UP: भरतपुर को लेकर NCERT की पुस्तक में ऐसा क्या लिखा गया…जाटों का खौल उठा खून|

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नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) की कक्षा 8 की किताब में दिखाए गए नक्शे में जैसलमेर को मराठा साम्राज्य का हिस्सा दिखाए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है।

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एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में भरतपुर राज्य को मराठा साम्राज्य के अधीन दिखाए जाने पर अखिल भारतीय जाट महासभा ने रोष जताया है। अखिल भारतीय जाट महासभा के जिला अध्यक्ष कप्तान सिंह चाहर ने कहा कि पुस्तक में गलत तरीके से भरतपुर राज्य के ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।

पुस्तक में भरतपुर राज्य को 1759 में मराठा साम्राज्य के अधीन दिखाया जाना गलत ही नहीं बल्कि संपूर्ण भारतवर्ष के जाट समाज का अपमान है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से अपील की है कि इसे सही कराया जाए। ऐसा न होने पर जाट महासभा आंदोलन के लिए बाध्य होगी। इस दौरान महामंत्री वीरेंद्र सिंह छोकर, महानगर अध्यक्ष गजेंद्र सिंह नरवार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष जयप्रकाश चाहर, उपाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह राणा, चौधरी नवल सिंह, गुलबीर सिंह ने भी रोष जताया।

किताब में विवादित नक्शा
NCERT की कक्षा 8 की सोशल साइंस की किताब विवादित नक्शे में मराठा साम्राज्य की सीमा में जैसलमेर को भी दर्शाया गया है। इसमें मराठा साम्राज्य को कोल्हापुर से उत्तर में पेशावर और पूर्व में कटक तक फैला दिखाया गया है, जिसमें जैसलमेर को भी शामिल किया गया है। जबकि इतिहासकार कहते हैं कि जैसलमेर कभी भी मराठा साम्राज्य का हिस्सा नहीं रहा।
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इतिहास के लेक्चर तनेराव सिंह सोढ़ा ने कहा कि मुगल भी जैसलमेर को जीतने में सफल नहीं रहे। जैसलमेर की स्थापना लगभग 1178 ईस्वी में यादव वंश के वंशज रावल जैसल ने की थी। उनके वंशजों ने लगभग 770 वर्षों तक यहां लगातार शासन किया।
उन्होंने आगे कहा कि जैसलमेर ने खिलजियों, राठौड़ों, मुगलों और तुगलकों, सहित अन्य के आक्रमणों का सामना किया। भाटी शासकों ने विस्तार के लिए नहीं, बल्कि अस्तित्व के लिए लड़ाई लड़ी और सफलतापूर्वक अपनी स्वतंत्रता बनाए रखी। ब्रिटिश शासन के दौरान भी राज्य ने अपनी प्रमुखता बनाए रखी, जब तक कि स्वतंत्रता के बाद यह भारतीय गणराज्य में विलीन नहीं हो गया। एकीकरण के समय, जैसलमेर का क्षेत्रफल 16,062 वर्ग मील था।

सोढ़ा के अनुसार, मराठों ने राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्रों में आक्रमण किए थे। इन क्षेत्रों में मराठों ने चौथ (एक प्रकार का कर) भी वसूल किया था, जिसमें जयपुर, मेवाड़, डूंगरपुर और बांसवाड़ा जैसे क्षेत्रों में उनकी उपस्थिति के ऐतिहासिक प्रमाण मौजूद हैं।
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Author: ILMA NEWSINDIA

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