खूनी’ थकान: “साहब, गाड़ी बदलकर चलाना”, ड्राइवर की चेतावनी हुई सच, दबिश से पहले बिछीं लाशें, ऐसा था नूंह हादसा

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Orai News: उरई के मंडी चौकी प्रभारी मोहित यादव की हरियाणा में दबिश के दौरान सड़क हादसे में मौत हो गई, जिससे पूरे पुलिस महकमे में मातम है। एक भाई की अपने अपहृत भाई को बचाने की पुकार पर निकले मोहित यादव खुद हादसे का शिकार हो गए। चालक की थकान को हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है।

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उरई की मंडी चौकी में तैनात उपनिरीक्षक मोहित यादव की सड़क हादसे में हुई मौत से पुलिस महकमे में शोक की लहर है। उपनिरीक्षक अनिल कुमार ने बताया कि हादसे वाली रात करीब 3 बजे तक मोहित यादव ने उनके साथ क्षेत्र में गश्त की थी। इसके बाद वह एक मामले में दबिश देने के लिए हरियाणा रवाना हो गए थे। गश्त के दौरान वह पूरी तरह सामान्य थे। साथियों के साथ बातचीत कर रहे थे और ड्यूटी को लेकर पूरी तरह सतर्क थे। साथी बताते हैं कि मोहित यादव ड्यूटी के दौरान अनावश्यक तनाव नहीं लेते थे।

हमेशा अपने स्टाफ का ख्याल रखते थे। यही वजह है कि उनकी मौत की खबर ने पूरे चौकी स्टाफ को भीतर तक झकझोर दिया। करीब तीन माह पहले ही उनकी यहां तैनाती हुई थी, लेकिन कम समय में ही उन्होंने अपने व्यवहार और कार्यशैली से साथियों के बीच खास पहचान बना ली थी। इसके अलावा मौजूदा समय में चौकी पर दरोगा अनिल कुमार, सिपाही ललित, अनुज कुमार, गौतम बाबू और कोमल सोलंकी भी तैनात हैं। सभी साथी उनकी असमय मौत से गहरे सदमे में हैं।

साहब जल्दी चलो..भाई को बचाने की गुहार
साहब जल्दी चलो, कहीं वह हमारे भाई के साथ अनहोनी न कर दें। सोमवार की सुबह कार सवार लोग बिजेंदर को खेत से उठा ले गए। इस पर अमरीक ने कोतवाली पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज कराई। जब अधिक समय बीतने के बाद भी उसका कहीं कोई पता नहीं चला तो अमरीक ने फोन किया और कहा कि साहब जल्दी चलो कहीं वह (आरोपी) उसके भाई के साथ अनहोनी न कर दें। पुलिस की मानें, तो बिजेंदर का हरियाणा में जमीन को लेकर विवाद चल रहा था और वही लोग उन्हें यहां से उठाकर ले गए थे। इस पर इसकी कमान मोहित यादव को सौंपी गई, क्योंकि वह एसओजी में भी रहे हैं, वह टीम के साथ तीन बजे निकल गए और वह आरोपियों के पास पहुंच भी नहीं पाए थे कि हादसा हो गया।

सुबह 11 बजे फोन बजा और कोतवाली में छा गया सन्नाटा
मंगलवार सुबह करीब 11 बजे जैसे ही कोतवाली में फोन की घंटी बजी, किसी को अंदाजा नहीं था कि यह कॉल इतना दुखद समाचार लेकर आएगी। फोन पर मिली सूचना ने पूरे थाने का माहौल बदल दिया। सड़क हादसे में उपनिरीक्षक मोहित यादव व साथियों की मौत की खबर सुनते ही कोतवाली में सन्नाटा छा गया। साथी पुलिसकर्मी स्तब्ध रह गए। जो अधिकारी कुछ घंटे पहले तक उनके साथ ड्यूटी कर रहा था, उसके अचानक चले जाने की खबर ने सभी को गहरे सदमे में डाल दिया।

ड्राइवर ने दी थी हिदायत: साहब, गाड़ी बदल-बदल कर चलाना
हरियाणा के लिए निकली पुलिस टीम के सफर के दौरान चालक ने पहले ही थकान को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी थी। बताया गया कि अमरीक के ड्राइवर लल्ली ने जाने से पूर्व पुलिस कर्मियों से कहा था कि साहब गाड़ी बदल-बदल कर चलाना, वह (अमरीक) ज्यादा देर तक नहीं चला पाते हैं। लेकिन लंबा सफर और जल्द पहुंचने की जल्दबाजी ने हालात बिगाड़ दिए। आशंका जताई जा रही है कि थकान के कारण ही वाहन चालक से चूक हुई और यह हादसा हो गया। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि लंबी दूरी की यात्रा में थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।

डीजीपी ने जताई संवेदना
हरियाणा में दबिश देने गई जालौन की पुलिस टीम के चार कर्मियों की मौत के बाद हर कोई दुखी हैं। घटना को लेकर मंगलवार की शाम 3:23 बजे डीजीपी राजीव कृष्ण ने (एक्स) पर संवेदना व्यक्त किया उन्होंने लिखा कि कर्तव्य पालन के दौरान हरियाणा में घटित दुर्भाग्यपूर्ण सड़क दुर्घटना में जनपद जालौन पुलिस के चार कर्मियों उप निरीक्षक सत्यभान सिंह, उप निरीक्षक मोहित कुमार यादव, आरक्षी प्रदीप कुमार व आरक्षी अशोक कुमार के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद एवं हृदयविदारक है। उत्तर प्रदेश पुलिस परिवार अपने कर्तव्यनिष्ठ साथियों के असामयिक निधन से शोकाकुल है। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिजनों को यह असहनीय दुःख सहन करने की शक्ति दें।

सात फेरों का साथ दो महीने भी न निभ सका, हादसे ने उजाड़ दी मयूरी की जिंदगी
अभी शादी के रंग भी फीके नहीं पड़े थे कि एक दर्दनाक हादसे ने मयूरी वर्मा की जिंदगी से सारी खुशियां छीन लीं। सर्विलांस सिपाही प्रदीप, जिन्होंने 24 फरवरी को मयूरी के साथ अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए थे, महज दो महीने 11 दिन बाद ही इस दुनिया को छोड़ गए। प्रदीप की ससुराल कोंच नगर के मालवीय नगर में है। जैसे ही सड़क हादसे में उनकी मौत की खबर ससुराल पहुंची, वहां कोहराम मच गया। हर तरफ चीख-पुकार गूंज उठी और देखते ही देखते मोहल्ले में लोगों की भीड़ जमा हो गई। जिस मयूरी को कुछ समय पहले हंसी-खुशी विदा किया गया था, उसकी इतनी जल्दी मांग सूनी हो जाएगी, यह किसी ने नहीं सोचा था। परिजनों और मोहल्ले के लोगों की आंखें नम थीं और हर कोई इस असमय टूटे रिश्ते को याद कर भावुक हो उठा।

मोहित के पिता की भी हादसे में हुई थी मौत, मृतक आश्रित में मिली थी नौकरी
हरियाणा में सड़क हादसे में सौरिख क्षेत्र के ग्राम आदमपुर उम्मेद निवासी दरोगा मोहित यादव की मौत हो गई। वह जालौन जिले में तैनात थे। यह संयोग है कि मोहित के पिता उदयवीर सिंह यादव की भी 2017 में सड़क हादसे में मौत हुई थी। वह भी नागरिक पुलिस में दरोगा थे और फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद थाने में तैनात थे। आगरा -कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर शिकोहाबाद में ही बाइक एक्सीडेंट में उनकी मौत हो गई।

पीटीसी मुरादाबाद में हुई थी ट्रेनिंग
2018 में बड़े बेटे मोहित यादव को मृतक आश्रित के रूप में नियुक्ति मिली। उनकी ट्रेनिंग पीटीसी मुरादाबाद में हुई, इसके बाद जालौन जिले में तैनाती मिली थी। उनका एक छोटा भाई रोहित यादव है, जो गांव में खेती बाड़ी का काम देख रहा है। पति के बाद बेटे की हादसे में मौत से मां रेशमा देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। पत्नी नेहा यादव दो मासूम बच्चों के साथ जालौन में ही मोहित के साथ रहतीं हैं। इस घटना के बाद गांव में गम का माहौल है। परिवार के लोग सूचना मिलते ही हरियाणा के लिए रवाना हो गए हैं।

हादसे में जान गंवाने वाले सिपाही अशोक के पिता का निधन एक माह पहले ही हुआ था
जालौन जिले के उरई कोतवाली में तैनात बबेरू क्षेत्र के ब्यौजा गांव निवासी 28 वर्षीय सिपाही अशोक कुमार की हरियाणा में एक सड़क हादसे में मौत हो गई। एक माह पूर्व ही उनके पिता गुलाबचंद्र का आकस्मिक निधन हो गया था और अब बेटे की मृत्यु से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पड़ाेसियों ने बताया कि अशोक कुमार जो दो भाइयों में छोटे और अविवाहित थे।

पहले 100 नंबर (यूपी 112) वाली गाड़ी में तैनात थे
जालौन के उरई कोतवाली में सिपाही के पद पर तैनात थे। वह करीब दो साल से यहां सेवा दे रहे थे। इससे पहले वह 100 नंबर (यूपी 112) वाली गाड़ी में तैनात थे। इस दुखद घटना ने अशोक के पैतृक गांव ब्यौजा में मातम का माहौल पैदा कर दिया है। मां सुहदिया का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के पास लगभग तीन बीघे खेती की जमीन है। बड़े भाई इंद्रजीत ने मोबाइल फोन पर बताया वह फेरी लगाते हैं और खेती करते हैं। बताया कि उसकी शादी की बातचीत भी चल रही थी। घर में ताला लगाकर सभी लोग घटनास्थल के लिए निकल चुके हैं।

20 साल पहले परिवार के साथ फतेहगढ़ हो गए थे शिफ्ट
हरियाणा के नूंह जिले में झांसी में लेखपाल चकबंदी के पद तावडू स्थित कुंडली-मानेसर-पलवल पर तैनात हैं। सत्यभान सिंह पिछले (केएमपी) एक्सप्रेसवे पर मंगलवार सुबह हुए सड़क हादसे मैं गांव अलीपुर दादर के मूल निवासी दरोगा सत्यभान सिंह की भी मौत हो गई। वह जालौन जिले की उरई कोतवाली में तैनात थे। दरोगा सत्यभान सिंह की मौत की सूचना मिलते ही गांव में मातम पसर गया। उपनिरीक्षक सत्यभान सिंह पांच भाई थे। उनके बड़े भाई सत्यवीर सिंह गांव अलीपुर दादर में रहकर खेती करते हैं।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
दो भाई कीरत सिंह और बादल सिंह आगरा में रहते हैं, जबकि एक अन्य भाई गुरदेव सिंह झांसी में चकबंदी लेखपाल के पद पर तैनात हैं। सत्यभान सिंह करीब 20 वर्षों से फतेहगढ़ और फर्रुखाबाद के बीच बढ़पुर क्षेत्र में अपने परिवार के साथ रह रहे थे। परिवार में उनके तीन बेटे और दो बेटियां हैं। बड़े बेटे मंजीत सिंह की शादी हो चुकी है और उनकी उम्र करीब 26 वर्ष है। दूसरा बेटा विशाल 23 वर्ष और सबसे छोटा बेटा बाबू 18 वर्ष का है। उनकी बड़ी बेटी आनंदी (30 वर्ष) और छोटी बेटी पूनम (28 वर्ष) की भी शादी हो चुकी है। हादसे की खबर के बाद अलीपुर दादर में रहने वाले उनके भाई परिवार के साथ फतेहगढ़ रवाना हो गए।

रायबरेली पुलिस ने दी हादसे की सूचना
हरियाणा के नूंह में हुए हादसे में रायबरेली के मिल एरिया क्षेत्र के अंबेडकरनगर मोहल्ला निवासी आरक्षी प्रदीप कुमार की भी मौत हो गई। मंगलवार को सुबह करीब साढ़े 10 बजे यह हादसा धुलावट टोल प्लाजा के पास हुआ। घटना की जानकारी जब रायबरेली पुलिस को मिली तो मिल एरिया पुलिस सिपाही प्रदीप के आवास पर पहुंची। पड़ोसियों ने बताया कि परिवार के लोग जालौन गए हैं। प्रदीप मूल रूप से सरेनी भोजपुर के निवासी थे। उनकर परिवार शहर में मिल एरिया के अंबेडकर नगर में रहता है। वह जालौन में नौकरी कर रहे थे।
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Author: ILMA NEWSINDIA

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