Rajsamand News: हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रशासन सक्रिय, हल्दीघाटी-रक्त तलाई संरक्षण को लेकर संयुक्त निरीक्षण

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राजसमंद में ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर हल्दीघाटी और रक्त तलाई के संरक्षण को लेकर हाईकोर्ट के आदेशों की अनुपालना को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर-एसपी सहित 16 विभागों ने संयुक्त निरीक्षण कर सख्त निर्देश दिए।

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ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर हल्दीघाटी और रक्त तलाई के संरक्षण को लेकर राजसमंद में हाईकोर्ट के आदेशों के तहत जिला प्रशासन द्वारा दोनों स्थलों का निरीक्षण किया गया। कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा एवं पुलिस अधीक्षक ममता गुप्ता के नेतृत्व में 16 विभागों के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं, साफ-सफाई, संरचनात्मक स्थिति और सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की। निरीक्षण दल में एडीएम, सीईओ जिला परिषद, उप वन संरक्षक, एसडीओ, विकास अधिकारी, पुलिस, एएसआई, आरपीसीबी सहित विभागों के अधिकारी शामिल रहे।

रक्त तलाई क्षेत्र में कलेक्टर ने विशेष सफाई अभियान चलाने, नियमित कचरा निस्तारण, डस्टबिन लगाने, जल निकासी की स्थायी व्यवस्था करने तथा जर्जर सरकारी भवनों को ध्वस्त करने के निर्देश दिए। साथ ही केयरटेकर नियुक्ति, फेंसिंग-रेलिंग, सुव्यवस्थित पार्किंग पर भी जोर दिया गया।
ग्रामीण मार्ग पर दुकानदारों द्वारा किए गए अवैध अतिक्रमण को लेकर भी सख्त रुख अपनाते हुए कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि समझाइश के बाद भी सड़क पर सामान रखने वालों का माल जब्त किया जाए और क्षेत्र को नो पार्किंग जोन घोषित किया जाए।

वहीं हल्दीघाटी क्षेत्र में सुरक्षा रेलिंग, डस्टबिन, स्थायी सुरक्षाकर्मी, पार्किंग सुविधा, साइन बोर्ड और पार्किंग जोन चिन्हित करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के आदेशों की समयबद्ध और प्रभावी अनुपालना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

राजसमंद में स्थित देश की ऐतिहासिक विरासत हल्दीघाटी और रक्त तलाई के संरक्षण को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जोधपुर हाईकोर्ट ने हल्दीघाटी और रक्त तलाई के ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा और संरक्षण शीर्षक से इस प्रकरण को स्वप्रेरित जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया है।

हाईकोर्ट जज पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जज संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने 16 दिसंबर 2025 को जारी आदेश में हल्दीघाटी की बदहाल स्थिति पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा- ऐतिहासिक धरोहरों पर आधुनिक निर्माण का दबाव बढ़ता जा रहा है, जो इनके मूल स्वरूप को नष्ट कर रहा है। हाईकोर्ट ने इन स्थलों के ऐतिहासिक व सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि संरक्षण में लापरवाही संविधान और प्रचलित कानूनों का उल्लंघन है।

मामले में कोर्ट ने पर्यटन विभाग, लोक निर्माण विभाग, केंद्रीय और राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, कलेक्टर-एसपी उदयपुर, एनएचएआई, भारतीय पुरातत्व विभाग, राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव, वन एवं पर्यावरण विभाग समेत 16 प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए अंतरिम निर्देश दिए हैं।

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