Shahdol News: एक नहीं तीन बार सर्प ने मासूम के शरीर में छोड़ा जहर, बीस दिन इलाज के बाद मौत के मुंह से आई बाहर

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Shahdol: जिला अस्पताल के PICU में डॉक्टर सुनील हथगेल और उनकी टीम ने 11 दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर इलाज किया। शुरुआत में 20 वायल एंटी-स्नेक वेनम दी गईं, लेकिन हालत में सुधार न होने पर 10 और वायल दी गईं। धीरे-धीरे सुधार होता गया।

The snake bit the innocent child thrice, he came out of the jaws of death after treatment

जाको राखे साइयां, मार सके ना कोई यह कहावत सच साबित हुई है जिले की एक मासूम तीन वर्षीय बच्ची के मामले में। जहरीले करैत सांप ने उसे एक नहीं बल्कि तीन-तीन बार डंसा, लेकिन डॉक्टरों की अथक मेहनत और करीब 40 वायल एंटी-स्नेक वेनम लगाने के बाद बच्ची अब पूरी तरह स्वस्थ है। घटना के दिन तो ऐसा लग रहा था कि उसका बच पाना मुश्किल है, लेकिन समय रहते अस्पताल पहुंचाने और डॉक्टरों की टीम के प्रयासों ने उसे नई जिंदगी दे दी।

समय रहते अस्पताल पहुंचे परिजन
सोहागपुर थाना क्षेत्र के ग्राम पिपरिया निवासी तीन वर्षीय कंचन कोल, पिता कृष्ण कोल और माता गायत्री कोल, अपनी दादी के साथ जमीन पर सो रही थी। इसी दौरान एक जहरीले करैत सांप ने उसके बाएं हाथ की कोहनी में लगातार तीन बार काट लिया। परिवार के लोग घबराए हुए थे, लेकिन तुरंत उसे जिला अस्पताल शहडोल ले आए। जिला अस्पताल में सुपर स्पेशलिटी सुविधाएं न होने के बावजूद डॉक्टरों और उनकी टीम ने हार नहीं मानी। बच्ची की हालत गंभीर थी, वह पैरालिसिस और सांस लेने में तकलीफ से जूझ रही थी, यहां तक कि उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा।

20 दिन चला इलाज, लगीं 40 वायल एंटी-स्नेक वेनम
जिला अस्पताल के PICU में डॉक्टर सुनील हथगेल और उनकी टीम ने 11 दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर इलाज किया। शुरुआत में 20 वायल एंटी-स्नेक वेनम दी गईं, लेकिन हालत में सुधार न होने पर 10 और वायल दी गईं। धीरे-धीरे सुधार होता गया, लेकिन कुल मिलाकर करीब 40 वायल दवाएं देनी पड़ीं। डॉक्टर सुनील के अनुसार कि यह इस साल का सबसे जटिल स्नेक बाइट केस था। बच्ची के बचने की संभावना बेहद कम थी, लेकिन टीम ने लगातार प्रयास किया और आखिरकार सफलता मिली।

सामान्य जीवन की ओर वापसी
इलाज के 15वें दिन कंचन ने खुद से दूध पीना शुरू किया, फिर धीरे-धीरे सामान्य आहार लेने लगी। जो आवाज पहले पूरी तरह चली गई थी, वह भी लौट आई। 20 दिनों के गहन इलाज के बाद बच्ची को पूरी तरह स्वस्थ पाकर उसके परिजनों को सौंप दिया गया।

सर्पदंश को हल्के में न लें—डॉक्टर
इस घटना से स्वास्थ्य प्रशासन ने भी सबक लिया है। डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि सर्पदंश को कभी हल्के में न लें और तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें। समय पर चिकित्सा सहायता से कई जानें बचाई जा सकती हैं। यह घटना अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय है। ग्रामीण डॉक्टरों की टीम के प्रयासों की सराहना कर रहे हैं और इसे एक ‘चमत्कार’ मान रहे हैं।

सबसे ज्यादा पड़ गई