पाकिस्तान में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस बीच रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने विवादित बयान दिया कि यह बाढ़ अल्लाह का देन और रहमत है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि लोगों को इस पानी को अपने घरों में जमा करना चाहिए। विपक्ष और जनता ने इस बयान पर कड़ी नाराजगी जताई है। बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय मदद पहुंचाई जा रही है।

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बाढ़ की तबाही और जनजीवन पर असर
पाकिस्तान के कई प्रांतों में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं। सैकड़ों गांव जलमग्न हो गए हैं और लाखों लोग राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं। खेती-बाड़ी को भारी नुकसान हुआ है और पशुधन बह जाने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। आपदा प्रबंधन एजेंसियां लगातार राहत सामग्री पहुंचा रही हैं। इस साल 26 जून तक पूरे पाकिस्तान में 854 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 1100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
विपक्ष का हमला और जनता की नाराजगी
ख्वाजा आसिफ के बयान पर विपक्षी नेताओं ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। उनका कहना है कि सरकार को लोगों की मदद के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, न कि ऐसी बयानबाजी करनी चाहिए जो पीड़ा को और बढ़ाए। कई सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने भी सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की और कहा कि सरकार उनकी तकलीफ समझने के बजाय उपदेश दे रही है।
अंतरराष्ट्रीय सहायता और राहत कार्य
बाढ़ प्रभावित इलाकों में मदद के लिए संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने राहत सामग्री भेजना शुरू कर दिया है। कई देशों ने पाकिस्तान को आर्थिक सहायता और दवाइयां उपलब्ध कराने का वादा किया है। हालांकि खराब बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक कमजोरी के कारण राहत सही तरीके से सभी तक नहीं पहुंच पा रही।
पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक और राजनीतिक संकट से जूझ रहा है। ऐसे में बाढ़ की यह त्रासदी हालात को और गंभीर बना रही है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार जनता की पीड़ा से आंखें मूंदे हुए है और ऐसे बयान केवल उसकी नाकामी को छुपाने का प्रयास हैं। बाढ़ प्रभावित लोग अब सीधे तौर पर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने लगे हैं।