बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) के चुनाव नतीजों के बाद अब मेयर पद को लेकर सियासी खींचतान तेज हो गई है। महायुति गठबंधन में शामिल एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना ने भारतीय जनता पार्टी के सामने मेयर पद के लिए 50-50 फॉर्मूले की मांग रख दी है। शिंदे सेना चाहती है कि अगले पांच साल के कार्यकाल में ढाई साल BJP और ढाई साल शिवसेना (शिंदे गुट) का मेयर बने।
सूत्रों के मुताबिक शिंदे गुट का तर्क है कि गठबंधन की जीत में उनकी पार्टी का भी अहम योगदान रहा है, इसलिए सत्ता में बराबर की हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने साफ कहा है कि सिर्फ उपमेयर या स्थायी समिति जैसे पदों से संतुलन नहीं बनेगा, मेयर कुर्सी पर भी समान अधिकार जरूरी है। इस मांग को लेकर शिंदे गुट के नेताओं ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और BJP के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत शुरू कर दी है।
वहीं BJP फिलहाल इस मुद्दे पर खुलकर कुछ बोलने से बच रही है। पार्टी का मानना है कि BMC जैसी देश की सबसे अमीर नगर निकाय की कमान उनके हाथ में रहनी चाहिए, क्योंकि सबसे ज्यादा पार्षद भी भाजपा के ही जीते हैं। BJP के कुछ नेता ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले को व्यावहारिक नहीं मान रहे हैं, जबकि शिंदे गुट इसे गठबंधन धर्म का हिस्सा बता रहा है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मेयर पद को लेकर यह टकराव आगे चलकर महायुति के अंदर नई चुनौती खड़ी कर सकता है। इससे पहले भी महाराष्ट्र सरकार गठन के समय विभागों के बंटवारे को लेकर खींचतान देखने को मिली थी। अब वही तस्वीर BMC में दोहराती नजर आ रही है।
मुंबई की जनता की नजर इस बात पर टिकी है कि गठबंधन के दोनों दल आपसी सहमति से रास्ता निकाल पाते हैं या नहीं। अगर सहमति नहीं बनी तो मेयर चुनाव के दौरान अंदरूनी खेमेबाजी खुलकर सामने आ सकती है। आने वाले दिनों में दिल्ली और मुंबई में बैठकों का दौर तेज होने की संभावना है, जिसके बाद ही तय होगा कि BMC की कुर्सी पर कौन और कितने समय के लिए बैठेगा।



