सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए इक्विटी रेगुलेशंस 2026 पर रोक लगाए जाने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए केंद्र सरकार और UGC पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप जरूरी था, क्योंकि UGC के नए दिशानिर्देश अस्पष्ट, मनमाने और कैंपस में और अधिक भेदभाव को बढ़ावा देने वाले थे। उन्होंने कहा कि ये नियम प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ थे और इससे छात्रों के बीच भ्रम और असंतोष की स्थिति पैदा हो रही थी।
प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि जब उन्होंने इन नियमों का विरोध किया तो उन्हें ट्रोल किया गया, गालियां दी गईं और उनके सरनेम को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि वह अन्याय के खिलाफ आवाज उठाती रहेंगी और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए पीछे नहीं हटेंगी।
उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार ने जनता के विरोध और छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया। उनके मुताबिक, यह साफ हो गया है कि सरकार ने UGC के इन विवादित दिशानिर्देशों को वापस लेने या उनमें सुधार करने की अपनी जिम्मेदारी से किनारा कर लिया था।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को UGC के नए इक्विटी रेगुलेशंस 2026 के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इन नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि नियमों की भाषा अस्पष्ट है और इनके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। साथ ही यह भी आदेश दिया गया है कि अगली सुनवाई तक वर्ष 2012 के UGC रेगुलेशन ही लागू रहेंगे। मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को होगी।
इस फैसले को देशभर में UGC के नए नियमों के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलनों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। कई छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लोकतांत्रिक और न्यायसंगत करार दिया है।




