रायबरेली चार युवतियों को कुचलने वाला कार चालक गिरफ्तार कहा- गूगल मैप की वजह से चढ़ा एक्सप्रेसवे

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Four girls killed in Raebareli: रायबरेली में रविवार की शाम एक कार ने सात युवतियों को कुचल दिया था। इससे चार लड़कियों की मौत हो गई थी। सोमवार को कार चालक पकड़ा गया।

रायबरेली:चार युवतियों को कुचलने वाला कार चालक गिरफ्तार, कहा- गूगल मैप की वजह  से चढ़ा एक्सप्रेसवे - Rae Bareli: Car Driver Who Crushed Four Young Women  Arrested, Claims He ...

निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे पर हुई चार लड़कियों की मौत के मामले में कार चालक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। पुलिस ने सोमवार को कार चालक विकास मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस के मुताबिक आरोपी ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग होते हुए प्रयागराज से लखनऊ जा रहा था। गूगल मैप के कारण रास्ता भटक गया और निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे पर चढ़ गया। जब इसकी जानकारी हुई तो कार पीछे की तरफ कर लिया। अंधेरा होने की वजह से कुछ समझ में नहीं आया और लड़कियां हादसे का शिकार हो गईं।

जगतपुर थाना क्षेत्र में रविवार शाम चूली गांव के पास निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे पर कार की चपेट में आने से कोडर की आसमां, हिमांंशी, शालिनी, रश्मि यादव की मौत हो गई थी, जबकि पांच लड़कियां घायल हुई थीं। मृतक रश्मि यादव के पिता रामरतन यादव की तहरीर पर जगतपुर थाने में कार संख्या यूपी 73वी 7477 के चालक नाम, पता अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।

उधर, पुलिस ने दोपहर बाद करीब 12 बजे जगतपुर कस्बे के पास से कौशांबी जिले के धनवंतरी नगर एनडी कॉलोनी नया बाजार कसिया भरवारी निवासी विकास मिश्रा को पकड़ा है। पुलिस के मुताबिक विकास गैरेज संचालन करने के साथ ही इंश्योरेंस का भी काम करता है। सीओ डलमऊ गिरजाशंकर त्रिपाठी ने बताया कि मामले में गैर इरादतन हत्या की एफआईआर दर्ज की गई है। कार चालक को पकड़ लिया गया है। घटना के बारे में आरोपी से पूछताछ की जा रही है।

घायलों की हालत खतरे से बाहर
हादसे में कोडर गांव की रिया पटेल, उसकी बहन प्रिया पटेल के अलावा साधना, मीना, रेशमा घायल हुई हैं। इसमें प्रिया पटेल का एम्स, जबकि अन्य घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एम्स के अपर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नीरज श्रीवास्तव और जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. पुष्पेंद्र कुमार का कहना है कि घायल लड़कियों का इलाज चल रहा है। सभी खतरे से बाहर हैं।
जिन बेटियों को पाल पोस कर बड़ा किया, उनके लिए सपने संजोए, एक दिन बेटियों के हाथ पीले कर उन्हें विदा करेंगे, लेकिन वाह री नियति, उसे कुछ और ही मंजूर था। जिनके लिए सपना देखा था, उनको काल लील गया। चार बेटियों के शवों के सफेद कफन में लिपटा देख माता पिता का कलेजा चित्कार कर उठा। इस मंजर के सामने पंछियों का कलरव भी मंद पड़ गया।
जिन बेटियों को पाल पोस कर बड़ा किया, उनके लिए सपने संजोए, एक दिन बेटियों के हाथ पीले कर उन्हें विदा करेंगे, लेकिन वाह री नियति, उसे कुछ और ही मंजूर था। जिनके लिए सपना देखा था, उनको काल लील गया। चार बेटियों के शवों के सफेद कफन में लिपटा देख माता पिता का कलेजा चित्कार कर उठा। इस मंजर के सामने पंछियों का कलरव भी मंद पड़ गया।
कार हादसे ने कोडर और अलीगंज डिगवा पाली गांव में मातमी सन्नाटा पसार दिया है। रविवार शाम से लेकर सोमवार शाम तक आसमां, शालिनी, रश्मि और हिमांशी के माता-पिता रोते बिलखते रहे। आंसू हैं कि थमने का नाम नहीं ले रहे थे। बिलख-बिलख कर जब पूरा परिवार रोते दिखा तो गांव के हर शख्स की आंखों में आंसू आ गए। कोडर गांव का हाल यह है कि पूरा गांव में मातम पसरा हुआ है। गांव के गलियारे जो कभी बच्चों के खेलकूद से खिलखिलाते थे, वह भी सूने रहे। चूली गांव का भी यही हाल है। लोगों के जेहन से हादसों की याद और भयावह मंजर हट नहीं रहा है।
घड़ी में भोर तीन बजते हैं और सायरन की आवाज गांव में गूंजते ही पूरा कोडर गांव जाग जाता है। जो गहरी नींद में थे, वह भी जागकर आसमां,शालिनी और रश्मि के घर की तरफ चल पड़ते हैं। तीनों के शवों को पोस्टमार्टम के बाद पुलिस परिजनों को सौंपती है। बेटी का शव देखकर आसमां की संगीता और पिता विदेश शव को पकड़कर बिलख पड़ते हैं। बहन रेश्मा और भाई आशू के आंसू भी थमने का नाम नहीं ले रहे थे। कुछ ऐसा ही हाल शालिनी की मां लक्ष्मी देवी और पिता जंग बहादुर था। वह एक बेटी को खो चुके थे तो दूसरी बेटी साधना जिंदगी और मौत से जिला अस्पताल में संघर्ष कर रही है। रश्मि की मां राम प्यारी और पिता राम रतन भी चित्कार करते हुए रो रहे थे। लोग उन्हें समझा रहे थे, लेकिन वह विधाता और उसकी मर्जी की दुहाई दे रहे थे। बड़ी बहन राम प्यारी भी बहन के शव के लिपट कर रोए जा रही थी।

हर तरफ रोते बिलखते चेहरे देखकर गांव की आबोहवा भी शांत सी हो गई

उधर हिमांशी के गांव अलीगंज डिगवा पाली में जब उसका शव पहुंचा तो मां रामकली, पिता दल बहादुर रोए जा रहे थे। गांव वाले उनको समझा रहे थे, लेकिन उनके मुंह से केवल यही शब्द निकल रहा था कि हमार बिटिया अब कबौ न मिली। यह का हुई गवा। जीजा अखिलेश और बहन करमावती भी बिलख रहे थे। बहन करमावती तो उस दिन को कोस रही थी कि जिस दिन हिमांशी उसके गांव कोडर आयी थी। करमावती कह रही थी कि हिमांशी तुम काहे हमरे घर आई, हम कबौ यह यह न भूल पाब कि तुम हमरे घर आई राहो और तुम हमार साथ छोड़कर चली गई। कोडर और अलीगंज डिगवा पाली गांव से जब बेटियों की अर्थियां उठी तो माहौल और भी गमगीन हो गया। हर शख्स रो रहा था।

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Author: ILMA NEWSINDIA

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