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 2 नवंबर 2021 को पंजाब लोक कांग्रेस का गठन किया। 28 सीटों पर लड़े मगर एक भी जीत नहीं पाए। 19 सितंबर 2022 को भाजपा में विलय हो गया।
  • 17 मई 2021 ने नेता सुखदेव सिंह ढींढसा ने शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) का गठन किया। 15 सीटों पर चुनाव लड़ा, जीत नहीं मिली। 5 मार्च 2024 शिरोमणि अकाली दल (डेमोक्रेटिक) और शिअद (टकसाली) में विलय हो गया।

किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने 25 दिसंबर 2021 में संयुक्त समाज मोर्चा बनाया। 107 सीटों पर चुनाव लड़ा। एक भी सीट नहीं जीती।

  • किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने 18 दिसंबर 2021 को संयुक्त संघर्ष पार्टी बनाई। 10 सीटों पर लड़े मगर खाता नहीं खुला।
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Author: Farheen