Rajasthan: कोर्ट ने साफ कहा कि जब मुस्लिम पति-पत्नी दोनों तलाक पर सहमत हों, तो फैमिली कोर्ट को तकनीकी आधार पर विवाह विच्छेद से इनकार नहीं करना चाहिए।
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राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े एक अहम और नजीर बनने वाले फैसले में आपसी सहमति से हुए मुबारात को पूरी तरह वैध तलाक घोषित किया है। कोर्ट ने साफ कहा कि जब मुस्लिम पति-पत्नी दोनों तलाक पर सहमत हों, तो फैमिली कोर्ट को तकनीकी आधार पर विवाह विच्छेद से इनकार नहीं करना चाहिए।
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड के आधार पर माना कि पति ने तीन अलग-अलग तुहर (मासिक धर्म के बीच की अवधि) में तलाक का उच्चारण किया था, जिसे पत्नी ने स्वीकार किया। इसके बाद 20 अगस्त 2024 को दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से लिखित तलाक समझौता (मुबारात) किया, जिसमें मेहर, इद्दत अवधि का भरण-पोषण और आजीवन गुजारा भत्ता तय किया गया था।
क्या है मुबारात?
फैसले में यह भी रेखांकित किया गया कि मुबारात मुस्लिम कानून के तहत तलाक का एक मान्य तरीका है, जिसमें पति और पत्नी दोनों आपसी सहमति से विवाह समाप्त करते हैं। ऐसे मामलों में फैमिली कोर्ट को विवाह की स्थिति घोषित करने का अधिकार है और उसे इस अधिकार का प्रयोग करना चाहिए।
राजस्थान की फैमिली अदालतों के लिए दिशा-निर्देश जारी करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि यदि याचिका में यह दावा किया जाए कि विवाह पहले ही मुस्लिम कानून के तहत समाप्त हो चुका है, तो दोनों पक्षों की व्यक्तिगत उपस्थिति में बयान दर्ज कर उनकी स्वेच्छा सुनिश्चित की जाए और लिखित तलाकनामा अथवा समझौते को रिकॉर्ड पर लिया जाए। अंततः अपील स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने घोषित किया कि अपीलकर्ता और प्रतिवादी का विवाह मुबारात के माध्यम से विधिवत रूप से समाप्त हो चुका है।