Lucknow News: धमाकों की छाई ऐसी दहशत कि बिजली कड़कने पर भी सहमे रहे लोग

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The Explosions Caused Such Panic That People Remained Scared Even When  Lightning Struck - Lucknow News - Lucknow News:धमाकों की छाई ऐसी दहशत कि  बिजली कड़कने पर भी सहमे रहे लोग

लखनऊ। गुडंबा के बेहटा और सेमरा गांव में रविवार को सात घंटे में हुए दो धमाकों की दहशत लोगों में सोमवार को भी दिखी। आलम यह रहा कि जब भी बिजली कड़कती लोग सिहर उठते और घरों से निकल मैदान की ओर भागने लगते। गांव में सिर्फ मातम और खौफ पसरा रहा। सेमरा में शाम को हुए पटाखे विस्फोट ने तो लोगों की नींद उड़ा दी।

गोद से गिरते-गिरते बचा पोता
डर के कारण बाहर खाली प्लॉट के पास बैठीं बेहटा निवासी सरोज ने बताया कि पूरा परिवार घर में था। खाने के तैयारी चल रही थी। मैं नवजात पोते को गोद में लेकर खिला रही थी। तभी एक बाद एक तेज धमाके होने लगे। धमक के कारण मैं सहम गई और पोता गोद से गिरते-गिरते बच गया। पोता जोर-जोर से रोने लगा। आनन-फानन उसे लेकर मैं और परिवार के लोग घर से बाहर भाग निकले।

भय में जेठानी की बिगड़ गई तबीयत
बेहटा की सुशीला ने बताया कि शाम को मैं और जेठानी घर के बाहर बैठी थीं। तभी तेज विस्फोट हुआ। धमक के कारण जेठानी की तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गईं। घरवालों ने पानी की छीटें उनके चेहरे पर डालीं। तभी उन्हें होश आया। आनन-फानन उन्हें डॉक्टर के पास ले जाया गया। यहां चेकअप के बाद उनकी हालत स्थिर हो गई।

रात भर सो न सका, आंखे बंद होते ही सामने आ रहा था हादसा

उसी गांव के रहने सब्जी विक्रेता रंजीत ने बताया कि हादसे से कदर उनके मन दहशत बन कर समा गया है कि रात भर नींद आई। जैसे आंख बंद करता सामने भयावह मंजर आ जाता। हादसे के करीब दस मिनट पहले मैं भाई आलम के घर के सामने ही बैठा था। नदीम ने मुझे सब्जी धोने के लिए पानी दिया था। काम के बाद मैं जैसे ही घर पहुंचा तो एक तेज धमाका हुआ। मैं कुछ समझ पाता तभी एक और धमाका हुआ। मैं तौलिया लपेटे हुए घर के बाहर भागा तो देखा कि आलम भाई के घर से धुएं का गुबार निकल रहा था।

ऐसा लगा कि जहाज गिर गया हो

राजेश्वरी ने बताया कि धमाका इतना तेज था कि पहले लगा मानो कोई जहाज गिर गया हो। बाहर अफरा-तफरी मच गई। जब पता चला कि पटाखों के कारण विस्फोट हुआ है। तब तक सभी लोग घर छोड़कर दूर निकल गए थे। कानों में अभी विस्फोट की धमक सुनाई पड़ा रही है।

पास ही फटा पटाखा, मगर बच गई जान

सेमरा में रहने वाले मो. शारिक अपने घर के बाहर बैठे थे। उनके चेहरे पर अभी डर और खौफ दिख रहा था। शारिक ने कहा कि अल्लाह का शुक्र है कि मैं बच गया। मानों नई जिंदगी मिल गई हो। रविवार शाम शाम 6:20 बजे मै गैरेज से लौट कर बकरियों को चारा खिला रहा था। तभी ही बने गोदाम में रखे पटाखों में अचानक से विस्फोट हो गया। मैं और बकरी उछल कर कुछ दूरी पर जा गिरा। मैं तो बच गया, मगर बकरी मर गई।

आंखों के सामने अभी घूम रहा भयावह मंजर

सेमरा के रहने वाले राहुल ने बताया कि मैं और बेटा छत पर खड़े थे। अचानक गोदाम से धुंआ निकला और जोरदार विस्फोट हुआ। आग की लपटों के कारण मेरी और बेटे की आंखें बंद हो गई। कान सुन हो गए। मन में ऐसा खौफ बैठ गया है कि अभी आंखों के सामने वह भयावह मंजर दिख रहा है।

आसपास के गांवों में भी डर का माहौल
उसी गांव के रहने वाले युगराज का कहना था कि पहले बेहटा और फिर सेमरा में हुए धमाके से पूरे इलाके में दहशत फैल गई। आसपास भी कई जगह पटाखे बनते हैं, इसलिए गांव वालों को पूरी रात किसी अनहोनी का डर सताता रहा। भय के कारण मैं और परिवार रात खुले मैदान में रहा।
पाई-पाई जोड़कर बनाया था घर, एक हादसे ने छीन ली छत

बाराबंकी के अमरसंडा में रहने वाले ई-रिक्शा चलाकर महबूब रोते हुए बताया कि पाई-पाई जोड़कर बेहटा में घर बनवाया था। पैसे खत्म हो गए तो छत पर टीन शेड डाल दिया। कुछ जमा हो जाए तो मकान पक्का करवाऊं, इसी सोच से एक साल पहले परिचित अजीज को किराये पर दिया था। पर अब सब बर्बाद हो गया।

तिरपाल डालकर बीती रात
अजीज ने बताया कि विस्फोट में पूरी गृहस्थी दीवार के नीचे दब गई। राशन खराब गया। छत का टीन शेड भी गिर गया। बीती रात से हो रही बारिश ने मुसीबत और बढ़ा दी। तिरपाल डालकर तख्त पर रात गुज़ारी। हादसे के बाद से अन्न का एक दाना भी गले से नहीं उतरा। कोई भी उनकी सुध लेने नहीं आया।
सबसे ज्यादा पड़ गई

संजय भाटिया ने लोकसभा चुनाव में रचा था इतिहास संजय भाटिया कुरुक्षेत्र विश्वविद्याल ग्रेजुएट हैं। इनका जन्म हरियाणा के पानीपत जिले में हुआ है। वह भाजपा के महामंत्री भी रह चुके हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी संजय भाटिया ने अपने पहले ही लोकसभा चुनाव में इतिहास रच दिया था। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को 6.54 लाख मतों के अंतर से मात दी थी। संजय भाटिया ने प्रदेश के 53 साल के इतिहास में सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्हें कुल 909432 वोट मिले थे। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप शर्मा को 654269 वोटों के अंतर से हराया था। राहुल गांधी ने दिया था कर्मवीर के नाम का सुझाव वहीं कर्मवीर सिंह बौद्ध किसी भी गुट या खेमे से जुड़े हुए नेता नहीं माने जाते। यही कारण है कि उन्हें संगठन के भीतर एक संतुलित और सर्व स्वीकार्य चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। वे ‘संविधान बचाओ अभियान’ में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं और जमीनी स्तर पर पार्टी के कार्यक्रमों में भागीदारी निभाते रहे हैं। एससी समुदाय से आने वाले कर्मवीर सिंह बौद्ध सामाजिक संतुलन के नजरिये से भी एक अहम दावेदार है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्वयं उनके नाम का सुझाव दिया है। अंबाला के मुलाना विधानसभा में रहने वाले कर्मवीर सिंह प्रशासकीय अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और लंबे समय से कांग्रेस से जुड़कर कार्य कर रहे थे। कांग्रेस ने उन्हें हिमाचल प्रदेश में एससी सेल का प्रभारी भी बनाया था। राष्ट्रीय स्तर पर वह कन्वीनर भी हैं।