UP: ज्यादा उत्पादन और दूसरे राज्यों में कम मांग से किसान परेशान, दम तोड़ रहीं आलू किसानों की ख्वाहिशें

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आलू का किसान बेजार है। उसकी ख्वाहिशें दम तोड़ रही हैं। कोल्ड स्टोर भरे हुए हैं फिर भी जगह-जगह आलू के ढेर लगे हुए हैं। किसी किसान के मकान की छत की ढलाई रुकी है तो किसी को बच्चे की फीस के लिए कर्जा लेना पड़ेगा। आलू बेल्ट में उसकी बेकद्री दिख रही है।

Yogi government is preparing to give a big gift to potato farmers the crop  will not have to be kept in cold storage आलू किसानों को बड़ी सौगात देने की  तैयारी में योगी सरकार, कोल्ड स्टोरेज में नहीं रखनी होगी फसल, Uttar-pradesh  Hindi News - Hindustan

सब्जी का राजा आलू बेजार है। इसने किसानों के सपनों को चकनाचूर कर दिया है। आलू को खरा सोना मानने वाले किसान सिसक रहे हैं। उनकी ख्वाहिशें दम तोड़ रही हैं। किसी के मकान की छत की ढलाई रुकी है तो किसी को बच्चे की फीस के लिए कर्जा लेना पड़ेगा। आलू बेल्ट में उसकी बेकद्री दिख रही है। आलम यह है कि कहीं खुले खेत में पड़ा है तो कहीं स्टोर के बाहर धूप में गंध फैला रहा है।

हरदोई के रास्ते हम रामगंगा के कछार में पहुंचे। यहां आलू की खोदाई हो चुकी है। मक्के की फसल लहलहा रही है। जैनापुर में मिले किसान शिवबरन सिंह आलू का नाम लेते ही चुप रहने की सलाह देते हैं। घर के सामने खेत में आलू का ढेर दिखाते हैं। कहते हैं कि कोल्ड स्टोर में जगह नहीं है। मंडी में कीमत तीन से पांच सौ रुपये क्विंटल है। खर्चा अलग से लगेगा। इसी के दम पर मकान की छत ढलवाने का सपना था, जो टूट गया है। कुछ ऐसी ही कहानी मोहम्मदाबाद के आसपास के गांवों के किसानों की भी है। नगला रायसिंह के किसान आरके यादव कहते हैं कि कोल्ड स्टोर भर गया है। बचा आलू खेत में है। ट्रैक्टर ट्राली से हर दिन सातनपुर मंडी भेज रहे हैं। लागत नहीं निकल रही है। मजदूरी और डीजल का खर्च अलग है। कन्नौज के समधन में मिले मो. अदीब का भी यही दर्द है।

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बताते हैं कि बेटा अलीगढ़ में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है। आलू ने धोखा दे दिया। अब फीस जमा करने के लिए कर्जा लेना पड़ेगा। कन्नौज के तिर्वा में सड़क किनारे बाग में भी आलू भरे बोरे पड़े हैं। यहां मिले पल्लेदारों ने बताया कि छाया होने की वजह से किसानों ने यहां रखवाया है। जिन दिन भाव अच्छा रहता है, उस दिन मंडी भेजा जाता है। फर्रुखाबाद से लेकर फिरोजाबाद तक के कोल्ड स्टोर भर गए हैं।

यहां पड़ा है आलू: आलू बेल्ट के रूप में पहचाने जाने वाले कन्नौज, फर्रुखाबाद, इटावा, औरैया, फिरोजाबाद, मैनपुरी, मथुरा आगरा, अलीगढ़, हाथरस सहित आसपास के जिलों में करीब 2363 कोल्ड स्टोर हैं। यहां 172 लाख मीट्रिक टन आलू स्टोर किया गया है। बचा आलू खेत से अब मंडी में भेजा जा रहा है। भरपूर पैदावार होने की वजह से भाव नहीं मिल रहा है। ऐसे में किसान औने पौने दाम पर बेचने के लिए विवश है। 

लागत और बिक्री मूल्य में अंतर

प्रगतिशील आलू किसान सुधीर शुक्ला बताते हैं कि प्रति बीघा 12 से 15 हजार लागत आती है। खुदाई, बोरी की पैकिंग, मंडी तक बुलाई आदि पर ढाई से तीन हजार खर्च हो जाता है। औसत पैदावार 30 क्विंटल मान लें तो अधिकतम 12 हजार मिलेगा। ऐसे में घाटा ही हुआ। सातनपुर में खुले क्रय केंद्र में 650 रुपये क्विंटल मूल्य है, मानक कड़े हैं। यहां बेचने पर भी घाटा है।

आलू पाउडर प्रसंस्करण लगे तो मिले फायदा
कोल्ड स्टोर संचालक प्रवीन कटियार बताते हैं कि बंपर पैदावार और दूसरे राज्यों में निर्यात न होने से समस्या बढ़ी है। पश्चिम बंगाल, आसाम आलू भेजा जाता तो फायदा मिलता। आलू पाउडर प्रसंस्करण फैक्टरी लगाने की मांग की जा रही है, लेकिन अभी काम नहीं हो रहा है।

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Author: ILMA NEWSINDIA

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