जेल के भीतर से ठगी का इतना बड़ा खेल चलने पर जेल प्रशासन की भूमिका भी कटघरे में है। सूत्रों का मानना है कि बिना मिलीभगत के इतना बड़ा खेल संभव नहीं। जेल के भीतर से सादिया के भाई को कॉल कर बुलाना, फिर अलग-अलग नामों से मुलाकात करना बिना मिलीभगत से संभव नहीं है।

क्सा हुसैन निवासी व्यापारी पर गैंगस्टर विकास सिन्हा ने पांच गंभीर धाराओं में केस दर्ज कराकर जेल भिजवा दिया था। इसके बाद पति को बचाने के लिए व्यापारी की पत्नी ने मोर्चा संभाला। तीन साल तक पैरवी कर पति को जेल से बाहर निकालवाया। इसके बाद वह गैंगस्टर के पीछे पड़ गईं। पुलिस को खुद साक्ष्य उपलब्ध कराने के साथ ही उसके गैंग का काला चिट्ठा खोल दिया।
जेल में बेल व दोषमुक्त कराने के नाम ठगी का पर्दाफाश भी व्यापारी की पत्नी ने ही कराया है। महिला का दावा है कि वह जल्द ही गैंगस्टर के एक और कारनामे का पर्दाफाश करेंगी। चक्सा हुसैन निवासी सैबा अनवार ने बताया कि मोतिहारी जिले के टाउन हाल बलुआताल निवासी विकास सिन्हा जेल बाईपास, पादरी बाजार के पास पहले अस्पताल चलाता था।
उसने व्यापार और हॉस्पिटल में शेयर देने के नाम पर उनके पति इम्तियाज से 10 लाख रुपये लिए थे। रुपये मांगने पर विकास ने पति पर छेड़खानी, पाॅक्सो और दुष्कर्म समेत पांच केस दर्ज करा दिए। इसके बाद समझौता कराने के लिए 50 लाख रुपये मांगने लगा। इन्कार पर उन्हें जेल भिजवा दिया। पति इम्तियाज को बचाने के लिए उन्होंने तीन साल तक केस की पैरवी की।
उस दौरान उन्होंने पुलिस को खुद साक्ष्य उपलब्ध कराए। इसके बाद विकास सिन्हा गैंग का पर्दाफाश हुआ। अक्तूबर 2023 में विकास पर फर्जी केस और रंगदारी वसूलने के मामले में पहला केस दर्ज हुआ और वह जेल गया।
ठगी प्रकरण में भी उन्होंने जेल में बंद सादिया के भाई के सहयोग से जेल मुलाकात रजिस्टर, कॉल डिटेल्स और लेन-देन से जुड़े दस्तावेज जुटाए और सादिया के भाई को लेकर सीधे पुलिस अधिकारियों के समक्ष पेश हुईं। व्यापारी की पत्नी की ओर से दिए गए दस्तावेजों की जांच में मामला सही पाया गया। पुलिस ने केस दर्ज कर गैंगस्टर और उसके साथियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह ने और कितने लोगों से वसूली की है, इसकी जांच की जा रही है। महिला ने अब पड़ताल कर एक नई शिकायत एसएसपी से की है। जांच में मामला सही पाए जाने पर जल्द ही विकास व उसके गैंग पर एक और केस दर्ज हो सकता है।
सादिया अंसारी से जेल में मुलाकात के बाद रचा गया खेल
पति की हत्या के मामले में जेल में बंद सादिया की मुलाकात गैंगस्टर विकास कुमार सिन्हा, उसकी पत्नी रेखा सिंह व मां गीता सिंह से हुई थी। रेखा सिंह ने सादिया का आश्वासन दिया कि उसके पति पेशे से वकील हैं, जिनकी पहुंच बड़े-बड़े अधिकारियों से है। हम लोग जल्द ही जेल से जमानत पर छूट जाएंगे और तुम्हारी भी जमानत कराते हुए केस से बरी करा देंगे। झांसे में आई सादिया ने अपने भाई के जरिये करीब 40 लाख रुपये दे दिए थे।
जेल से कॉल कर भाई को मिलने के लिए बुलाया
\गैंगस्टर ने जेल में बंद रहने के दौरान सादिया अंसारी से उसके भाई को कॉल कराकर मिलने के लिए बुलाया। इसके बाद जेल से छुड़ाने के नाम पर उसे झांसे में ले लिया। इस बीच अक्तूबर में रेखा व उसकी मां जमानत पर छूट गए। इसके बाद दोनों सादिया के भाई के घर पहुंचे।
जमानत कराने, केस से दोष मुक्त कराने और सादिया को जेल से जमीन बिकवाने की अनुमति दिलवाने, केस डायरी से सीडीआर हटवाने, हत्या के केस के वादी व गवाहों को दुष्कर्म में फंसाकर हत्या के केस में सुलह कराने के नाम पर 26 अक्तूबर 2024 से 03 जून तक करीब 40 लाख रुपये ऐंठ लिए।
सादिया का मोबाइल चालू करा बनाया यूपीआई, फिर निकाल लिए रुपये
विकास के कहने पर रेखा सिंह ने अपने साथियों की मदद से पहले सादिया अंसारी का बंद मोबाइल चालू करा यूपीआई बनवाया। फिर जमीन कारोबारियों से मिलकर पिपराइच रोड जंगल अहमद अली शाह में सादिया की बहन की जमीन 25 लाख में बेच दी।
इसके बाद ये रुपये यूपीआई के जरिये निकाल लिए। यहीं नहीं आरोपियों ने उन्हीं की आईडी से मोबाइल व सिम कार्ड खरीदकर उनके पूरे परिवार को ब्लैकमेल किया। सादिया की छोटी बहन मरियम के जेवर को भी एक फाइनेंस कंपनी में गिरवी रखवा दिया और रुपये हड़प लिए। कैंसर पीड़ित पिता असगर के साथ भी ठगी की।
जेल प्रशासन पर उठे सवाल
जेल के भीतर से ठगी का इतना बड़ा खेल चलने पर जेल प्रशासन की भूमिका भी कटघरे में है। सूत्रों का मानना है कि बिना मिलीभगत के इतना बड़ा खेल संभव नहीं। जेल के भीतर से सादिया के भाई को कॉल कर बुलाना, फिर अलग-अलग नामों से मुलाकात करना बिना मिलीभगत से संभव नहीं है।
जेल में जाकर आरोपी से पुलिस पूछताछ करेगी। अन्य आरोपी भागे हुए हैं, उनकी तलाश की जा रही है: रवि सिंह, सीओ गोरखनाथ
मामला जेल के बाहर का है। स्थानीय पुलिस मामले की जांच करेगी। जेल प्रशासन जांच में पूरा सहयोग करेगा: दिलीप पांडेय, जेल अधीक्षक