
अलीगढ़ ट्रिपल मर्डर केस में आरोपी पारिवारिक झगड़े में पहले आत्महत्या करने चला था। पत्नी ने डिप्रेशन का इलाज कराने के लिए कहा तो हत्या कर दी। आरोपी ने दो परिवार उजाड़ दिए थे।
उस्मिता ने बताया कि जब झगड़े के बीच पिता ने मां की हत्या कर दी तो सात वर्ष का मासूम पिता के पैरों में लिपट गया। लेकिन, उन्होंने मासूम की मिन्नत को भुलाकर उसे भी गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। बाद में पड़ोसन की हत्या की और फिर बेटी को गोली मारकर भाग गया। हालांकि, भीड़ ने दबोच लिया।
थर्राए थे पड़ोसी, मौके पर मिले थे पंद्रह खोखा-कारतूस
इस वारदात के दौरान रुक रुककर फायरिंग से आसपास के पड़ोसी भी थर्रा गए थे। जब पुलिस मौके पर आई और फील्ड यूनिट ने जांच शुरू की तो बेड पर सीमा की लाश पड़ी थी।
मूल रूप से बुलंदशहर कोतवाली देहात के हरतौली के मनोज की शादी लोधा के बरौठ छजमल के विजयपाल सिंह की बेटी सीमा संग 1998 में हुई थी। मनोज के गांव में उसके पिता राजेंद्र पाल सिंह व किसान भाई यशपाल सिंह भी रहते हैं। शादी के बाद दोनों बच्चे हुए।
सीमा ने मायके में झगड़े होने की शिकायत की। उसके बाद अपने मायके में आकर रहने लगी। 2011 में सेवानिवृत्त होने के बाद दंपती में सहमति बनी और वह केवल विहार में चौराहे के पास अपने बहनोई के मकान में परिवार को लेकर किराये पर रहने लगा।
घटना की प्रमुख चश्मदीद गवाह घायल बेटी उस्मिता ने अदालत में जो बयान दिया, उस पर गौर करें तो घटना के समय उसकी उम्र 14 वर्ष थी। वह जीटी रोड के ब्लूबर्ड स्कूल में सातवीं की छात्रा थी। घटना वाले दिन वह दो बजे स्कूल की छुट्टी होने के बाद सवा दो बजे करीब घर आई तो मां-पापा में झगड़ा हो रहा था। इसी दौरान उसके पिता ने अलमीरा से अपनी लाइसेंसी रिवाल्वर व रायफल निकालकर पहले मां की गर्दन व पीठ पर गोली मारकर हत्या की।
वारदात के बाद जब पुलिस फौजी को पकड़कर थाने ले गई और पूछताछ की गई तो उसने अपने बयान में बताया कि वह एक ऐसी बीमारी से ग्रसित है, जिसमें वह खुद को खतरा महसूस करता है। उसे लगता है कि उसे व उसके परिवार को आने वाले समय में कोई नुकसान होगा। इस पर उसकी पत्नी जिद करती थी कि तुम डिप्रेशन में हो, इसका इलाज कराओ। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद वह मेरठ में एक प्रकाशन कंपनी में बतौर गार्ड नौकरी करता था। घटना से तीन दिन पहले भी वह छुट्टी लेकर आया तो उसकी पत्नी ने उपचार का दबाव बनाया। बस इसी बात पर कलह शुरू हुई थी।
इस वारदात का सबसे बड़ा सदमा अगर किसी को है तो वह है उस्मिता। वह अपने जन्म देने वाले पिता से किस कदर नफरत करती है, इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आज तक भाई व मां के कातिल पिता से मिलने जाना तो दूर, उसका जिक्र तक नहीं किया। हां, मां व भाई को जब तब याद कर परेशान हो लेती है। हालांकि अब 23 वर्ष की हो चुकी उस्मिता ने एमबीए करने के बाद बीएड में दाखिला ले लिया है।
फैसले पर मामा ने जताई खुशी, परिवार में खामोशी
मां इस घटना के बाद बीमार हो गईं। बहन की बेटी यानि भांजी को अपनी बेटी की तरह पालकर बड़ा किया है। कई मौकों पर मुकदमे में समझौते के प्रस्ताव आए। मगर उन्होंने हमेशा प्रस्ताव ठुकरा दिए। उनके पास एक बेटा है। अब जरूरत हुई तो हाईकोर्ट भी जाएंगे। हां, शनिवार को कुछ व्यस्तताओं के चलते अदालत नहीं पहुंच पाए थे।
Author: planetnewsindia
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