आलू से भी खून की कमी दूर होगी। आगरा में ऐसी किस्म उत्पादित की जाएंगी, जो आयरन और जिंक से भरपूर होंगी।

अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र, पेरू की नई शोध शाखा सींगना में खुलने जा रही है। बुधवार को अंतरराष्ट्रीय आलू बोर्ड के अध्यक्ष सहित 14 देशों के विशेषज्ञों ने सींगना में फार्म का निरीक्षण किया। बोर्ड की अध्यक्ष प्रो. हेलेन हैम्बली ने कहा कि यहां आलू की ऐसी किस्में उत्पादित की जाएंगी जो आयरन और जिंक से भरपूर होंगी। जिसे खाने से खून की कमी (एनीमिया) दूर हो सकेगी।
सींगना स्थित राजकीय आलू बीज उत्पादन फार्म 138 हेक्टेयर में फैला है। यहां 10 हेक्टेयर में आलू पर शोध होंगे। बुधवार को खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अपर मुख्य सचिव बीएल मीणा के साथ बोर्ड सदस्यों ने फार्म का दौरा किया। बोर्ड सदस्यों में पेरू, जापान, सनेगल, जर्मनी, कनाडा, दक्षिणी अफ्रीका, फिलीपीन्स, चिली, ब्राजील, त्रिनिदाद व टोबैगो, अमेरिका, फ्रांस और भारत के 20 सदस्य शामिल रहे।
कृषि मंत्रालय के सहयोग से खुलने वाले इस केंद्र के विषय में अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र, पेरू बोर्ड की अध्यक्ष प्रो. हेलेन हैम्बली ओडेम ने विस्तार से बताया। कहा कि इस केंद्र से आलू की गुणवत्ता युक्त किस्में विकसित होंगी। नए बीज का उत्पादन होगा। बोर्ड के महानिदेशक डाॅ. साइमन हेक ने कहा कि आगरा से भारत के सभी राज्यों में आलू की नई किस्म के बीज भेजे जा सकेंगे।
दक्षिण अफ्रीका से आए डीसेन नेदू ने कहा आलू किसानों की आय बढ़ेगी। प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। अर्थव्यवस्था में योगदान बढ़ेगा। इस दौरान फार्म पर आलू प्रदर्शनी आयोजित की गई। आलू किसानों से विशेषज्ञों ने सीधा संवाद किया। उद्यान निदेशक डाॅ. विजय बहादुर द्विवेदी, उप सचिव विनय कुमार गुप्ता, डाॅ. सर्वेश कुमार, डाॅ. राजीव वर्मा, कौशल कुमार नीरज, डाॅ. धर्मपाल यादव, शीतगृह एसोसिएशन के अध्यक्ष भुवेश अग्रवाल, किसान नेता मोहन सिंह चाहर, पुष्पेंद्र जैन, लाखन सिंह त्यागी आदि मौजूद रहे।
अधिक तापमान में भी होगा आलू उत्पादन
चिली के सदस्य ह्यूगो केम्पास ने कहा कि हम आलू की सैकड़ों किस्में विकसित कर चुके हैं। उत्तर प्रदेश के किसानों की मांग है कि अधिक तापमान में भी आलू का उत्पादन हो। इस तरह की किस्म को विकसित करने में 6 से 7 साल लगेंगे। गर्मी में भी आलू का उत्पादन किया जा सकता है।
चिली के सदस्य ह्यूगो केम्पास ने कहा कि हम आलू की सैकड़ों किस्में विकसित कर चुके हैं। उत्तर प्रदेश के किसानों की मांग है कि अधिक तापमान में भी आलू का उत्पादन हो। इस तरह की किस्म को विकसित करने में 6 से 7 साल लगेंगे। गर्मी में भी आलू का उत्पादन किया जा सकता है।
Author: planetnewsindia
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