विधायक मोहम्मद इलियास ने कांग्रेस की सदस्यता नहीं छोड़ी है। बेटे जावेद ने भाजपा का दामन थाम लिया है। मुख्यमंत्री की रैली से पहले इस्तीफे की चर्चाएं तेज थीं। इलियास की गैरमौजूदगी ने सियासी मायने बदले हैं।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की पुन्हाना में आयोजित मेवात विकास संकल्प रैली ने जहां विकास और राजनीतिक संदेश दिए। वहीं कांग्रेस से निलंबित विधायक मोहम्मद इलियास ने विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा न देकर क्षेत्र में संभावित उपचुनाव की सभी अटकलों पर फिलहाल विराम लगा दिया। हालांकि उनके बेटे जोवद अहमद ने भाजपा की सदस्यता मुख्यमंत्री की मौजूदगी में स्वीकार की। बता दें कि रैली के मुख्य आयोजक उनके पुत्र जावेद ही थे।
पिछले कई दिनों से यह चर्चा जोरों पर थी कि मोहम्मद इलियास भाजपा का दामन थाम सकते हैं और उनके इस्तीफे के बाद पुन्हाना विधानसभा सीट पर उपचुनाव हो सकता है। इसी संभावना को देखते हुए कई राजनीतिक नेता भी चुनावी तैयारियों में जुटे हुए थे। हालांकि शनिवार को हुए घटनाक्रम ने सियासी तस्वीर बदल दी।
मुख्यमंत्री की रैली में स्वयं मोहम्मद इलियास नहीं पहुंचे। रैली के मंच से जावेद ने औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ग्रहण की और मुख्यमंत्री के समक्ष क्षेत्र की विकास संबंधी कई मांगें रखीं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी अपने संबोधन में कई बार जावेद का नाम लेते हुए मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया और दर्जनों विकास परियोजनाओं की घोषणाएं कीं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रैली के बाद जावेद का भाजपा में राजनीतिक कद काफी बढ़ा है। मुख्यमंत्री द्वारा उनकी मांगों को महत्व देने और मंच से बार-बार उनका उल्लेख किए जाने को भाजपा नेतृत्व के भरोसे के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
दूसरी ओर, मोहम्मद इलियास के इस्तीफा न देने और रैली से दूरी बनाए रखने से यह स्पष्ट हो गया कि उन्होंने फिलहाल अपनी विधानसभा सदस्यता बरकरार रखने का फैसला किया है। इससे पुन्हाना विधानसभा में संभावित उपचुनाव की चर्चाओं पर तत्काल विराम लग गया है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मेवात विकास संकल्प रैली ने केवल विकास की घोषणाएं ही नहीं दीं, बल्कि पुन्हाना की राजनीति के समीकरण भी बदल दिए। रैली के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जावेद का कई बार नाम लेकर संबोधन किया और उनके द्वारा रखी गई अनेक मांगों को स्वीकार करते हुए करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं की घोषणा की।
इसे भाजपा नेतृत्व द्वारा जावेद को राजनीतिक महत्व दिए जाने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि जावेद की एंट्री से पुन्हाना में भाजपा को एक प्रभावशाली मुस्लिम चेहरा मिला है, जिससे पार्टी का सामाजिक और राजनीतिक समीकरण बदल सकता है।




