पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 की बैंक फॉलो-अप टीम की प्रभावी कार्रवाई और बैंकिंग चैनलों के साथ समन्वय की सराहना की। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध के मामलों में समय सबसे महत्वपूर्ण है।

हरियाणा पुलिस की साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 की त्वरित कार्रवाई से एक बड़े साइबर फ्रॉड में ठगी की एक करोड़ रुपये की पूरी राशि जालसाजों के हाथों में जाने से सुरक्षित बचा ली गई।
जालसाजों ने ‘बॉस स्कैम’ का इस्तेमाल कर करनाल के एक ज्वेलरी शोरूम के कर्मचारियों को धोखा दिया था। पीड़ित पक्ष ने समय रहते 1930 पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद बैंक फॉलो-अप टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरी रकम सुरक्षित करा ली।
पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 की बैंक फॉलो-अप टीम की प्रभावी कार्रवाई और बैंकिंग चैनलों के साथ समन्वय की सराहना की। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध के मामलों में समय सबसे महत्वपूर्ण है। शुरुआती स्तर पर की गई कार्रवाई से ठगी की राशि को सुरक्षित कराने में मदद मिलती है। उन्होंने आमजन से अपील की कि साइबर फ्रॉड की स्थिति में तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
कैसे हुआ ‘बॉस स्कैम’
पुलिस अधीक्षक साइबर मयंक गुप्ता ने बताया कि 15 सितंबर 2026 को शाम 7:48 बजे ममता बंसल ने 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। ममता और उनके पति विकास का करनाल में ज्वेलरी शोरूम है। शोरूम के कर्मचारियों को एक व्हाट्सऐप नंबर से संदेश मिला, जिस पर मालिक विकास का नाम और फोटो लगी थी। संदेश में कर्मचारियों को एक करोड़ रुपये एक बैंक खाते में ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए। कर्मचारियों ने इसे वास्तविक समझकर आरटीजीएस के माध्यम से राशि ट्रांसफर कर दी।
पुलिस अधीक्षक साइबर मयंक गुप्ता ने बताया कि 15 सितंबर 2026 को शाम 7:48 बजे ममता बंसल ने 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। ममता और उनके पति विकास का करनाल में ज्वेलरी शोरूम है। शोरूम के कर्मचारियों को एक व्हाट्सऐप नंबर से संदेश मिला, जिस पर मालिक विकास का नाम और फोटो लगी थी। संदेश में कर्मचारियों को एक करोड़ रुपये एक बैंक खाते में ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए। कर्मचारियों ने इसे वास्तविक समझकर आरटीजीएस के माध्यम से राशि ट्रांसफर कर दी।
शाम करीब 5:56 बजे ममता बंसल को खाते से एक करोड़ रुपये कटने का एसएमएस मिला। उन्होंने तुरंत शोरूम में फोन कर जानकारी ली, तब पता चला कि मालिक ने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया था। इसके बाद साइबर अपराधियों द्वारा फर्जी व्हाट्सऐप नंबर का इस्तेमाल कर कर्मचारियों को भ्रमित करने का खुलासा हुआ। हरियाणा पुलिस ने अपील की है कि केवल व्हाट्सऐप पर नाम और डीपी देखकर भरोसा न करें। बड़ी रकम ट्रांसफर करने से पहले संबंधित अधिकारी या मालिक के आधिकारिक नंबर पर कॉल कर पुष्टि अवश्य करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या साइबर फ्रॉड की स्थिति में तुरंत 1930 पर कॉल करना चाहिए।