अंता विधानसभा उपचुनाव को लेकर भाजपा में आंतरिक सियासत तेज हो गई है। प्रत्याशी मोरपाल सुमन के जवाब के बाद प्रदेश नेतृत्व ने पूरा मामला अनुशासन समिति को सौंप दिया है, जिससे पार्टी के भीतर हलचल बढ़ गई है।

राजस्थान की अंता विधानसभा उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी के भीतर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी मोरपाल सुमन को प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ द्वारा जारी किए गए कारण बताओ नोटिस के बाद अब मामला अनुशासन समिति तक पहुंच गया है। मोरपाल सुमन ने तीन दिन की निर्धारित अवधि के भीतर अपना जवाब प्रदेश अध्यक्ष को सौंप दिया है।
पूरा विवाद एक वायरल पत्र से जुड़ा है, जिसमें मोरपाल सुमन के साथ ललित मीणा विधायक और राधेश्याम बैरवा विधायक के नाम भी सामने आए थे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ललित मीणा ने कहा, “यह हमारे परिवार और पार्टी का अंदरूनी मामला है। पार्टी अपने स्तर पर इसकी जांच करेगी।”
वहीं विधायक राधेश्याम बैरवा ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, “यह पूरी तरह गलत है। हमने पूरे चुनाव के दौरान मोरपाल सुमन का पूरा समर्थन किया। हार-जीत तो राजनीति का हिस्सा है।
भाजपा के भीतर उठे कई सवाल
वायरल पत्र, उसके बाद प्रदेश अध्यक्ष का नोटिस, प्रत्याशी का जवाब और अब मामला अनुशासन समिति तक पहुंचना। ये सभी घटनाक्रम भाजपा की आंतरिक राजनीति में गंभीर संकेत दे रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अनुशासन समिति की जांच केवल मोरपाल सुमन तक सीमित रहेगी? क्या वायरल पत्र में जिन वरिष्ठ नेताओं के नाम आए हैं, उनसे भी पूछताछ होगी? क्या जांच के दौरान और नाम सामने आ सकते हैं? क्या पार्टी संगठन प्रभावशाली नेताओं पर भी कार्रवाई करने का साहस दिखाएगा?
फिलहाल इन सवालों के जवाब भविष्य के गर्भ में हैं, लेकिन इतना तय है कि यह मामला आने वाले दिनों में भाजपा की अंदरूनी राजनीति को और अधिक गर्माने वाला है।