MP: कोटपूतली-बहरोड़ के कायमपुराबास में खनन के खिलाफ ग्रामीण 480 दिन से धरने पर हैं। ब्लास्टिंग में मजदूर की मौत हो गई और मकानों में दरारें पड़ीं हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन और एनजीटी से शिकायतों के बावजूद खनन जारी है।
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कोटपूतली जिले के कायमपुराबास गांव की पहाड़ी पर चल रहा खनन अब सिर्फ पर्यावरण या नियमों का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह ग्रामीणों के लिए जिंदगी और मौत की जंग बन चुका है। ग्लैक्सी इंफ्रा लिमिटेड द्वारा किए जा रहे खनन के विरोध में ग्रामीण पिछले 480 दिनों से लगातार धरने पर बैठे हैं, लेकिन न तो प्रशासन ने उनकी सुनी और न ही खनन पर कोई रोक लगी।
प्रशासनिक निरीक्षण, लेकिन नतीजा शून्य
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर, खनन विभाग और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) तक कई बार शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिले। बुधवार को खनन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे, जिससे ग्रामीणों को कुछ उम्मीद जगी, लेकिन निरीक्षण के बाद अधिकारी बिना किसी ठोस फैसले के लौट गए।
रातभर इंतजार, अधिकारी नहीं पहुंचे
बुधवार रात ग्रामीणों को सूचना दी गई कि एनजीटी की टीम मौके पर पहुंचने वाली है। इस उम्मीद में ग्रामीण भूखे-प्यासे पूरी रात धरना स्थल पर बैठे रहे, लेकिन देर रात तक कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। मौके पर केवल मीडिया कर्मी मौजूद रहे। दिल्ली से आए पत्रकारों ने हालात का जायजा लिया और ग्रामीणों की पीड़ा सुनी।
संघर्ष जारी रहने का एलान
धरना स्थल पर अनिल यादव, मनोज यादव, योगेंद्र कुमार, शांति देवी, रेवती देवी, कृष्ण, जयप्रकाश, लालचंद टेलर, बाबूलाल, भूपेंद्र, सुनीता, अनिता, बीना, उर्मिला, महेंद्र, ओमप्रकाश सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने दो टूक ऐलान किया है कि जब तक खनन पर पूरी तरह रोक नहीं लगती और सुरक्षित जीवन की गारंटी नहीं मिलती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।