पंजाब में भगवंत मान सरकार के सत्ता में आने के बाद राज्य की राजनीति के साथ-साथ सिख धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की छवि में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। शराब-तंबाकू पर सख्ती, धार्मिक स्थलों के आसपास प्रतिबंध और पवित्र शहरों की अवधारणा को आगे बढ़ाकर मान सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि उसकी नीतियों का केंद्र सिख परंपराओं और धार्मिक मूल्यों की रक्षा है।

राज्य सरकार द्वारा धार्मिक महत्व वाले शहरों में शराब और तंबाकू की बिक्री पर रोक लगाने के फैसले को सिख संगठनों ने ऐतिहासिक कदम बताया है। खासतौर पर श्री आनंदपुर साहिब और अन्य धार्मिक नगरों को ‘पवित्र शहर’ घोषित करने की पहल को सिख विरासत के संरक्षण की दिशा में बड़ा निर्णय माना जा रहा है।
शराब-तंबाकू पर सख्ती
मान सरकार ने सत्ता में आने के बाद यह साफ कर दिया था कि धार्मिक स्थलों के आसपास नशे की कोई जगह नहीं होगी। इसी कड़ी में गुरुद्वारों और प्रमुख धार्मिक इलाकों के आसपास शराब और तंबाकू की दुकानों को बंद कराया गया। सरकार का तर्क है कि यह फैसला न केवल धार्मिक भावनाओं के अनुरूप है, बल्कि नशे के खिलाफ चल रही मुहिम को भी मजबूती देता है।
‘पवित्र शहर’ की अवधारणा
सरकार द्वारा कुछ धार्मिक नगरों को ‘पवित्र शहर’ घोषित करना केवल प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि सिख आस्था से जुड़ा प्रतीकात्मक कदम भी माना जा रहा है। इन शहरों में मांस, शराब, तंबाकू और नशीले पदार्थों पर नियंत्रण को सख्ती से लागू किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और सिख संस्कृति की वैश्विक पहचान मजबूत होगी।
सिख विरासत पर राजनीतिक संदेश
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मान सरकार की ये नीतियाँ सिख पहचान को मुख्यधारा में और मजबूती से स्थापित करने की कोशिश हैं। इससे पहले की सरकारों पर अक्सर यह आरोप लगता रहा कि धार्मिक भावनाओं को केवल चुनावी मुद्दे के तौर पर इस्तेमाल किया गया, लेकिन मौजूदा सरकार इसे नीतिगत फैसलों में बदल रही है।
समर्थन और विरोध दोनों
हालांकि इन फैसलों को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। जहां सिख संगठनों और धार्मिक संस्थाओं ने सरकार की खुलकर तारीफ की है, वहीं कुछ कारोबारी वर्ग और विपक्षी दलों का कहना है कि इससे रोजगार और राजस्व पर असर पड़ सकता है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार भावनात्मक मुद्दों के सहारे अपनी राजनीति मजबूत कर रही है।
सरकार का पक्ष
मान सरकार का कहना है कि धार्मिक सम्मान और सामाजिक सुधार आर्थिक लाभ से ऊपर हैं। सरकार के अनुसार, नशे के खिलाफ लड़ाई और सिख मूल्यों की रक्षा दोनों साथ-साथ चल सकती हैं और यही पंजाब के भविष्य की दिशा तय करेंगी।
बदलती तस्वीर
कुल मिलाकर, शराब-तंबाकू पर प्रतिबंध से लेकर पवित्र शहरों की घोषणा तक, मान सरकार ने यह संकेत दे दिया है कि पंजाब की सिख विरासत केवल इतिहास नहीं, बल्कि वर्तमान शासन की नीति का अहम हिस्सा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ये फैसले सामाजिक बदलाव में कितने प्रभावी साबित होते हैं।