प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने दुखी मन से मेला छोड़ दिया। उनके अचानक माघ मेले से प्रस्थान करने की खबर से श्रद्धालुओं और संत समाज में चर्चा तेज हो गई है। जाते समय शंकराचार्य ने कहा कि उन्होंने कभी ऐसी स्थिति की कल्पना नहीं की थी, जिसके कारण उन्हें माघ मेले को बीच में ही छोड़ना पड़े।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि माघ मेला सनातन परंपरा, साधना और संतों के समागम का पर्व है, लेकिन जिस तरह की परिस्थितियां इस बार बनीं, उससे उन्हें गहरा मानसिक कष्ट पहुंचा है। उन्होंने संकेतों में कहा कि व्यवस्थाओं और कुछ घटनाक्रमों ने उन्हें आहत किया है, हालांकि उन्होंने किसी व्यक्ति या संस्था का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया।
सूत्रों के मुताबिक, माघ मेले के दौरान कुछ मुद्दों को लेकर संत समाज और प्रशासन के बीच मतभेद की स्थिति बनी हुई थी। इन्हीं हालातों के चलते शंकराचार्य ने मेला छोड़ने का निर्णय लिया। उनके समर्थकों का कहना है कि यह फैसला उन्होंने अत्यंत पीड़ा और मजबूरी में लिया है।
शंकराचार्य के माघ मेला छोड़ने के बाद संत समाज में हलचल है। कई संतों और धार्मिक संगठनों ने इस पर चिंता जताई है और कहा है कि ऐसे हालात सनातन परंपराओं के लिए शुभ संकेत नहीं हैं। वहीं प्रशासन की ओर से कहा गया है कि माघ मेले की व्यवस्थाएं सुचारु रूप से चल रही हैं और सभी संतों का सम्मान सर्वोपरि है।
फिलहाल शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस पूरे मामले पर संत समाज और प्रशासन के बीच बातचीत हो सकती है।

