हिमाचल प्रदेश में अब क्राइम लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जो आपकी रूह को कंपा दे। हाल ही में ही धर्मशाला की ग्राम पंचायत सुधेड़ में नाबालिग बेटे ने पिता की गोली मारकर हत्या कर दी।

शुरू में ज्यादा लाड-प्यार, गलतियों को नजरअंदाज करना और बाद में अचानक बंदिशें पिता की हत्या की वजह बन गईं। मोबाइल फोन के अत्यधिक इस्तेमाल ने भी नाबालिग को गुनहगार बनाने में मदद की। ग्राम पंचायत सुधेड़ में बेटे की ओर से गोली मारकर की गई पिता की हत्या के मामले में अभी तक की पुलिस जांच में यही बड़ी वजह सामने आई है। जैसे ही पिता को लगा कि बेटा गलत संगत में पड़ता जा रहा है तो एकदम से उस पर गुस्सा होना और टोक-टोकाई शुरू कर दी। पिता के सुधारात्मक प्रयास बेटे को नागंवार गुजरे और अपनी आजादी के खिलाफ लगे।
बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले गांव में एक व्यक्ति का पर्स चोरी हुआ था। जब पिता को शक हुआ तो उन्होंने बेटे से पहले सख्ती से पूछताछ की और बाद में गुस्से में उसकी हल्की पिटाई कर दी। उसके बाद से ही बेटे का व्यवहार अचानक बदल-बदला नजर आ रहा था। बेटा पिता से बदला लेने के लिए रोजाना मोबाइल पर तरह-तरह की वीडियो देखता था। आखिरकार सोमवार दोपहर बाद लंबे समय से पिता के प्रति नफरत पाले नाबालिग बेटे ने गोली मारकर पिता की हत्या कर दी।
जिस पिता ने मां का फर्ज निभाया, उसे ही गोली से उड़ाया
शादी के कुछ साल बाद से जब मृतक विनीत दीक्षित और उसकी पत्नी अलग-अलग रहने लगे तो दोनों ने आपसी सहमति से बड़े बेटे को पिता और छोटे को मां के पास रखने का निर्णय लिया था। मां की कमी महसूस न हो, इसलिए पिता ने बेटे को हर खुशियां देने का प्रयास किया। नाबालिग होते हुए भी बेटे को मोटरसाइकिल चलाना सिखाई। पिता को देखकर ही बेटे ने बंदूक में कारतूस लोड करना और फायर करना भी सीखा। बताया जा रहा है कि किसी व्यक्ति को कैसे मारना होता है, यह नाबालिग ने मोबाइल फोन पर वीडियो के माध्यम से सीखा था। पिता को गोली मारने के बाद नाबालिग ने पहले कमरे में अलग-अलग जगह गिरे पिता की खोपड़ी के चीथड़ों को एकत्रित कर एक डिब्बे में डाला। उसके बाद अलमारी से गहने, नकदी समेत करीब तीन से चार जिंदा कारतूस और नए कपड़ों को दो अलग-अलग थैलों में पैक किया। किसी को पता न चले, इसलिए मोटरसाइकिल की नंबर प्लेट से दो अंक मिटाए। इसके बाद मोटरसाइकिल पर सवार होकर सामान को लेकर पंजाब के गुरदासपुर की तरफ निकल गया।
मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से युवाओं में चिड़चिड़ापन और तनाव बढ़ रहा है। जो कुछ बच्चे मोबाइल में देख रहे हैं, उसे अपने जीवन में अपनाने की कोशिश कर रहे हैं। खासकर किशोर अवस्था में बच्चे में गलत चीजों की ओर रुझान ज्यादा बढ़ रहा है। इस सब से बच्चों को दूर रखने के लिए परिजनों का अहम योगदान जरूरी है। ज्यादा फोन का इस्तेमाल करने की बजाय शारीरिक गतिविधियों की ओर भेजना चाहिए। इससे बच्चों का मन शांत होता है। मन को शांत करने के लिए आगे झुकने वाले आसन करें। जैसे योग मुद्रा और चक्रासन। इससे मन शांत होगा और दिमाग के हिस्से में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचेगी। आसन करने से शरीर और मन दोनों में स्थिरता आती है। इससे तनाव कम होता है।

