पंजाब में बढ़ रहे बुजुर्ग: घट रही जन्म दर, 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की हिस्सेदारी 11.5 फीसदी पहुंची

Picture of Farheen

Farheen

SHARE:

बुजुर्ग आबादी के मामले में पंजाब देश में चौथे स्थान पर है। 15.1 फीसदी के साथ केरल पहले, 14.2 फीसदी के साथ तमिलनाडु दूसरे और 13 फीसदी के साथ हिमाचल प्रदेश तीसरे स्थान पर है।

Rising Elderly Population in Punjab Birth Rate Declining Share of 60+ Age Group Reaches 11.5%

पंजाब की जनसंख्या संरचना में तेजी से बदलाव आ रहा है। राज्य में बच्चों और युवाओं की आबादी घट रही है जबकि बुजुर्गों की संख्या लगातार बढ़ रही है। केंद्र सरकार की नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) की रिपोर्ट में यह तस्वीर सामने आई है।

रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में 0-14 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी केवल 19.2 फीसदी है जो राष्ट्रीय औसत 24 फीसदी से काफी कम है। पड़ोसी राज्यों की तुलना में भी पंजाब पीछे है। हरियाणा में यह आंकड़ा 24.4 फीसदी और हिमाचल प्रदेश में 20.4 फीसदी है। इसी तरह 0-4 वर्ष आयु वर्ग की आबादी पंजाब में केवल छह फीसदी है जबकि राष्ट्रीय औसत 7.9 फीसदी है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 6.2 फीसदी और शहरी क्षेत्रों में 5.7 फीसदी है।

राज्य में कामकाजी आयु वर्ग (15-59 वर्ष) की हिस्सेदारी 69.3 फीसदी है जो राष्ट्रीय औसत 66.4 फीसदी से अधिक है। वहीं 60 वर्ष और इससे अधिक आयु वर्ग की आबादी 11.5 फीसदी तक पहुंच गई है जबकि राष्ट्रीय औसत 9.7 फीसदी है। ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्गों की हिस्सेदारी 12.2 फीसदी और शहरी क्षेत्रों में 10.7 फीसदी है।

लगातार घट रही जन्म दर

बच्चों और युवाओं की आबादी घटने का प्रमुख कारण जन्म दर में लगातार आ रही कमी है। पंजाब में वर्ष 2012-14 के दौरान जन्म दर 15.7 थी जो 2022-24 में घटकर 13.9 रह गई है। यह राष्ट्रीय औसत 18.6 से काफी कम है। पड़ोसी राज्यों में हरियाणा की जन्म दर 18.8 और हिमाचल प्रदेश की 14.2 दर्ज की गई है।

युवाओं का पलायन बढ़ा रहा भविष्य की चिंता

विशेषज्ञों के अनुसार बुजुर्ग आबादी बढ़ने से आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ेगा। वहीं पंजाब से हर साल बड़ी संख्या में युवा विदेश जा रहे हैं। अनुमान के अनुसार डेढ़ से दो लाख युवा प्रतिवर्ष विदेशों का रुख करते हैं और इनमें से अधिकांश वापस नहीं लौटते। इससे भविष्य में राज्य को कुशल और उत्पादक कार्यबल की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

प्रदेश में पिछले कुछ समय से जन्म दर लगातार कम हो रही है। अब लोग एक या दो बच्चों को ही प्राथमिकता दे रहे हैं। दूसरी ओर लोगों की औसत जीवन प्रत्याशा बढ़ रही है। यही कारण है कि बच्चों और युवाओं की आबादी घट रही है जबकि बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है। – प्रो. रविंद्र खैवाल, सामुदायिक चिकित्सा विभाग, पीजीआई

Farheen
Author: Farheen

सबसे ज्यादा पड़ गई