महाराष्ट्र की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी ने ऐसा प्रदर्शन किया है जिसने राज्य की पूरी सियासी तस्वीर बदल दी है। मुंबई में ठाकरे परिवार के गढ़ माने जाने वाले इलाकों में भाजपा ने जबरदस्त बढ़त हासिल कर ली, वहीं पुणे और पिंपरी–चिंचवड़ में शरद पवार के प्रभाव को भी करारी मात दे दी। इस जीत को भाजपा के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार पार्टी ने शहरी निकायों और स्थानीय राजनीति में विपक्ष के सबसे मजबूत किलों को भेद दिया है।

मुंबई में लंबे समय से ठाकरे परिवार की राजनीति का दबदबा रहा है, लेकिन इस बार मतदाताओं ने विकास, बुनियादी सुविधाओं और सुशासन के मुद्दे पर भाजपा को प्राथमिकता दी। पार्टी के नेताओं का कहना है कि जनता ने परिवारवाद और भावनात्मक राजनीति से ऊपर उठकर काम करने वाली सरकार को चुना है। कई वार्डों में शिवसेना के दिग्गज चेहरों को हार का सामना करना पड़ा, जो आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है।
पुणे और पिंपरी–चिंचवड़ में भी तस्वीर कुछ ऐसी ही रही। इन इलाकों को कभी शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का मजबूत किला माना जाता था, लेकिन भाजपा ने संगठनात्मक ताकत और जमीनी रणनीति के दम पर यहां भी बाजी पलट दी। युवाओं और मध्यम वर्ग ने खुलकर भाजपा का समर्थन किया, जिससे पवार खेमे को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नतीजे महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव की आहट हैं। भाजपा अब केवल गठबंधन की पार्टी नहीं, बल्कि अपने दम पर राज्य की सबसे बड़ी ताकत बनती दिख रही है। पार्टी नेतृत्व इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और राज्य में किए गए विकास कार्यों की जीत बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे अस्थायी लहर करार दे रहा है। लेकिन इतना तय है कि इन नतीजों ने महाराष्ट्र की सियासत में नया अध्याय जोड़ दिया है।