
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध से जगाधरी की बर्तन नगरी प्रभावित हो रही है। युद्ध के कारण जहां अरब देशों का व्यापार बिल्कुल ही ठप हो गया है। वहीं, इन देशों से कच्चा माल आना भी बंद हो गया है, जिससे यहां कच्चे माल की कीमत में 20 से 25 प्रतिशत का उछाल आया है। कच्चे माल के दाम बढ़ने से घरेलू उत्पादन लागत भी बढ़ गई है।
जगाधरी से स्टील, एल्युमिनियम के अलावा पीतल व कांसे के बर्तन भी विदेशों में जाते हैं। यहां से ईरान, इराक, इस्राइल, सउदी अरब, दुबई, कतर, ओमान, बहरीन, कुवैत, लेबनान, जाॅर्डन सहित तमाम मिडिल ईस्ट के देशों में सामान जाता है। युद्ध से बर्तन नगरी को 300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है और अभी भी हालात गंभीर बने हुए हैं।
जेके मैटल के संचालक भारत गर्ग ने बताया कि जगाधरी से एल्युमिनियम और स्टील के बर्तन मिडिल ईस्ट के देशों में जाते हैं। उनके पास एल्युमिनियम के बड़े-बड़े भगौने सहित अन्य बर्तन बनते हैं, जो अरब देशों में जाते हैं। परंतु एक महीने से माल नहीं गया है और गोदाम में बंद है।
इसके अलावा वहां से कच्चा माल आता है, जो बंद हो गया है। इससे यहां पर लागत करीब 20 से 25 प्रतिशत बढ़ गई है। ऐसे में घरेलू उत्पादन की लागत बढ़ गई है। इसके अलावा इंडस्ट्री को गैस नहीं मिल पा रही है। डीजल के दाम में 22 प्रतिशत वृद्धि हो गई है। वहीं, फर्निश ऑयल भी नहीं मिल रहा है। संवाद
800 से ज्यादा फैक्टरियां प्रभावित : दविंद्र गुप्ता
स्मॉल स्केल एल्युमिनियम यूटेंसिल्स एसोसिएशन के प्रधान दविंद्र गुप्ता ने बताया कि जगाधरी ऐतिहासिक बर्तन औद्योगिक नगरी है, यहां छोटी-बड़ी 800 फैक्टरियां हैं। यहां कई ऐसी इकाइयां हैं, जिनका संचालन तीसरी और चौथी पीढ़ी कर रही हैं। यहां स्टील के बर्तन बनाने की भी 450 से 500 छोटी-बड़ी इकाइयां हैं। एल्युमिनियम की 125 से ज्यादा फैक्टरियां चल रही हैं।
पीतल और तांबे की करीब 100 फैक्टरियां हैं। यहां से करीब 250 से ज्यादा इकाइयां बर्तनों का निर्यात करती हैं। इनमें 100 इकाइयां अरब देशों में काम कर रही हैं। अरब देशों में गोल्ड व सिल्वर प्लेटिंग वाली तश्तरी, बाउल, आयतें और सजावट जाता है। इसके अलावा कटलरी और रेस्टोरेंट में प्रयोग होने वाले सामान भी जगाधरी से जाता है।