जस्टिस आलोक जैन ने कहा कि याचिकाकर्ता कथित खतरे के संबंध में कोई ठोस और विशिष्ट आधार प्रस्तुत नहीं कर सके। अदालत ने टिप्पणी की कि याचिका कानूनी प्रक्रिया की आड़ में संबंध को ढकने का प्रयास प्रतीत होती है।

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आठ बच्चों के अभिभावक एक विवाहित महिला और पुरुष की ओर से दायर सुरक्षा याचिका खारिज कर दी है। दोनों अलग-अलग लोगों से पहले से विवाहित हैं। महिला के 6 तो वहीं पुरुष के 2 बच्चे मौजूद हैं। दोनों ने परिवार की ओर से खतरा बताते हुए साथ रहने और अपने जीवन व स्वतंत्रता की रक्षा के लिए पुलिस सुरक्षा की मांग की थी।
केवल सामान्य और अस्पष्ट आरोपों के आधार पर पुलिस सुरक्षा का आदेश नहीं दिया जा सकता। अदालत ने माना कि मौजूदा मामले में ऐसा कोई ठोस खतरा सामने नहीं आया है। साथ ही कहा कि मांगी गई सुरक्षा देने से पूरे सामाजिक ताने-बाने पर असर पड़ सकता है। हाईकोर्ट ने कहा कि हम उन जीवनसाथियों व बच्चों के प्रति मुंह नहीं मोड़ सकते जिन्हें याचिकाकर्ताओं के कृत्य के कारण समाज का सामना करना पड़ेगा।