दशकों पुराना तीस्ता जल विवाद सुलझेगा?: बंगाल में BJP की जीत से गदगद हुआ बांग्लादेश, ममता पर लगाए कई गंभीर आरोप

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पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत पर बांग्लादेश की सत्ताधारी बीएनपी ने बेहद खुशी जताई है। बीएनपी नेता अजीजुल बारी हेलाल ने शुभेंदु अधिकारी को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि अब दशकों पुराना तीस्ता जल बंटवारा विवाद सुलझ जाएगा। बीएनपी ने पिछली ममता सरकार को इस समझौते में बड़ी बाधा बताया है।

Bangladeshs ruling BNP hails BJP's historic West Bengal win optimistic over Teesta water distribution

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ऐतिहासिक जीत का असर अब सीमाओं के पार भी दिखने लगा है। इस बड़ी चुनावी जीत ने क्षेत्रीय कूटनीति और राजनीति में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत दिया है। बांग्लादेश की सत्ताधारी ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ (बीएनपी) ने पश्चिम बंगाल में शानदार जीत दर्ज करने पर भाजपा को औपचारिक रूप से अपनी बधाई दी है। यह सिर्फ एक चुनावी जीत की बधाई नहीं है, बल्कि इससे दोनों देशों के बीच दशकों पुराने जल विवादों के जल्द सुलझने की एक नई और मजबूत उम्मीद भी जगी है।

बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी बीएनपी के सूचना सचिव अजीजुल बारी हेलाल ने पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा के शानदार प्रदर्शन की जमकर तारीफ की है। हेलाल ने कहा कि वह विजेता पार्टी भाजपा और शुभेंदु अधिकारी को बधाई देते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा की यह जीत सुनिश्चित करेगी कि पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश सरकार के बीच संबंध पहले की तरह ही अच्छे और मजबूत बने रहें। बीएनपी की इस प्रतिक्रिया ने ढाका और कोलकाता के बीच लंबे समय से चल रहे सीमा पार विवादों को लेकर कूटनीतिक उम्मीद का एक दुर्लभ और सकारात्मक क्षण पेश किया है। उनका मानना है कि यह सत्ता परिवर्तन दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने के साथ-साथ काफी बेहतर बनाएगा।

ममता के सत्ता से हटने पर सुलझेगा तीस्ता जल विवाद?
बीएनपी के इस पूरे बयान में सबसे अहम बात तीस्ता जल बंटवारा संधि को लेकर कही गई है, जो पिछले एक दशक से अधिक समय से अधर में लटकी हुई है। बीएनपी के नेता हेलाल ने सीधे तौर पर निवर्तमान तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व और विशेषकर ममता बनर्जी को इस समझौते में सबसे बड़ी बाधा बताया है।

बीएनपी का दावा है कि ममता बनर्जी का पिछला प्रशासन ही तीस्ता बैराज समझौते में रुकावट डाल रहा था। पार्टी को पूरी उम्मीद है कि अब चूंकि पश्चिम बंगाल की सत्ता शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा के हाथ में आ गई है, इसलिए राज्य सरकार इस संधि को अंतिम रूप देने के लिए मोदी प्रशासन के साथ मिलकर काम करेगी। हेलाल ने स्पष्ट कहा कि तृणमूल कांग्रेस की जगह भाजपा के सत्ता में आने से अब तीस्ता बैराज परियोजना को जरूर लागू किया जाएगा।

नदियों के पानी को लेकर क्या है पुराना विवाद?
भारत और बांग्लादेश आपस में कुल 54 नदियां साझा करते हैं, लेकिन अभी तक दोनों देशों के बीच केवल दो ही जल संधियां (गंगा जल संधि और कुशियारा नदी संधि) हो पाई हैं। साल 1996 की गंगा जल संधि सूखे के मौसम में फरक्का बैराज पर पानी के बंटवारे को नियंत्रित करती है, लेकिन बांग्लादेश अक्सर आरोप लगाता है कि सूखे के महीनों में भारत कम पानी छोड़ता है, जिससे उनकी खेती और आजीविका पर बुरा असर पड़ता है।

तीस्ता नदी के पानी को लेकर 1983 में एक अस्थायी समझौता हुआ था, जिसमें बांग्लादेश को 36 प्रतिशत और भारत को 39 प्रतिशत पानी दिया गया था, लेकिन यह कभी पूरी तरह लागू नहीं हुआ। साल 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बांग्लादेश यात्रा के दौरान तीस्ता का 37.5 प्रतिशत पानी बांग्लादेश और 42.5 प्रतिशत पानी भारत को देने का प्रस्ताव था। हालांकि, तब पश्चिम बंगाल सरकार ने अपने कृषि हितों का हवाला देते हुए इसका कड़ा विरोध किया था, जिसके कारण समझौता लंबित रह गया।

बीएनपी और भाजपा कैसे आएंगे एक साथ?
इस महत्वपूर्ण सवाल पर बीएनपी नेता हेलाल ने स्पष्ट किया कि भले ही केंद्र-दक्षिणपंथी बीएनपी और भाजपा के बीच स्पष्ट वैचारिक अंतर है, लेकिन राष्ट्रीय हित हमेशा पार्टी के सिद्धांतों से ऊपर होते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं और वैचारिक रूप से अलग होने के बावजूद हम कुछ राष्ट्रीय मुद्दों पर पूरी तरह से एकजुट हैं।

तीस्ता बैराज और भारत-बांग्लादेश के बीच सामान्य रिश्ते ऐसे ही अहम मुद्दे हैं जहां दोनों पक्षों की राय एक है। हेलाल ने पूरी उम्मीद जताते हुए कहा कि वैचारिक अलगाव के बाद भी हम मुद्दों के आधार पर एक साथ हैं और पश्चिम बंगाल में नई सरकार आने से हमारे आपसी संबंधों में और भी ज्यादा तेजी देखने को मिलेगी।

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Author: ILMA NEWSINDIA

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