60 साल के बुजुर्गों ने युवाओं को चटाई धूल, छह घंटे भी टिक न पाए नौजवान, प्रताप और देव बने विजेता

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पंजाब के मोगा में एक ऐसी प्रतियोगिता हुई, जिसमें नौजवान हार गए और बुजुर्ग जीत गए। दो बुजुर्गों के सामने अच्छे-खासे हट्टे-कट्टे नौजवान भी दम भरते दिखे। प्रतियोगिता थी पैर के बल बैठना, जिसमें 60 साल के दो बुजुर्गों ने बाजी मार ली।

60-year-old man wins competition in Moga

मोगा के गांव खोसाकोटला में शहीद गुरदर्शन सिंह स्पोर्ट्स क्लब ने एक अनोखा मुकाबला करवाया गया। पैरों के बल बैठने की प्रतियोगिता में 13 लोगों ने भाग लिया। खास बात यह रही कि नौजवानों के मुकाबले ज्यादा उम्र के बुजुर्ग खिलाड़ियों ने बेहतर प्रदर्शन किया और मुकाबला जीतने में सफल रहे।

प्रताप सिंह उम्र 60 साल निवासी खोसाकोटला और देव सिंह प्रधान उम्र 60 साल निवासी खोसाकोटला ने करीब 6 घंटे पैरों के बल बैठ कर संयुक्त रूप से पहला और दूसरा स्थान हासिल किया। दोनों को कुल 5200 रुपये नकद इनाम और कप देकर सम्मानित किया गया। तीसरे स्थान पर सुखमंदर सिंह को 1100 रुपये नकद इनाम दिया गया। बता दें कि इससे पहले जिले के गांव घोलिया में वेहले रहने का टूर्नामेंट करवाया गया था।

मुकाबला जीतने वाले देव सिंह ने बताया कि उन्होंने पूरी जिंदगी बैठकर हाथों से फसलों की कटाई की है, इसलिए उन्हें लंबे समय तक बैठने में कोई परेशानी नहीं हुई। उन्होंने बताया कि करीब छह घंटे तक पैरों के बल बैठकर उन्होंने यह मुकाबला जीता। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि इस मुकाबले में हिस्सा लेने वाले कई नौजवान थोड़े समय बाद ही बाहर हो गए। उन्होंने आज के युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि उन्हें ज्यादा से ज्यादा हाथ से मेहनत वाला काम करना चाहिए, ताकि वे भी शारीरिक रूप से मजबूत बन सकें और ऐसे मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

खेल के आयोजक इंदरजीत ने बताया कि खोसाकोटला में शहीद गुरदर्शन सिंह स्पोर्ट्स क्लब की ओर से पैरों के बल बैठने का मुकाबला करवाया गया। प्रतिभागियों में नौजवान लड़के, लड़कियां और बुजुर्ग शामिल थे। मुकाबला सुबह 11 बजे शुरू हुआ और शाम 6 बजे तक चला। अंत में प्रताप सिंह (उम्र 60), निवासी खोसाकोटला और देव सिंह प्रधान (60) निवासी खोसाकोटला शामिल थे। उन्हें संयुक्त रूप से पहला और दूसरा स्थान मिला। इस प्रतियोगिता में नौजवान खिलाड़ियों ने भी भाग लिया लेकिन नौजवानों के मुकाबले अधिक उम्र के बुजुर्ग खिलाड़ियों ने बेहतर प्रदर्शन किया। इससे यह साबित होता है कि पहले के समय के लोग शारीरिक रूप से बहुत मजबूत थे और आज भी उनकी फिटनेस और हौसला बरकरार है।

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Author: Farheen

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