सिकंदरा स्थित अकबर के मकबरे का उत्तरी द्वार रखरखाव के अभाव में जर्जर होता जा रहा है और संरक्षण कार्य बजट के अभाव में रुका हुआ है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि समय रहते कदम न उठाए गए तो यह ऐतिहासिक धरोहर गंभीर नुकसान झेल सकती है।

मुगल बादशाह अकबर का मकबरा, जो अपनी भव्यता और विशालता के लिए विश्वविख्यात है, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की उपेक्षा का दंश झेल रहा है। मकबरे का उत्तरी द्वार रखरखाव के अभाव में खंडहर बनता जा रहा है।
400 साल पुराने सिकंदरा स्थित मकबरे के उत्तरी द्वार के संरक्षण का कार्य वर्ष 2024-25 में शुरू किया गया था, लेकिन वर्तमान में यह बंद है। संरक्षण सहायक बिट्टू गौतम का कहना है कि उत्तरी द्वार के शेष कार्यों को पूरा करने के लिए 50 लाख रुपये का प्रस्ताव मुख्यालय भेजा गया था। प्रस्ताव लंबित होने के कारण काम रुका हुआ है और सुरक्षा की दृष्टि से पर्यटकों का इस क्षेत्र में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है।
119 एकड़ में फैले इस स्मारक की खराब हालत केवल उत्तरी द्वार तक ही सीमित नहीं है। चारबाग शैली के इस विशाल परिसर के बीच में मुख्य मकबरे की दीवारों से पत्थर झड़ रहे हैं। कई हिस्सों से मलबा झड़ रहा है। कन्फेडरेशन ऑफ टूरिज्म एसोसिएशंस के अध्यक्ष राजीव तिवारी ने चिंता जताते हुए कहा कि क्षतिग्रस्त स्मारक पर्यटकों के मन में गलत छवि बनाते हैं। उन्होंने मांग की कि ताजमहल की तर्ज पर ही सिकंदरा का संरक्षण भी प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए।
जन प्रहरी संस्था के संयोजक नरोत्तम सिंह का कहना है कि यदि एएसआई ने तत्काल कार्रवाई नहीं की, तो यह महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर हमेशा के लिए नष्ट हो सकती है। उन्होंने सरकार से अधूरे संरक्षण कार्यों के लिए तुरंत बजट आवंटित करने की मांग की। कहा कि स्मारक के सभी हिस्सों को पर्यटकों के लिए सुरक्षित बनाकर फिर से खोला जाए।