गुरुवार की देर शाम इस काव्य निशा में विभिन्न शहरों के कई जाने-माने कवि और शायर शामिल हुए। उन्होंने अपनी रचनाओं से श्रोताओं का मन मोह लिया। डॉ. मुजीब शहजर ने अपनी कविता में गंगा-जमुनी तहजीब की बात कही।
उन्होंने पढ़ाकृष्दिलों में प्यार की खुशबू बसा कर देखना तुम, वतन की खाक को माथे लगा कर देखना तुम। मिलेगा चैन रूह को तुम्हारे इस जहाँ में, कभी नफरत की ये दीवारें गिरा कर देखना तुम। वहीं, श्री मनोज नागर ने देशप्रेम और मौजूदा मुद्दों पर अपनी कविता सुनाई। उन्होंने पढ़ा सच्चाई की राहों पर जो चलते हैं दीवाने, वही इतिहास रचते हैं जमाने में पुराने। झुकती है दुनिया उनके ही कदमों में हमेशा, जो मर मिटते हैं अपने देश के ताने-बाने। इनके अलावा श्री दौलत राम शर्मा, श्री फराज मुजीब, श्री मुजतर जलेसरी, श्री शरीफ खाँ सामिर, श्री चचा उदयभानी, श्री सुधांसु गोस्वामी, श्री प्रदीप चैहान और श्री अशरफ तौमर ने भी अपनी कविताएं, गीत और गजलें पेश कीं। श्रोताओं ने उनकी प्रस्तुतियों को पसंद किया। कार्यक्रम श्री विनोद कुमार जैसवाल की देखरेख में हुआ। इसमें मुख्य अतिथि डॉ. उमा सिंह और विशिष्ट अतिथि श्री सरवर पटियालवी शामिल हुए। अतिथियों ने श्रीमती पुष्पा देवी जैसवाल के चित्र पर फूल चढ़ाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम को सफल बनाने में संयोजक नसीर नादान और सह-संयोजक धर्मेंद्र यदुवंशी का खास सहयोग रहा।

