पठानकोट में सैन्य अधिकारी क्षेत्र में बीते कई दिनों से धड़ल्ले से अवैध निर्माण हो रहा है। स्थानीय प्रशासन व संबंधित विभाग इस अवैध निर्माण को रुकवाने में खानापूर्ति करता रहा। ऐसे में अब सेना के जवानों ने निर्माण को रुकवाने के लिए मोर्चा संभाला है।

पठानकोट में आयुद्ध परिधि के एक हजार मीटर दायरे में होने वाले अवैध निर्माण को रुकवाने का जिम्मा अब सेना ने संभाल लिया है। मंगलवार सुबह 10 बजे के बाद मामून सैन्य बेस से सेना जवान शांत विहार कॉलोनी पहुंचे। जहां डीसी व नगर निगम कमिश्नर के आदेशों की उल्लंघना करवाए जा रहे अवैध निर्माण को बंद करवाया और इस संबंधी पूरे दस्तावेज भी उनको दिखाने के लिए कहा है।
हैरानी की बात है कि निगम की बिल्डिंग ब्रांच प्रशासन इस अवैध कार्य को जहां रुकवाने में असमर्थ दिखे। वहीं, अब सेना को ऐसे अवैध निर्माणों को रुकवाने लिए आगे आना पड़ रहा है। अगर, निगम अधिकारी अपनी जिम्मेदारी सही निभाते तो जवान अपना कीमती समय छोड़ न आते।
सेना के जवान ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि सेन्य क्षेत्र के 1000 मीटर दायरे में शांत विहार कॉलोनी में एक बिल्डिंग का अवैध निर्माण चल रहा है। जिसे मौके पर पहुंच रुकवा दिया गया है। अब बिल्डिंग के मालिक को पूरे दस्तावेज दिखाने के लिए कहा। अगर, वे अपने दस्तावेज सही ना बता पाए तो इनके खिलाफ एक्शन लेंगे। अगर, बंद काम को दोबारा परमिशन के बिना शुरू करवाते हैं तब भी फोर्स दोबारा पहुंच कर कड़ा एक्शन लेगी।
वहीं, एडवोकेट राजसप्रीत सिंह बाजवा ने कहा बहुत ही शर्मसार है कि लोकल प्रशासन का काम सेना को मौके पर आकर करना पड़ रहा है। अगर शांत विहार समेत अन्य जगह हो रहे अवैध निर्माणों पर बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारियों द्वारा रोक लगाई होती तो आज यह नौबत ना आती। बिल्डिंग के मालिकों ने सरकारी सील तोड़कर अवैध उसारी धड़ल्ले से लंबे समय से करवाई जा रही है। उनकी सरकार व प्रशासन से मांग है कि ऐसी अवैध उसारी बंद करवा नियमों की उल्लंघना करने वालों पर कानूनी कार्रवाई हो।
बता दें कि कुछ दिन पहले ही पठानकोट में आयुद्ध परिधि के 1 हजार मीटर दायरे व विभिन्न इलाकों जैसे डल्हौजी रोड, सिम्बल चौक से मामून चौक, मिशन रोड, कॉलेज रोड आदि स्थानों पर हो रहे अवैध निर्माण की सूचना पठानकोट के ही निवासी ने चिट्ठी जरिए सीएम पंजाब, विजिलेंस पंजाब समेत कई बड़े अधिकारियों तक पहुंचाई है। सबसे मजेदार बात यह है कि उक्त अवैध निर्माणों की जानकारी संबंधित जोन के एमटीपी, एटीपी से लेकर बिल्डिंग इंस्पेक्टर तक को है, लेकिन कार्रवाई शून्य है। आज तक इस सील की गई बिल्डिंग में उसारी करने वालों खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं करना भ्रष्टाचार का सबूत देते हुए लोकल प्रशासन की मिलीभगत तरफ इशारा कर रहा है।