अलीगढ़ ट्रिपल मर्डर केस: दरिंदगी की इंतहा… बाप के पैरों में लिपट गया था सात साल का मासूम; फिर भी न पसीजा दिल

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अलीगढ़ ट्रिपल मर्डर केस में आरोपी पारिवारिक झगड़े में पहले आत्महत्या करने चला था। पत्नी ने डिप्रेशन का इलाज कराने के लिए कहा तो हत्या कर दी। आरोपी ने दो परिवार उजाड़ दिए थे।

अलीगढ़ के मेलरोज बाईपास की केवल विहार कॉलोनी के जिस मकान के आसपास 12 जुलाई 2014 की दोपहर ढाई बजे सब कुछ सामान्य था। अचानक जिस मकान में फौजी किराये पर रहता था, उससे रुक-रुककर फायरिंग और चीख पुकार की आवाजें आने लगीं। अंदर के खौफनाक मंजर से सब अंजान और हैरान थे।

सात साल का मासूम बेटा बाप के पैरों में लिपटा था, लेकिन उसके सिर पर खून सवार था। उसने बच्चे को भी मार डाला। वारदात के बाद पकड़े जाने पर फौजी मनोज और घायल बेटी उस्मिता ने जो कुछ बताया उसे सुनकर लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई।

उस्मिता ने बताया कि जब झगड़े के बीच पिता ने मां की हत्या कर दी तो सात वर्ष का मासूम पिता के पैरों में लिपट गया। लेकिन, उन्होंने मासूम की मिन्नत को भुलाकर उसे भी गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। बाद में पड़ोसन की हत्या की और फिर बेटी को गोली मारकर भाग गया। हालांकि, भीड़ ने दबोच लिया।

थर्राए थे पड़ोसी, मौके पर मिले थे पंद्रह खोखा-कारतूस
इस वारदात के दौरान रुक रुककर फायरिंग से आसपास के पड़ोसी भी थर्रा गए थे। जब पुलिस मौके पर आई और फील्ड यूनिट ने जांच शुरू की तो बेड पर सीमा की लाश पड़ी थी।

कमरे की देहरी पर पड़ोसन शशिबाला मृत पड़ी थी, जबकि कमरे के अंदर ही बेटा मृत पड़ा था। तीनों के सिर, कनपटी व गर्दन के हिस्सों में गोली लगने के निशान थे। मौके पर एक कोने में रायफल मिली थी। रिवाल्वर जमीन पर पड़ी थी। साथ में पंद्रह खोखा-कारतूस पड़े मिले थे।
ऐसे उजड़े थे दो परिवार
मूल रूप से बुलंदशहर कोतवाली देहात के हरतौली के मनोज की शादी लोधा के बरौठ छजमल के विजयपाल सिंह की बेटी सीमा संग 1998 में हुई थी। मनोज के गांव में उसके पिता राजेंद्र पाल सिंह व किसान भाई यशपाल सिंह भी रहते हैं। शादी के बाद दोनों बच्चे हुए।

सीमा ने मायके में झगड़े होने की शिकायत की। उसके बाद अपने मायके में आकर रहने लगी। 2011 में सेवानिवृत्त होने के बाद दंपती में सहमति बनी और वह केवल विहार में चौराहे के पास अपने बहनोई के मकान में परिवार को लेकर किराये पर रहने लगा।

बहनोई परिवार सहित गाजियाबाद में रहते हैं। बेटी ब्लूबर्ड स्कूल में तो बेटा ओएलएफ में तीसरी कक्षा में पढ़ता था। इसी मकान में खैर के गांव मऊ निवासी केपी सिंह अपनी पत्नी शशिबाला संग किराये पर रहते थे। शशिबाला पहले से पांच वर्ष के बेटे निशांत की मां थी, जबकि हत्या से तीन माह पहले भी उसने एक बेटे को जन्म दिया था। जिनके सिर से मां का साया इस घटना में छिना था।
शराब पीकर पत्नी और बच्चों को पीटता था
घटना की प्रमुख चश्मदीद गवाह घायल बेटी उस्मिता ने अदालत में जो बयान दिया, उस पर गौर करें तो घटना के समय उसकी उम्र 14 वर्ष थी। वह जीटी रोड के ब्लूबर्ड स्कूल में सातवीं की छात्रा थी। घटना वाले दिन वह दो बजे स्कूल की छुट्टी होने के बाद सवा दो बजे करीब घर आई तो मां-पापा में झगड़ा हो रहा था। इसी दौरान उसके पिता ने अलमीरा से अपनी लाइसेंसी रिवाल्वर व रायफल निकालकर पहले मां की गर्दन व पीठ पर गोली मारकर हत्या की।
फायर की आवाज सुन पड़ोस में रहने वाली किरायेदार आंटी शशिबाला बचाने आईं तो उनकी भी सिर में गोली मारकर हत्या कर दी। इसी बीच दूसरे कमरे में खेल रहा छोटा भाई मानवेंद्र आकर पापा के पैरों में लिपटा तो उसके भी सिर में गोली मारकर हत्या कर दी। फिर वह घर से बाहर बचने के लिए भागी तो उसे भी गोली मार दी, जिससे वह घायल होकर वहीं नल के पास गिर पड़ी।
इसके बाद पापा हथियारों को लेकर भागे तो उन्हें भीड़ ने पकड़ लिया। क्रास पूछताछ में बच्ची ने स्वीकारा कि पापा आए दिन शराब पीकर आते थे और मां से झगड़ा करते थे। मां के साथ हम दोनों बच्चों को भी पीटते थे।
डिप्रेशन में था मनोज, पत्नी ने इलाज के लिए कहा तो कर दी हत्या
वारदात के बाद जब पुलिस फौजी को पकड़कर थाने ले गई और पूछताछ की गई तो उसने अपने बयान में बताया कि वह एक ऐसी बीमारी से ग्रसित है, जिसमें वह खुद को खतरा महसूस करता है। उसे लगता है कि उसे व उसके परिवार को आने वाले समय में कोई नुकसान होगा। इस पर उसकी पत्नी जिद करती थी कि तुम डिप्रेशन में हो, इसका इलाज कराओ। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद वह मेरठ में एक प्रकाशन कंपनी में बतौर गार्ड नौकरी करता था। घटना से तीन दिन पहले भी वह छुट्टी लेकर आया तो उसकी पत्नी ने उपचार का दबाव बनाया। बस इसी बात पर कलह शुरू हुई थी।
वह अपनी रिवाल्वर लेकर खुद आत्महत्या करने के लिए बाथरूम में बंद हो गया। पत्नी ने उसे बाहर निकाल लिया तो गुस्से में उसने पहले पत्नी को बेड के सहारे खड़े होते ही गोली मारी। पहली गोली में वह बची तो दूसरी गोली मारी। फिर किरायेदार पड़ोसन, बेटा व बेटी को गोली मारी। यह करने पर उसने यही सोचा था कि अगर वह मर गया तो इनका जीवन कैसे चलेगा? इसके बाद वह खुद अपनी जान देने के लिए भागा। मगर भीड़ ने पकड़ लिया।
आज तक पिता से मिलने नहीं गई बेटी
इस वारदात का सबसे बड़ा सदमा अगर किसी को है तो वह है उस्मिता। वह अपने जन्म देने वाले पिता से किस कदर नफरत करती है, इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आज तक भाई व मां के कातिल पिता से मिलने जाना तो दूर, उसका जिक्र तक नहीं किया। हां, मां व भाई को जब तब याद कर परेशान हो लेती है। हालांकि अब 23 वर्ष की हो चुकी उस्मिता ने एमबीए करने के बाद बीएड में दाखिला ले लिया है।
वारदात के बाद से लेकर अब तक का जीवन ननिहाल में मामा दिलीप सिंह के घर बीत रहा है। वही उसके अभिभावक हैं। फैसले को लेकर उससे बात करने का प्रयास किया गया। मगर परिजनों ने भावनात्मक कारणों से बात कराने से इंकार कर दिया। बता दें कि जब वह अस्पताल में भरती थी और गोली लगने से जबड़े में आई चोट का ऑपरेशन हुआ, तब करीब एक माह बाद छुट्टी मिलने पर जब घर ले जाया गया। तब भी उसने पिता से मुलाकात के लिए इंकार कर दिया था।

फैसले पर मामा ने जताई खुशी, परिवार में खामोशी

इस फैसले को लेकर जब वादी मुकदमा उस्मिता के मामा दिलीप सिंह से उनके साईं विहार सारसौल बन्नादेवी आवास पर बात हुई तो वे खुश नजर आए। कहा कि बहन व भांजे को वापस तो नहीं ला सकते। मगर अदालत ने जो फैसला सुनाया है, वह स्वागत योग्य है और न्यायाधीश बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि वे मुकदमे की पैरवी करते रहे।

मां इस घटना के बाद बीमार हो गईं। बहन की बेटी यानि भांजी को अपनी बेटी की तरह पालकर बड़ा किया है। कई मौकों पर मुकदमे में समझौते के प्रस्ताव आए। मगर उन्होंने हमेशा प्रस्ताव ठुकरा दिए। उनके पास एक बेटा है। अब जरूरत हुई तो हाईकोर्ट भी जाएंगे। हां, शनिवार को कुछ व्यस्तताओं के चलते अदालत नहीं पहुंच पाए थे।

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Author: planetnewsindia

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