REPORTED BY SHAMIM IQBAL
ताले और तालीम के शहर अलीगढ़ की पहचान मानी जाने वाली 147वीं ऐतिहासिक नुमाइश में अचानक हुई बारिश ने रंग में भंग डाल दिया। कड़ाके की ठंड के बीच हुई तेज बारिश से जहां एक ओर शहर का तापमान गिर गया, वहीं दूसरी ओर नुमाइश की रौनक पर भी असर साफ नजर आया। बारिश के चलते दुकानदारों, दर्शकों और आयोजकों सभी को परेशानियों का सामना करना पड़ा।


नुमाइश में दूर-दराज से आए दुकानदारों, खासकर खुले में दुकान लगाने वालों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। बारिश शुरू होते ही दुकानदार अपने सामान को बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। कपड़े, दवाइयां, खिलौने, बिस्तर और अन्य सामान को सुरक्षित रखने के लिए तिरपाल और प्लास्टिक की चादरों की तलाश में अफरा-तफरी मच गई। कई दुकानों में पानी भर जाने से सामान भीग गया, जिससे आर्थिक नुकसान की आशंका जताई जा रही है।


खुले बाजार और क्राफ्ट स्टॉल सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। उद्योग मंडप जैसे क्षेत्रों में जहां टीनशेड की व्यवस्था थी, वहां स्थिति कुछ हद तक संभली रही, लेकिन खुले आसमान के नीचे लगने वाले झूलों और दुकानों पर सन्नाटा पसर गया। बारिश और ठंडी हवाओं के कारण दर्शकों की संख्या में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे नुमाइश की चहल-पहल कम हो गई।
नुमाइश मैदान की स्थिति की बात करें तो प्रशासन द्वारा इस बार बनाई गई पक्की सड़कों के चलते मुख्य रास्तों पर जलभराव की समस्या पिछली बार की तुलना में कम रही, जो एक राहत की बात रही। हालांकि, कच्चे रास्तों और पार्किंग एरिया में कीचड़ फैलने से लोगों को पैदल चलने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। फिसलन के कारण कई लोग संभल-संभल कर चलते दिखे।
बारिश और ठंडी हवाओं का असर झूलों पर भी पड़ा। ‘मौत का कुआं’, ‘जलपरी’ और बड़े झूलों पर दर्शकों की संख्या उम्मीद से काफी कम रही। मौसम खराब होने के चलते कई परिवारों ने नुमाइश में आने का कार्यक्रम टाल दिया।
कुल मिलाकर, अचानक बदले मौसम ने अलीगढ़ नुमाइश की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। दुकानदारों को जहां नुकसान की चिंता सता रही है, वहीं दर्शक भी मौसम खुलने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि नुमाइश की रौनक एक बार फिर लौट सके।




